शुक्रिया सतरह तेरा

शुक्रिया सतरह तेरा,
हर रंग के लिए,
फरवरी का प्यार,
मई की मार के लिए,
सीखाया तुमने खुद को बेचना,
जून की रोटी के लिए,
धो चुका जो कड़वी यादें,
उन आंसुओं के लिए,
शुक्रिया सतरह तेरा,
हर रंग के लिए….

है खिले कई फूल जिसमें,
उस बाग के लिए,
हो गए जो अजनबी अपने,
उन सब सपनों के लिए,
दे रहे जो साथ मेरा,
उन यारों के लिए,
शुक्रिया सतरह तेरा,
हर रंग के लिए…

थी तलब जिस भाव की,
उस एहसास के लिए,
पहुंचाया जिसने तन-मन को ठंडक,
उन सब सांसो के लिए,
शुक्रिया सतरह तेरा,
हर प्यार के लिए…

हो चुका मैं पार जिनसे,
उन सब बाधाओं के लिए,
गया सराहा जब भी मैं,
हर उस लम्हें के लिए,
हूँ खिला जिस प्यार से,
उस परिवार के लिए,
शुक्रिया सतरह तेरा,
हर उपहार के लिए….
-सन्नी कुमार

You may read my other poems by searching “poems by sunny Kumar” in google

Advertisements

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम

Image result for a boy waiting for his love

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला उस खुशबू को,
हो कम जिससे इस दिल के जख़म,
और सांस मिले इन सांसो को,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला मेरी चाहत को…

होगी सहमी-सिहरती मेरी परी,
उसे प्यार के चादर में लिपटा,
हो रही आस में आँखें पत्थर,
उसको मेरे जज़्बात बता,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

मेरे शब्दों का कुण्डल बनाके,
ऐ सर्द हवा उसको पहना,
है जमा रही मुझे दूर की सर्दी,
मेरे महबूब को मेरी रज़ा बता,
ऐ सर्द हवा कर इतना रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
दूर ले जा धूंध की दूरी को,
खिले जीवन में फिर इश्क़ के धूप,
तू संग ले आ मेरी रौशनी को,
तापे तुम संग फिर अलाव मिलकर,
ये हसरत उस तक पहुंचा…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
मेरे ख्याल बता मेरी प्रियतम को,
लौटे जल्दी ही मिलन के लम्हे,
और ख्वाब खिले फिर जीवन में,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को….
-सन्नी कुमार

Read my other poems on my blog. https://sunnymca.wordpress.com

Thank you for inspirations…

जंगल ही है

20161221_130916

जंगल ही है,
भावों का शहर नहीं,
कंक्रीट के ढेर है,
कहीं छाया नहीं,
वहाँ कटते है सीधे पेड़  पहले,
यहाँ सीधे लोग सही,
जंगल ही है……..
-सन्नी कुमार

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: