Holi Special

होली में बौराय के,
हम खूब करब ठिठोली,
जे-जे लगिहे भाभी हमर,
सबके रंगब घघरा-चोली।
जोगीजी सारारारा

भइया के पैर छुअब,
बउआ के नेह के चन्दन,
रंग से शराबोर करके,
हम करब सबनी के वंदन..
जोगीजी सारारारा

भरब एमरी न बाल्टी में पानी,
न पिचकारी ले के दौरब,
जे-जे कहिहै पानी बचाव,
सबके नाली में रखब..
जोगी जी सारारारा 😜

होए जे भी मन में मैल,
उ ये होली हम धोएब,
मिलब बिछुड़ल से और बड़कन से,
सबके आशीष हम लेहब…
जोगीजी सारारा
©सन्नी कुमार ‘हुड़दंगी’
Sunnymca.wordpress.com

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क्या इसलिये मोदी सही नहीं?

चुनाव समीप है जरा विचारिये की मोदी से इतर हमारे पास विकल्प(अगर है तो) क्या है? कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता बतायेगा कि UPA का प्रधानमंत्री उम्मीदवार कौन और किन कारणों से है और वह किस मामले में मोदी से बेहतर है(हो जाएगा नहीं)? NDA और UPA से अलग कोई अन्य गुट भी है क्या, अगर है तो उसके बॉस कौन है(होंगे)?
हर सवाल सत्तापक्ष से ठीक है पर जो मोदी विरोध में देश का महत्वपूर्ण समय बर्बाद करा रहे उस Congrace और उसके पैरविदार मीडिया वाले क्या नमो बनाम अन्य भावी PM उम्मीदवारों में तुलनात्मक विश्लेषण करने का हिम्मत रखेंगे?
आजकल वामपंथी अख़बार मोदी को राफेल, नोटबन्दी और रोजगार सृजन न करने को लेकर घेर रहे है और इसमें वो सफल भी हो रहे है पर मोदी नहीं तो कौन? क्या मुल्क कोशिश करने वाले को ठुकरा कर उनको ले आएगी जिनका पक्षतापूर्ण रवैया एक डरावना सपना था? क्या हम उस दौड़ की वापसी चाहेंगे जब कहीं भी कभी भी पब्लिक प्लेस में बम फट जाता था, क्या हम वह दौड़ फिर से जीना चाहते है जब एक सिलिंडर रिफिल कराने के लिए पूरा दिन बर्बाद करना होता था या कालाबाजारियों से ब्लैक में लेना होता था? क्या हम मनरेगा में फिर उन लोगों को नौकरी दिलाना चाहते है जिनको गुजरे जमाना हो गया? I mean तब तो रोजगार कार्ड उनके भी थे जो न थे? क्या हमें सरकारी सब्सिडियों का सीधे एकाउंट में आना, सिस्टम का ट्रांसपेरेंट होना खटकता है? साहब, आप सम्पन्न है वरना उज्ज्वला योजना से गरीबों को क्या मिला है वह हम जैसे गांव से जुड़े लोग जानते है, मुफ्त में कनेक्शन चूल्हा-सिलिंडर सब, फिर भी आप नाराज है क्यों? प्रधानमंत्री आवास योजना से बनते घरों का जायजा लीजिये इसके लिए दिल्ली के न्यूजरूम से, फेसबुक की दुनिया से निकलकर गाँव आना होगा और फिर तुलना कीजिये। शायद आप हवाई जहाज से घूमते है वरना सड़कों पर हुए काम आपको अवश्य दिखते, 5 साल पहले बिजली कितने घण्टे थी और अब कितनी है, कई गांव ऐसे थे जो अब तक अंधेरे में थे अब वहां बिजली है तो क्या इसकी तारीफ नहीं होगी? नोटबन्दी से परेशान हम भी हुए थे पर 10-20-50 नोट बदलना इतना भी मुश्किल नहीं था और अगर यह प्रयास फेल रहा था तो mygov.in पर सुझाव दे सकते थे, दिया था? राफेल 10 साल तक नहीं लाने वाले अब भी नहीं आने देना चाहते और पूरा विरोध इसी के लिए है पर मोदी और राफेल दोनों थोड़े महंगे है पर जरूरी है क्योंकि अब कैंडल जलाने वाला देश नहीं चाहिए, गांधी टोपी पहन अपना उल्लू सीधा करने वाला नेता नहीं चाहिए अब नेता वह हो जो कोशिश करे सफल हो असफल हो पर कोशिश ईमानदार हो, और फिर टारगेट हिट करे। ऐसा क्यों है कि Dawn और The Hindu का स्वर समान लगता है ऐसा क्यों है कि जो प्रश्न पाकिस्तान के है वह हमारा विपक्ष पूछता है, ऐसी कौन सी दिक्कत हौ कि विपक्षियों से ज्यादा पाकिस्तानी लोग मोदी विरोध के कैम्पेन में लगे है?(कृपया कर मेरा यकीन न करे और फेसबुक ट्विटर और ब्लॉग्स पढ़े आप भी मानेंगे कि पाकिस्तानियों में मोदी को लेकर क्या बेचैनी है.)
