बस मुस्कुरा देता हूं…

तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
-सन्नी कुमार

तुमने ही मुझे संभाला है..

                                   With Love

दुनिया की खास खबर नहीं,
मैं आज अपनी बात ही करता हूँ,
नारी का क्या मोल जीवन में,
मैं उसी पर बात आज करता हूँ…

जब जीवन यह गर्भ में था,
एक नारी ने ही पाला था,
भूल के खुद के कष्टों को जिसने,
मुझे नौ महीने तक संभाला था..
जब जन्म हुआ थी वो सबसे हर्षित,
उसने ही परिचय दुनिया से करवाया था,
नजर लगे न धूप लगे,
सो ममता के आंचल में छिपाया था,
छलके थे उसके खुशी के आंसू,
जब मां कहकर उसे पुकारा था,
थी मेरा सर्वस्व वह नारी,
जिसने इस जन्नत में मुझे उतारा था..

बांटती है जो बचपन के किस्से,
मुझे आज भी नादान बूझती है,
बड़ी भोली है माँ मेरी,
वो आज भी ” खाना खाया” पूछती है….

शैशव में मुझे माँ ने संभाला,
बचपन की सखा बहनें भी थी,
खूब लड़े जिन रिश्तों से हम,
वो डोर बड़ी ही पक्की थी,
बहन के रुप में वह नारी,
मेरे चौखट की रौनक थी..
अब भी घर आने से जिसके,
बहार घर में आ जाता है,
है मेरी वो प्यारी बहनें,
जिनसे आंगन उपवन बन जाता है….
और फिर
जीवन बचपन की गलियों से निकल चुका था,
जवानी में अब सड़कें चौड़ी थी,
साइकिल तो कबका छूट गया,
अब मेट्रो में सफर जो करनी थी।
चकाचौंध थी सतरंगी दुनिया,
तब ख्वाबों से खुद को भरमाया था,
तब मिली थी एक हसीं दीवानी,
जिस नारी ने इकरार-ए-मुहब्बत कर डाला था,
थे बड़े हसीन वो लम्हे,
जब उसने काबिल-ए-प्यार बताया था,
था तब जीता ख्वाबों को दिल से,
उसने भावों का भूचाल मचाया था,
बदल गए तब कुछ लम्हे शब्दों में,
उसने इस मूरख को शायर बनाया था,
क्या होता है मुहब्बत को जीना,
यह एहसास एक नारी ने ही कराया था…
और फिर छूटे सपने, हकीकत जब रूठा,
फिर कुछ सखाओं ने भी समझाया था,
रिश्तों को निभाते है कैसे,
यह नारियों ने ही भान कराया था,
सहेजे है जो आज पन्नों में यादें,
यह भी एक नारी ने ही सिखाया था,
भावों के समंदर में तैरना कैसे,
यह गुड़ भी उसने ही सिखलाया था…

और फिर जब ख्वाबों से निकलकर बाहर आया,
खुद को किसी के सपने में पाया,
थी हसीन यह हकीकत ख्वाबों से ज्यादा,
मुझे जिसने अपना सर्वस्व बनाया,
था अधूरा जो जीवन में अबतक,
उसने उन खुशीयों को संभव कर डाला…

अपने ठौर को बदल के जिसने,
मेरे आंगन को है चमकाया,
कदम मिलाकर जो साथ है चलती,
वह जीवनसाथी नारी है,
दफ्तर, मकान, इलाज जो करती,
वह सब भी एक नारी ही है…

संस्कार को जिसने संभाला,
वह ब्रह्माणी-रूद्राणी नारी है,
नित नए जो किर्तीमान रचती,
उन सब में भी नारी है..

रक्तरंजित इतिहास के पन्ने,
वहां वीरांगना लक्ष्मी, पद्मिनी रानी है,
भविष्य की खोज में निकलती कल्पना,
या खेलों में साक्षी, सिंधु या सायना,
देश को रौशन करती बेटियां,
कदम-कदम पर नारी है..

अस्तित्व नहीं मेरा नारी बिन,
तुमने जीवन को महकाया है,
धन्य सभी इस जग की नारी,
दुनिया जो आपने सजाया है,
करबद्ध खड़ा हूँ जो ऋण में हूँ,
आपके उपकारों ने मुझे बनाया है,
नारी तुमने जन्म दिया,
और तुमने ही मुझे संभाला है..
-सन्नी कुमार
http://www.sunnymca.wordpress.com

Robotronics Show by Goenkans

On the launching event of NIIT Nguru centre in G D Goenka Public School Gaya, School’s Robotronics team have presented a show where students of Grade III-VII have shown their models and explained about its functions. Here I am sharing few of pictures from yesterday’s event and you might be glad to know that these kids were guided by me, in fact we all are learning together and finding it fun. Must say Robotics improves child’s mechanical as well as logical skills and children find it fun and enjoys every robotics session with lot of enthusiasm. 🙂

तुम्हारा जिक्र जरुरी है..

