तुमसे ही आखिरी उम्मीद

Sunny Kumarअब शब्दों पर यक़ीन नहीं होता,
और वक़्त पर ऐतबार,
पर आँखों में सपने, अब भी जागे है,
और तुमसे ही आखिरी उम्मीद।

माना दूर गया था,
तुमको छोड़,
रुसवाइयों में मैं मुँह मोड़,
पर सच है, तब मै भी रोया था,
क्यूंकि तब ख्वाब, मेरा भी टूटा था।

अब वक़्त नहीं, न हालात है वो,
हूँ शर्मिंदा पर दोस्त(उम्मीद) हो तुम,

जो चाहे सजा दो तुम,
पर अब अपनी रज़ा दो तुम,
थक गया हूँ भाग-भाग कर,
तुम संग सिमटने की,
अब नियत दो तुम..

बस कहना है तुमसे और सुनना है तुमको,
कि क्या रिश्तों में है एक गलती की गुंजाईश?
कहो क्या तुम अब भी मेरी हो,
की क्या उन सपनों को सच करने की है कोई गुंजाईश?

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Ab Shabdon par yaqeen nahin hota,
Aur waqt par aitbaar..
par aankhon mein sapne, ab bhi jaage hai..
Aur tumse hi aakhiri ummid..

Maana door gayaa tha tumko chhod,
ruswayion mein mai munh mod,
par sach hai tab mai bhi roya tha,
kyunki tab khwab, mera bhi toota tha..

Ab waqt nahi na haalat hai wo,
hun sharminda par dost(ummid) ho tum..

Jo chaahe sajaa do tum,
par ab apni razaa do tum,
thak gayaa hun bhaag bhag kar,
Tum tak simatane ki,
Ab niyat do tum.

Bus kahna hai tumse Aur sunana hai tumko,
ki kya rishton mein hai, ek galati ki gunjaish?
Kaho jo tum ab bhi meri ho,
Ki kya un sapno ko sach karne ki hai koi gunjaish?

[This is written for my first love the most innocent one whom i still love and will love forever in my own way ;)]

बाद मेरे दुनिया को समझा लेना..

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ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना.
जो दलीलें दिल को दी,
वो याद, इनको इनको भी करा देना।।

ठीक नहीं इनका हर वक़्त आना,
ठीक नहीं आकर, पलकों को भिंगो जाना.
ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना।।

मेरे टूटने के और भी बहाने है,
तुम जिक्र अपना, बचा लेना.

मैं रूठा हूँ जग से,
तुम्हें पाने की हठ में,
जो ना मिली तुम,
बाद मेरे दुनिया को समझा लेना।।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Gar ho sake to,
apni yaadon ko samjha lena.
Jo dalilein dil ko di,
wo yaad inko bhi karaa dena..

Thik nahi inka har waqt aana,
thik nahi aakar, palakon ka bhingo jaana,
gar ho sake to,
apni yaadon ko samjha lena..

Mere tootane ke aur bhi bahaane hai,
tum jikra apna bachaa lena..

Mai rootha hun jag se,
tumhein paane ki hath mein,
jo naa mili tum,
baad mere duniya ko samjha lenaa.

कल शाम मिली थी वो…

janebaharकल शाम मिली थी वो
थी थोड़ी सकुचाई,
थोड़ी शर्माई,
पुछा जब हमने,
कारण उन्होंने अपनी व्यस्तता बताई।
वो दिखी जो परेशान,
उनसे कहा था हमने,
मत दो ध्यान, ए जानेबहार,
ये गुल कर लेगा, थोडा और इन्तेजार।।

वो हुयी थोड़ी सहज,
थोड़ी मुस्काई भी थी,
लाल भाव से चेहरा,
वो बेताब सी थी।
टोका उन्होंने, कहा,
बातें अच्छी करते हो आप,
कि सुनाओ कुछ ऐसा,
मै छू लूं आसमान।।

मुझे आता ही क्या है,
बस उनकी तारीफ़,
हम लगे तब पढने,
जो भी भाव थे उनके।
कहा हमने उनसे,
वो ग़ज़ल की पूरी किताब है,
अब पढूं मै कौन कलाम,
अब ये वो ही बताये।।

उन्होंने इशारों में कहा,
जो भी नाचीज फरमाए,
पूछा फिर हमने उनसे,
कि तुम्हारे नैनों में जो लिखा है,
कि जो ये होठ कहने को बेताब,
कि जो गूंजती है तेरे कानो में,
कि जो धड़कन तेरे गाये,
बोलो पढू कौन फज़ल,
की ये गुल कौन सा नगमा गाये।।

वो वापस सकुचाई,
थोड़ी शर्माई,
नजरें मिलाके,
थोडा मुस्कुरा के,
सिमटी मेरी बांहों में,
बोली आज तुम अपनी धड़कन सुनाओ,
हमारी धुन को मिलवाओ,
जो भी है प्यास उनको, आज पूरी कर जाओ।।

गिर गए तब हम प्यार में,
फिर संभलना कहाँ था,
खो गए उनकी आँखों में,
फिर मिलना कहाँ था।
क्या बात, क्या दुनिया,
कुछ भी याद न रहा,
हम लिपटे रहे कब तक,
कुछ ध्यान न रहा।।