तब 2014 में मनमोहन बनाम मोदी का दृश्य नही था, लोगों ने सेंट्रल गवर्नमेंट को फेल मानकर और मोदी को सफल प्रशासक के रूप में स्थापित होने के बाद ही देेश की कमान दी थी और लोगों का मानना था कि गुजरात मॉडल पर देश विकास के पटरी पर तेज दौड़ेगा, लोग सन्तुष्ट भी है और असंतुष्ट भी पर अब जब एक बार फिर से चुनाव का अवसर है जाना है तो तथाकथित बुद्धिजीवी लोग विकल्प में क्या सुझाएंगे? क्या मोदी के मीडिया को सरकारी खर्च पर विदेश भ्रमण न कराने के कारण भी लोग नाखुश है? क्या कालाबाजारी करते लोग भी नाखुश है? क्या ब्लैक से सिलिंडर बेचने वाले युवा बेरोजगार है इसलिए नाखुश है? क्या पूर्व प्रधानमंत्री की तरह इन्होंने देश की संसाधनों पर मज़हब विशेष का पहला हक़ नहीं दिलाया इस लिए नाखुश है? क्या OROP की लंबी मांग सुने जाने के कारण लोग नाखुश है? क्या 1 रुपये में मिलने लगे इन्सुरेंस से और जन धन के अत्यधिक खुल गए एकाउंट से लोग(बैंककर्मी) नाखुश है? क्या अभिनन्दन के सकुशल लौट आने से आप नाखुश है? क्या आप शांति पसन्द लोग है और उड़ी और आप सर्जिजल स्ट्राइक से आप नाखुश है? या आरक्षण की राजनीति करने वाले लोग सवर्णों के लिए घोषित 10% आरक्षण से नाराज है? या आप कुम्भ के दौरान गंगा की अविरल-निर्मल धारा से परेशान है? क्या अन्य नेताओं की तरह मोदी ने भी खुद की मूर्ति का लोकार्पण कर दिया या नेहरू से भी बड़े हो गए सरदार के कद से दिक्कत है? डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, मुद्रा योजना जैसी योजनाओं से कैसा दिक़्क़त या आपकी दिक्कत इस बात से है कि गाँव के लौंडे स्टेशन की फ्री wifi का उपयोग कर आपसे बेहतर विश्लेषण कर देते है और आपको TV स्क्रीन काला करना परता है तो कभी TV न देखने की सलाह देनी पड़ती है। बेशक इन पाँच सालों में बहुत असहिष्णुता हुई है नेताजी से जुड़े अधिकांश दस्तावेज आज पब्लिक डोमेन मे है, 70 साल बाद आजाद हिंद फौज के क्रांतिवीर इंडिया गेट पर पैरेड में शामिल हुए, क्या आप इस विचार से घबराते है?
मोदी निःसन्देह बेहतर नहीं हो सकते पर उनके नियत पे शक किन कारणों से इसको स्पष्ट करेंगे क्या विपक्ष में बैठे लोग? आज नीरव मोदी और माल्या को लेकर घेरा जा रहा है, घेरा जाना भी चाहिए पर अगर वह देश भागने पर मजबूर है तो वजह क्या मौजूदा व्यवस्था नहीं है, क्या यह गलत है कि दोनों ने UPA के शासनकाल में ही सरकार और डेढ़ चुना लगाया था? क्या नीरव मोदी के कारण देश नरेंद्र मोदी को ठुकराकर नेशनल हेराल्ड, अगस्ता वेस्टलैंड, 2G, कमन्वेल्थ, कोयला घोटाले करने वाले दल को और उसके चहेते लालू, ममता मायावती को स्वीकार कर ले??
वैसे मेरा राहुल (द्रविड़) आपके राहुल से बेहतर है. सवाल सारे एक साथ देख घबराए नहीं योग्यता अनुसार उत्तर दे, आपको समयसीमा की पूरी छूट है।
-सन्नी कुमार

