नव वर्ष की मंगलकामनाएं

1st-Jan-16(4).नव वर्ष में, हर नए दिन में,
हम कुछ नया करे, बेहतर करे,
कल से बेहतर हर आज को करे,
खूब जिए, खूश रहे आने वाले वर्ष में..

ईश्वर का हो आशीर्वाद,
परिवार और दोस्तों का मिलता रहे साथ,
आप हर दिन में खूब करे तरक्की,
ऐसी कामना मेरे मन की…

खुश रहे, मस्त रहे.
और हाँ बस दिन बदला है हम और आप वही है..
सो अपनी केमिस्ट्री जैसी थी वही रहेगी,
अलबत्ता पहले से बेहतर होगी..
-सन्नी

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बिहारी हूँ

बिहारी हूँ,
मेहनत करता हूँ, पर पंजाब में,
फैक्ट्री लगाता हूँ, पर मौरीसस में,
आईएएस, आईपीएस, नेता खूब बनता हूँ,
और जब शांति से जीना हो तो दिल्ली, बंगलौर, मुंबई शिफ्ट करता हूँ..

बिहारी हूँ,
हर साल छठ में अपने घरवालों से मिलने आता हूँ,
उनको मुंबई, गुजरात, दिल्ली की समृद्धि सुनाता हूँ,
मिलता हूँ बिछड़ो से, कोसता हूँ नेताओं को,
फिर छुट्टी ख़तम, ट्रेनों में ठूस-ठूसा कर प्रदेश लौट जाता हूँ..

बिहारी हूँ,
बुद्ध, महावीर, जानकी से लेकर
चाणक्य, मौर्य, अशोक आर्यभट तक पे इतराता हूँ..
पिछड़ गया हूँ प्रकृति पथ पर,
पर राजेन्द्र, दिनकर, जयप्रकाश की बातों से खुद को खूब लुभाता हूँ..

बिहारी हूँ,
पढ़ लिख कर बिहार छोड़ पलायन का राश्ता चुनता हूँ,
राजनीती भी समझता हूँ पर मैं परदेशी वोट गिरा नही पाता हूँ,
ठगा जा रहा हूँ वर्षों से फिर भी जाति मोह से उपर नही उठ पाता हूँ,
खुद कुछ खास कर नही पाया सो अब नेताओं को दोषी बताता हूँ…

बिहारी हूँ,
मैं इतिहास, भविष्य के मध्य वर्तमान को क्यूँ बुझ नहीं पाता हूँ?

–सन्नी कुमार

क्या रेपिस्ट भी नाबालिग होता है?

बहुत से लोगों ने कोर्ट के फैसलों को स्वीकार किया है, करना भी चाहिए पर फिर उनकी ये दलील की दोषी नाबालिग था इसीलिए छोड़ा जाना चाहिए, एकदम असंवेदनशील है. सुना है इस देश में मुसलमानों के पर्सनल लॉ बोर्ड भी है तो क्या उस तरफ केस कर देने से इस अफरोज को सजा मिल सकती है या उस बोर्ड का काम बस तलाक दिलवाना भर है?? वैसे हो सकता है की बुद्धिजीवियों के तर्क का आधार उनमे अधिक ज्ञान का हो जाना हो जिस कारण वो दिमाग को दिल पे हुकूमत करने वाले ज़ोन में ले गये हो पर मुझे कोई भी रेपिस्ट नाबालिग नहीं लगता और उम्मीद करता हूँ की राज्य सभा के मेंबर, जिन्हें सीधे तौर पे जनता नहीं चुनती, जो पिछले दरवाजे से संसद तक पहुंचते है और जिनमे सचिन तेंदुलकर जैसों का नाम होता है जो कभी संसद जाते भी नही, ऐसे नक्कारे लोग जन भावनाओं को समझते हुए एक ढंग का कानून लाएंगे जो लोगों को कानूनसंगत जीने के लिए प्रेरित करे वरना अबतक तो कानून खुद असहज है और बलहीन बाहुबली का टैग लिये फिर रहा…
बाकी एक और नाबालिग छोरी जो अमनपसंद कौम की है ISIS की राह पे चलने वाली थी पर बचा ली गयी है, और उसको भी केजरीवाल सरकार और NGO नेटवर्क से नाबालिगों वाली दयादृष्टी का इन्तेजार है, आखिर वो भी अमनपसंद और देशविरोधी सोंच लिए घूम रही….
असहिष्णु सन्नी