उनके दिल की धड़कन को,
महसूस तब की थी,
है कितना प्यार हम में,
उस तड़प में देखी थी।
उनकी धड़कन तब बिलकुल,
मेरे धुन गा रही थी,
क्यूँ होता है हर पल में इन्तेजार,
उस शाम बयां हुयी थी।।

हाल हमारा एक सा ही,
जो दूर होते है,
ढेरों बातें होती है,
और जब साथ होतें है,
ये धड़कन, ये साँसे,
ये आँखें बोलती है,
और तब होठ हमारा,
बिलकुल सहमा होता है।।

है एक सच ये भी,
की जो धड़कन गाती है,
जो नजरें सुनाये,
साँसों में जो एहसास है,
वो ये लब कहाँ से लाये।
शायद उनको भी ये मालूम है,
जो सुनती मिलके, है धड़कन वो,
करके होठों को खामोश,
कहती है हर बात, नजरों से वो।।

उस शाम यही हुआ था,
बातें शुरू होते ख़तम थी,
और हम आँखों में उलझकर,
कहीं और खो गए थे।
बातों को छोड़कर हम,
धडकनों को सुन रहे थे,
साँसों से मिला सांस हम,
एहसास जता रहे थे।।

कुछ भी न था कहने को,
सुनना भी नहीं था कुछ,
हम नजरों में डूब कर तब,
एक दूजे में खो गए थे।
क्या थी बेकरारी,
क्यूँ थे मिलने को बेचैन,
आया समझ उस शाम,
हमें उस एहसास को जीना था।

-सन्नी कुमार

ये दिल मुझसे कहता है..

IMG_20170724_163431तुम हो इतनी  हसीन  कि चुरा लूँ तुम्हें, ये  दिल मुझसे कहता है..
कोई देखे न इस नूर को सो छुपा लूँ तुम्हें, ये दिल मुझसे कहता है..

ख्वाहिशें जो भी है तुम्हारे पुरे कर दूँ मै आज, ये  दिल मुझसे कहता है..
जो भी है ख्वाब तुम्हारे उनको जिंदगी बना दू आज,ये दिल मुझसे कहता है..

चाहे कितनी ही हों उलझनें, मन मुश्किलों में भले हो..
मै  लाऊं मुस्कराहट तेरे चेहरे पे, ये दिल मुझसे कहता है..

तुम हो सबसे हसीं, मीठी मिश्री सी हो तुम..
करू तुमसे दीवानगी का इकरार, ये दिल मुझसे कहता है।

इस रंगीन दुनिया से तेरा रंग चुरा लूँ, ये दिल मुझसे कहता है..
अपने ख्वाब को हकीकत बना दूँ, ये दिल मुझसे कहता है..

हसरतें और भी है पर जी लूँ दो पल तुम्हारे साथ,ये दिल मुझसे कहता है..
तुम हो इतनी  हसीन  कि चुरा लूँ तुम्हें, ये  दिल मुझसे कहता है।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

तुम सबसे अच्छे हो..

Me n Smile(Sonu)

दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे अच्छे हो..
इस झूठ की दुनिया में,
सबसे सच्चे हो..

रखा करो ख्याल तुम अपना,
सबके प्यारे हो..
दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे सीधे हो…

बेस्ट feature ये तुम्हारा,
की सरल, सहज तुम हो…
Drawbacks कुछ खास नहीं,
but थोड़े selfish हो…

स्टाइल है ठीक तुम्हारा,
Behaviour तो है तगड़ा..
गुस्से में तुम क्यूट हो लगते,
Smile का कहना ही क्या. :))

आँखों में maybe है जादू,
लाब्जो में तो sure मिठास..
इन्ही सब reasons के कारण,
दुनिया में तुम सबके खास..

भाती है हर चीज तुम्हारी,
चाहे वो हो बाते तेरा,
या हो तेरा गुस्सा.
तेरे खूबियों की चर्चा,
हर कोई है करता..

तेरे ही बाते करते थे,
मिलकर सबसे अक्सर.
बातें तो बातें होती है,
कभी अच्छी,
कभी बहुत ही अच्छी..

बातो से कुछ बाते आयी,
गुजरे पलों की याद दिलाई.
जब हम सडको पे walk किया करते the,
बेवजह की हम सब talk किया करते थे…

उन बातों में अक्सर हम,
एक दूजे को pin किया करते थे.
हमारे आने का शायद,
सड़के भी wait किया करती थी.

इन्ही समय में घरवाले भी,
interrupt किया करते थे.
गुड बॉय follow order करता था
और baddy करता था sustain…

छोटी शाम गुजर जाती थी,
मानो कुछ पल भर में.
और समय हो जाता था,
दुनिया की दी टेंशन सुलझाने का..

शाम की क्रिकेट जो याद हो तुमको,
फिर याद होगा तुम्हे, sure selection…
कुछ लोगो से न बनती थी मेरी,
पर तेरे सब थे वहां भी fan..

दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे अच्छे हो..
इस झूठ की दुनिया में,
सबसे सच्चे हो..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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