सारी-सारी रात जागे

सारी-सारी रात जागे,
तुमसे मुहब्बत की आग जागे,
हूँ मैं दरिया खुद में लेकिन,
तुमसे ही अब प्यास जागे,
सारी-सारी रात जागे…

मुझमें है जो ख़्वाब सारे,
तुमसे ही अब मिलना चाहे,
हूँ मैं खुद में ख़ल्क़त लेकिन,
तुझमें ही अब बसना चाहे,
सारी सारी रात जागे…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

ख़ल्क़त का अर्थ संसार/दुनिया सर है…

राष्ट्रद्रोही स्वीकार नहीं न ही राष्ट्रवाद के नाम पर उद्दंडता

लखनऊ में हुई कश्मीरी युवक की पिटाई कल सुर्ख़ियों में थी, भगवा गमछे में दो उद्दंड लोगों को ये हरक़त करते दिखाया गया। मीडिया ने इसे खूब परोसा पर इसके कारण को समझने की कोशिश न की गई तो सोंचा कि मैं ये कोशिश कर लूं और जो विचार मुझमें है उसे आपके माध्यम से पूरे देश में ले जाऊं।
दरअसल पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही पूरा देश गुस्से में है और यहाँ कश्मीरियों को यह समझना होगा कि अगर भारत भर पे उनका अधिकार है तो भारतभर का अधिकार भी कश्मीर पर है और एकतरफ जब आप खुलेआम घाटी में, JNU, AMU या विभिन्न सोशल साइट्स के माध्यम से भारत विरोध के घटिया नारे लगाते है तब आम जनता आपके खिलाफ विचार बना लेते है और फिर जब आप ग्रेनेड बरसा सकते है, आतंकियों का खुले समर्थन कर सकते है, बुरहान और अफजल के मय्यत को रिक्रूटमेंट शिविर समझ सकते है तो कुछ उद्दंड तो आपको यहाँ भी मिल ही सकते है जो कश्मीर के बारे में गलत विचार बना ले और फिर उसका खामियाजा आपको भुगतना पड़े। इसलिए बिना मतलब का चिखिये मत और सच को समझिए कि आपने जो बबूर बोया यह उसका एक छोटा सा कांटा है, अगर अब भी न सम्भले तो स्थिति आपके लिए और भयावह हो सकती है और इसके लिए दोषी भी स्वयं आप ही होंगे।
आज की तारीख़ में आप हर भारतीय को गांधी-नेहरू समझने की भूल तो बिल्कुल न करे, थोड़ा इमोशनल, थोड़ा सख्त और राष्ट्रीयता को जीता यह न्यू इंडिया है और इससे गलती न हो यह हम सब की जिम्मेदारी है अतः आप, हम सब सही से रहे…
वैसे जिन समाचार पत्रों के फेसबुक पेज ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है उन्हीं समाचारों पर जम्मू में हुए विस्फोट को पढ़िए और खुद इनके एजेंडा को समझिए. धन्यवाद
-सन्नी कुमार ‘अद्विक