My Secret Diaryजिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है,
प्यार से महके मेरा जीवन,
सो तुम्हारे यादों का इत्र जरुरी है..
जिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है..

बेहतर है आज मेरा कल की रूसवाइयों से,
पर इस वर्तमान के मोल की खातिर,
तुम्हारा इतिहास जरुरी है..
जिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है..
-सन्नी कुमार

बधाई हो वोटर हुआ है!!

sunny-kumar-121विचित्र भारत! जहां एक ओर किताबों में जातिवाद के दोष पढाये जाते है तो दूसरी ओर राशन कार्ड, नौकरी और तमाम सरकारी कामों में जाति पूछा जाता है. जहां सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च न्यायायिक संस्था को धर्म और जात के नाम पर चुनाव लड़ना गलत लगता है पर अल्पसंख्य्क, SC,एसटी मतलब धर्म और जाति के आधार पर मिलने वाले रहम जायज़ लगते है, पूछ सकता हूँ कैसे?

विचित्र भारत! जहां सरकार उद्योगपतियों के साथ पीपीपी मौडल बनाकर काम करती है, उन्हें अरबों का ऋण देती है पर किसानों के लिये उसके सारे योजना हवाई होते है, फुस्स होते है, हद तो ये है की किसानों का शोषण किया जाता है, जब फ़सल नहीं हुयी तो नुकसान किसान का, अगर खूब हो गया तो 2 रुपये किलो बेचने को मजबूर होना होता और शायद यही कारण है की किताबों में कृषी को घाटे का शौदा और जुआ कहा गया है, और आज की युवा खेती से दूर भाग गयी है पर अगर किसान बनने बंद हो जाए, खेती को शौदा न समझ सेवा समझने वाले न रहे तो जीवन बचेगा? उगाना छोड़ दिया, खाना छोड़ सकेंगे.? नहीं न? तो फिर खेती शौदा है ये पढाना बंद करेंगे? सरकार कुछ हिम्मत किसानों संग दिखायेगी या सारा विकास कुछ चंद क्षेत्रों के विकास से ही हो जायेगा??
विचित्र भारत! जहां चपरासी बनना हो तो शैक्षनीक योग्यता तय है पर राजनेता अंगुठा टेप कर भी बन जाते. क्यों क्या नेताओं के अनपढ़ होने से उनके निर्णय का असर समाज, देश पर नहीं परता? अगर नहीं तो फिर नेताओं की जरूरत ही क्यों?
विचित्र भारत जहां जनसंख्या विस्फोट की स्थिति के बावजूद बच्चों के जन्म पर इनाम(प्रोत्साह्न) राशि मिलता है. क्यूँ? क्या सरकार ये सोंचती है कि बधाई हो वोटर हुआ है!!

 

When I met Jaisurya

 

sanath-jaisurya-pepercuttingIt is December, the month which i loves most, which has already blessed me with my life, my first love, first bicycle and more has offered me something unexpected this time. Yes, Day before Yesterday and Yesterday also, I mean i have had spend my two day with the legendary batsman, Mr. Sanath Jaisurya and have learnt simplicity, real class and few cricketing tips.
Well, being a cricketer i never thought that I would even manage to meet state level players, but in last six months due to my school, G D Goenka Public School, Gaya I got opportunity to meet few Ranji Players, Md Azharaduddin and this time Mr. Sanath Jaisurya. Yes I managed to get photographs, Autographs, hand shake opportunity too… I am happy, really I AM.

हर लब्ज में नाम तुम्हारा है..

life-iz-amazing-4सुबह की ओस में मैंने,
तेरी छुअन को पाया है,
शाम रंगीन आसमां में मैंने,
तेरी हलचल ही देखी है.
इस रात की चांदनी तुम,
तुमने ही इन्हें महकाया है,
जब भी हुयी है ये आँखें बंद,
इसने ख्वाब तेरा ही सजाया है.

तेरी नाराजगी में मैंने खुद को महफूज़ पाया है,
तेरी ख़ुशीयों में मैंने खुद को ही अब पाया है,
जब भी सुनी है हमने धुन तेरे धडकन की,
उसने भी मेरे सुर से ही अपना धुन मिलाया है.

खुशियाँ जो भी मेरी है, अब उनमें नाम तुम्हारा है,
चाहत दिल में जो भी है, अब इनपे हक तुम्हारा है,
जिंदगी कल क्या हो नही देखा है मैंने,
पर अब मेरा हर आज तुम्हारा है.

आँखों का इन्तेजार,
नींदों का ख्वाब,
हर लब्ज में नाम तुम्हारा है.