मैं शर्मिंदा हूँ

वह गरीब की बेटी थी और शर्म इस बात का है की जीते जी सुरक्षित न रख पाने वाला कानून उसके मरने के बाद भी उसको इंसाफ न दे पाया. अब बारी परिवार की है, समाज की है…आंसुओं से कुछ नहीं होगा, बुराई चरम पर है, कायर मत बनो, सीख दो, सम्भाल लो समाज को, सही सन्देश दो..गीदर को पीट पिट कर मार देते है और जबतक मार नहीं पाते है इसको हर रोज मारते है.. इसकी फोटों चिपकाओ, इस हरामी की जो भी मदद करें उसका बहिष्कार करो… अगर नहीं करोगे तो अगली निर्भया तुम्हारी बेटी हो यही प्रार्थना यही श्राप.. दिल्लीवालों कह दो की साथ हो और शर्मिंदा भी…

क्या देश में कानून है?

क्या इस देश में कानून है? अगर है तो कहाँ?? अपने को तो कानून नहीं दीखता. साला बिना हेलमेट निकलो तो ये पकड़ते है, थोडा डांट डपट सुनते और फिर 50 रूपये देकर सब सेट कर लेते है.. अपन छोट मोट सेटिंग करते है तो सलमान, संजय, लालू टाइप लोग बड़े मामले सेट कर लेते है, मेरा मतलब अगर जेब में रुपया है तो सब सेट होगा,,, कोई कानून नहीं है देश में अगर है भी तो अनुशासित लोगों के लिए, कानून बकड़ियों के लिए है गीदरों के लिए तो कानून ही नहीं है, वो निर्भया का दोषी, हरामी एक दो दिन में छूटेगा और हम साले कैंडल जलायेंगे, फ़ोटो अपडेट करेंगे, पोस्ट करेंगे…इस देश का कानून दोषी को बचाने के लिए रात के 2 बजे उठ कर आखिरी कोशिस करता है पर किसी दोषी को सजा देने से पहले ये खुद काँपता है..
मालूम नहीं सुब्रमण्यम स्वामीजी को क्या मजा आ रहा है की वो निरर्थक कोशिशे कर रहे है, अरे भई ठीक है आपने 2G घोटाले को उजागर किया पर क्या हुआ? कुछ ले दे के सब सेट कर लीजिये क्या फ़ालतू में लोगों का और अपना टाइम खराब कर रहे?? जो लालू सर्वघोसित चोर है वो बाहर मजे ले रहा, राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी, पूरा व्यापम घोटालेबाज सब ससुरे बाहर है और अब जब ये छोटकू लोग कानून के जाल को काट लेते है तो ये माँ-बेटे दोनों मगरमच्छ है पूरा जाल ले के ही उड़ लेंगे…..
सो दोस्तों सक्षम बनो, पैसे बनाओ कभी जरूरत हो तो सब सेट भी तो करोगे…बाकी देश में खासकर न्याय व्यवस्था में कुछ भी कभी ठीक न था…

HO NA HO/ जिन्दगी

नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
आत्मा से आत्मा,
तन की बिसात क्या ,
हो ना हो |
दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

सीपियाँ/Indira's Hindi blog

नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
आत्मा से आत्मा,
तन की बिसात  क्या ,
हो ना हो |
दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