मुझे क्यों तुमसे प्यार है

तुम पूछती हो न कि मुझे तुमसे क्यों प्यार है,
होठों पे क्यों तुम्हारा ही नाम है,
तो सुनो एक सच तुमको आज दिल से मैं बताता हूँ,
चाहा है जबसे तुमको हुआ तबसे मुझे खुद से ही प्यार है..

तुम्हारे होंठों पर जब भी सजता हूँ मैं,
सच है सुकून में तब होता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखे मुझे ख्वाब दिखाती है,
मेरा होना इनमें मुझे खुद से ही मिलवाती है,
सच है कि मुझे इश्क़ है तुमसे बेपनाह,
क्योंकि यह मुझमें इंसान बसाती है…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

महिला दिवस को समर्पित कविता

Happy International Woman’s Day to everyone. Not just today but every day is urs. Enjoy

Life iz Amazing

दुनिया की ख़ास ख़बर नहीं,
मैं आज अपनी बात ही करता हूँ,
नारी का क्या मोल मेरे जीवन में,
मैं उसी पर आज कुछ कहता हूँ।

जब जीवन यह गर्भ में था,
एक नारी ने ही पाला था,
भूल के खुद के कष्टों को जिसने,
मुझे नौ महीने तक संभाला था।

जब जन्म हुआ थी वो सबसे हर्षित,
उसने ही परिचय दुनिया से करवाया था,

नजर लगे न धूप लगे,
सो ममता के आंचल में छिपाया था।
छलके होंगे उसके खुशी के आंसू,
जब मां कहकर उसे पुकारा था,
थी मेरा सर्वस्व वह नारी,
जिसने इस जन्नत में मुझे उतारा था।

बांटती है जो बचपन के किस्से,
मुझे आज भी नादान बूझती है,
बड़ी भोली है माँ मेरी,
वो आज भी ” खाना खाया” पूछती है।

शैशव में मुझे माँ ने संभाला,
बचपन की सखा बहनें भी थी,
खूब लड़े जिन रिश्तों से हम,
वो डोर बड़ी ही पक्की थी।

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उसने कहा था कि क्या खूब लिखते है आप

उसने कहा मुझसे की क्या खूब लिखते है आप,
मैं सच्चा था कह दिया क्या ख़ाक लिखता हूँ मैं,
वो मासूम है न समझी, तो बतलाना पड़ा,
की हजारों भावों का होना है तुम्हारे साथ,
उनमें से मुश्किल-ए-दो-चार लिखता हूँ,
यूँ तो समंदर भर है तुमसे हसरतें,
पर आदमी बौना हूँ एक-आध लिखता हूँ,
कभी तो मन होता है कि तुम्हें एक कामयाब क़िताब बना सजा लूं,
पर डर है कि जो तुम किताब हो गई तो कहीं खो न दूँ तुम्हें,
सो तुम्हें ही तुम्हारी कविताएं लिखता हूँ,
तुम ही कहो क्या मैं मस्त लिखता हूँ,
तुम हो एक खूबसूरत ख़याल मैं बस शब्द गढ़ता हूँ,
है जो तुमसे मुझमें मुहब्बत,
उसी को कागज़ पर समेटता हूँ…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Why there is Muhammad in JeM

