बाल दिवस पर कविता

बाल दिवस

तुम ख़ुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आये,
तुम उम्मीदें इस आँगन की,
जिसे बढ़ता देखना सब चाहे।

तुम गीली मिट्टी के वो मानस हो,
जो चाहे खुद में बन जाओ,
हर ज्ञान तुम्हारे अंदर है,
जो मर्ज़ी बाहर ले आओ।

तुम खुशियों के वो बादल हो,
जो बरसे सावन ले आओ।

हर आशीष तुम्हें, हर साथ तुम्हें,
तुम अपनी जिंदगी जी भर जी जाओ,
पढ़े किताबें दुनिया तुम्हारी,
ऐसी एक सहज कहानी लिख जाओ।

सफ़ल-असफ़ल सब मिथ्या है,
हे अर्जुन! अपना कर्म बस कर जाओ,
है तुमसे यह धन्य धरा,
तुम इसे अपने रंगों से रंग जाओ।

तुम खुशियों के जो बादल हो,
आज बरसो सावन ले आओ।

आपका
सन्नी कुमार अद्विक

Wish you all a happy children day आप सब में जो बचपन समाया है उसे जश्न के हजारों अवसर मिले यही कामना।

NCR में बढ़ते प्रदूषण से

NCR में बढ़ते प्रदूषण को वजह जो भी किसानों को मानते है उनकी योग्यता को श्री श्री(रविशंकर नहीं) खारिज करते है। किसानों के पास पुआल जलाने के अलावा कोई उपाय नहीं है, इसे खाने वाले देशी गाय को तो मनुष्यों की भूख चर गई। आज AC का आम होना, अकेले कारों में घूमना, और पटाखे को भी आप सबसे बड़ी समस्या नहीं कह सकते, समस्या कुछ और है

समस्या है NCR का ओवरलोड होना, आस पास के राज्यों का फेल होना, सरकार को अगर राजधानी से प्यार है तो यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में यहाँ की कम्पनियों को शिफ्ट कराये, और इसका टेस्टिंग सरकारी विभागों, सरकारी कर्मचारियों और मीडिया हाउस से करे। सही लगे तो शेयर करे।

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