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काफ़िर की सोंच

कमलेश तिवारी ने गलत तार छेड़ा है, गलत बात कही है, किसी के धर्म का उपहास गलत है, खासकर तब जब समूचा धर्म व्यक्तिविशेस पर टिका हुआ है…बहुत गलत।
मुसलमानों, आपके आसमानी किताब के अनुसार मैं एक काफ़िर(मुहम्मद को न मानने वाला) हूँ पर आज आपके साथ हूँ। आपसे सहानुभूति है, और इस सहानुभूति की वजहें कई है.. सबसे पहले तो ये की आप अपने धर्म को खूब मानते हो बल्कि देश से और सबसे ऊपर मानते हो। गर्मी हो, बरसात हो या ठिठुरता शर्द, बाजार में हो, गाँव में, ट्रेन में या खेत में आप डेढ़ बजते ही मस्जिद के हॉर्न बजने का इन्तेजार करते हो और फिर जहाँ जगह मिले आसन टिकाकर उपरवाले को याद करते हो। कई बार अजीब भी लगता है जब गर्मी के दिनों में सड़कों पर आपको सड़क छेंक उपरवाले को याद करते देखता हु, बड़े वफादार हो आप सब। वफादारी ही तो है की कुछ लोग उपरवाले को याद करते करते खुद को बम से भी उड़ा देते है और अपने टिकट पर कई काफिरों का या गैर फिरकों का भी उपरवाले से मीटिंग करा देते है। वाक़ई समर्पण के मामले में आप मुझ से आगे हो, मैं तो फर्जी आस्तिक हूँ बस खुशियाँ मनाता हूँ पर आपलोग अपने त्योहारों में खुद को ही जखमी कर लेते हो और फिर बिना इस बात के परवाह किये की राष्ट्रगान/राष्ट्रगीत न गाओगे तो लोग गलियां देंगे, आप दीन के होते हो। देश तो प्राथमिकता था भी नहीं कभी तभी एक अलग देश जिसका आधार भी आपका इमान आपका धर्म था अलग बनवा लिया..और कइयों के जड़े, नाते अबी भी वही है जो अक्सर नजर आ जाते है।
खैर, आज जब आपलोग अपने इमान को बाकियों से बेहतर जी रहे हो तो ये कमलेश टाइप लोग टिपण्णी कर देते है.. तिवारी सरीखे लोग इमान को भी शायद काफिर बुझने की भूल कर बैठते है, की जैसे काफ़िर गौ माता गौ माता चिल्लाएगा पर कसाई को देख भाग जायेगा.. इनको पता नहीं की चार्ली हेबडो के उस पत्रकार का क्या हुआ, इनको पता नहीं तसलीमा नसरीन और सलमान रश्दी का क्या हुआ..
खैर मुझे आपसे न केवल सहानुभूति है बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी विश्वास है कि क्या हुआ जो आजम, ओवैसी का कुछ न बिगाड़ सके, मकबूल हुसैन का कुछ न कर सके पर कमसे कम तिवारी का तो कुछ करे.. ये कोई बात हुयी की किसी के धार्मिक भावना को भड़काए? वो भी दुनिया के इकलौते इमान वाले सच्चे धर्म के पूजनीय पर टिपण्णी?? अदालत जल्द सजा दे यही आशा, बाकी आप लोग का अपना नेटवर्क भी है ही, ISI, ISIS और न जाने क्या क्या.. और अब तो इनाम की घोसना भी कर ही चुके हो, तो बस अब किसी फियादीन  तक खबर पहुंचने भर की देर है, कसाब, अफजल याकूब की कमी थोड़े है ईमान को…
आपका काफ़िर पड़ोसी

गरीबी, जनसंख्या और दोषारोपण

भूलन पहले रिक्शा चलाता था पर जब से टीबी हुआ है रिक्शा छूट गया है, खेत में भी काम नहीं कर पाता बस थोडा बहुत टहल-टिकोला किसी का कर देना उसका काम है और उसकी बीबी खेतिहर मजदूर है, गाँव के ही एक सम्पन्न किसान के यहां दिन रात एक किये रहती है और उसी के मेहनत से घर चलता है।
भूलन के मात्र 5 बच्चे है (मात्र 5 इसलिए क्योंकि भूलन के भाइयों के 8-8, 10-10 बच्चे है), तीन बेटियां और दो बेटे। दोनों बड़ी बेटियां, जिनकी उम्र 14-15 की रही होगी तभी ब्याह दिया था, सच तो ये भी है की जो दूसरी बेटी थी उसको राज्य से बाहर बियाहा था और लड़का भले उम्र में उससे बहुत बड़ा था, बोले तो 35-40 का, पर था खूबे अमीर। भूलन की बिबी जब भी खेत में आती थी तो अपने उस बेटी की ठाठ जरूर सुनाती थी। भूलन का बड़ा लड़का जो यही कोई 11-12 साल का रहा होगा किसी के यहां नौकरी में है और गाँव कम ही आता है। कुल मिलाकर बिमार भूलन उसकी कर्मठ बीबी और दो बच्चे जो अभी 5-7 साल के होंगे, साथ रहते है।