कुछ मासूम है मुल्क में जो पाकिस्तान को सरहद के उस तरफ समझते है, सच को समझिए पाकिस्तान मुल्क कम एक जाहिल सोंच है जो हमारे भारत में भी हजारों जगह पलता है, आस पास में ही लोगों के वक्तव्यों पर गौर फरमाइए पाएंगे सर्जीकल स्ट्राइक की पीड़ा इनलोगों ने भी महसूस की है, यह सोंच ही हमारे मुल्क का दुश्मन है और चिंता इस बात की है कि इस सोंच को रोकने के लिए इलेक्ट्रिक फेंसिंग नहीं कर सकते। यह पाकिस्तानी(जिहादी) सोंच अफ़ग़ान में भी है, इराक में भी सीरिया में भी, फ्रांस में भी और हमारे हिंदुस्तान में भी जिसने इस पूरे विश्व को खंडित रक्तरंजित करने का साजिश रचा हुआ है।
मैं किसी की भावना को ठेस नहीं पहुंचाते हुए पूछ सकता हूँ क्या कि ये जैश ए मोहम्मद नाम, जमात ए इस्लाम, ISIS की जरूरत क्यों? क्या ये साम्प्रदायिक संघठन है या मुहम्मद जी का प्रचार करती है? नहीं न! फिर तमाम आतंकी संघठनो का नाम ऐसे रख किसी सम्प्रदाय को क्यों बदनाम किया जाता है? क्या इसमें भी किसी और की साज़िश है?

कब तक हम आंख बंद करके ऑल इज़ वेल कहते रहेंगे और ख़ुद को सच से दूर रखेंगे? आज ये तमाम आतंकी संगठन किसी मुल्क के लिए नहीं, किसी मानवता या मुहम्मद के प्रचार के लिए नहीं बल्कि खुद का खौफ बेच कर अपनी सत्ता को बढ़ाना चाहते है और इनके शिकार न सिर्फ मुम्बईकर या पुणेकर होते है बल्कि इनकी जाहिलियत से पेशावर और करांची भी कांपता है, युद्ध के साथ साथ अब इनकी आर्थिक नसबंदी भी जरूरी है, आप एक जागरूक खरीददार बनिये और जाने-अनजाने ऐसे किसी पाक प्रेमी से अपने कफन खुद मत खरीदिये। हाँ खुद भी शसक्त बनिये, खून आपमें भी है, खौलने दीजिये। जय हिंद जय भारत।
सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Pakistan Supports Terrorist outfit JeM!

इस मुल्क की किस्मत में आतंकी पड़ोसी है और मंदबुद्धि परिवार के लोग है जो इन आतंकियों का जाने अनजाने में समर्थन कर रहे। आज अभिनन्दन रिहा हो रहे है हम सब खुश है पर जो लोग उरी मे, पुलवामा में शहीद हुए वो अब लौट नहीं सकते क्योंकि पाकिस्तान के पाले कुत्ते जिनको जिहाद दिखता है हर आतंकी दहशत में, ने हमारे मुल्क के निर्दोषों को न केवल क्षति पहुंचाया बल्की इन दहशतगर्दों के बचाव में आज पाकिस्तान की सेना भरतीय सेना को चुनौती दे रही है जो शर्मनाक है और साबित करता है कि पाकिस्तान आर्मी भी आतंकियों से भरा हुआ है।
आज सोशल मीडिया में जो लोग इमरान के गुणगान कर रहे है क्या वही लोग उस दोहरे चरित्र वाले आतंकी पोषक PM से अजहर मसूद, हफ़ीज सईद की वापसी मांग सकते? मत भूलिए अभिनन्दन को लौटाना उसकी मजबूरी है वरना जिस जाहिल मुल्क ने कुलभूषण को बंदी रखा है वह इतने नाजुक माहौल में अभिनन्दन को कैसे छोड़ता? आज पीस गेस्चर की नौटंकी करने वाले पाकिस्तान और उसके समर्थक का विरोध तबतक जारी रहे जब तक वह अपने मिट्टी में आतंक को पोषता है.. हमें आज एक साथ हमारे तीनों सेनाओं को, मजबूत सरकार को और विश्व की बड़ी शक्तियों का भी आभार करना चाहिए और एक सशक्त नागरिक बनना चाहिए…क्योंकि मुल्क हमसे ही है, जय हिंद, जय अभिनन्दन!

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