बाकियों की तरह भूलन को भी इंदिरा आवास मिल चूका है पर महंगाई के जमाने मे सिर्फ  सरकारी पैसे से तो घर बनने से रहा, ऊपर से जितना सरकार देती है उसका चौथाई भर तो लोगों के चाय पानी में ही बह जाता है। एक कमरे का वह घर जिसके दीवार, ईंट के और छत फूस का है और भले यह घर पूरा न हुआ है पर ‘हर घर शौचालय’ वाले कार्यक्रम के तहत घर के सामने ही मुखिया ने एक सौंचालय का ओपन शीट जरूर बैठा दिया है जो फिलहाल पूरे बस्ती के गटर के लिए सोख्ता बना हुआ है।

खैर इस बार जब चुनाव हुए थे तो भूलन भाषन सुनने खूब जाता था और जहाँ मौका मिलता, अपनी गरीबी जरूर रोता था और अपनी बदहाली के लिए कभी अपने भाइयों को तो कभी गाँव के सम्पन्न लोगों को कोसता था। उसने भले दसियों चुनाव देख लिए थे पर न जाने क्यों राजनेताओं से उसको अभी भी उम्मीदें है। उसे लालू की हर बात सुहाती है और उसको भी लगता है की उसका हक़ बाबुओं ने मार लिया, चुनाव के दौरान उसकी बीबी को भी लगा था की चुनाव बाद दिन बदलेंगे और उसे बाबुओं के खेत में काम न करना परेगा पर भारतीय राजनेताओं ने आज तक कुछ बदल है जी अब कुछ बदलता।

कल जब खेत में पानी पटवन के टाइम भूलन की बीबी आई तो मैंने पूछ लिया कि उसके चुुनेे सरकार सेे उसे कुछ मिला की नहीं तो कहने लगी कि सरकार की योजनाएं गरीबों तक पहुँचती ही कब है? सरकार तो उसी को देबे है जिसका घर पहले से भरा हो, भले वो जात वाले हमारे हो पर खुशामदी तो बाबू लोग की ही करते है। मेरे मन में था की पूछ लूँ की इंदिरा आवास से घर तो मिला न, 3 रूपये चावल तो मिलता है न, सस्ता किराशन भी और भी कई तरह केे छूूत हो क्या चाहती हो कि बच्चे तुम पैदा करो और पोस सरकार दे? पर अब चुकी वो थोडा निराश थी हम बोले की अरे नहीं अब तो नितीश के संगे लालू आ गए है अब तो पकिया पिछड़ों के दिन बदलेंगे पर हाँ मांझी की बात मानो ये जो दलितों की संख्या 16% है, इसको कम से कम 21% करो कहने का मतलब तुम सब दलित लोग (संविधान केे अनुसार) दो दो बच्चे और पैदा करो और अपने राजनेताओं का वोट बैंक बढाओ। क्या हो जाएगा अगर दो बेटियां और कम उम्र में ब्याहनी परे या दो बेटे और बाल मजदूरी पे लगाने परे? वो तंज समझ गयी बोली नेताओं का क्या है, वो तो 10-12 बच्चे भी पोस लेते है, नेता की अनपढ़ बीबी-बेटा भी मंत्री बनते पर हम गरीबों का क्या हम तो बस वोट गिराने के दिन ही पूछे, पूजे जाते है। हमलोग तो जिनगी भर मजदूर ही रह जायेंगे और एक छत भी न होगा..

अब वो चिंतित थी और थोडा अपन भी होने लगे चुकि छत तो अब अपनी भी कमजोर हो रही थी, पुराने घर की दीवारों में दरार भी आ गयी है… खैर अभी पानी पटाते है बहुत से मूंसे खेत में कोहराम मचाये हुए है पहले उनसे तो निपट ले…..

बुझे की नहीं? अगर बुझ गए तो आप भी अपनी बात लिख दीजिये….
आपका सन्नी कुमार

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