जरूरी है मुहब्बत का होना

किसी से बिछड़कर मुझे, मिलने का हुनर है आया,
खोकर ‘खुद’ को मैंने, मेरे खुद को है पहचाना..
वो एक थी कभी जिसके, अरमां दिल में बसते थे,
आज उसी के अक्श को मैंने, जर्रे-जर्रे में है बसाया..
नहीं खबर ये मुहब्बत है या कोई नई दीवानगी,
पर सच है लगता मुझे अब, निर्मोही मोह समझ आया..
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खैर किसी से बातों-बातों में, कुछ बातें निकली थी,
था चर्चा मुहब्बत का सो, दिल भावों से पिघला था,
उकेरे जो मन के भाव उसने, उसे शब्दों ने सहेजा था,
कि उसने पूछा जब मुहब्बत का परिचय,
मैंने कुछ ये सब कह डाला था….
“ये मुहब्बत ही तो है जो जीना सिखलाती है,
हर रात ख्वाबों में बहलाकर, उम्मीदों का सवेरा ले आती है…

मुहब्बत आँखों का हो या भावों का,
जज्बातों का या ख्यालातों का,
ये मुहब्बत चाहे जैसा हो, जिससे हो,
करने वाले को खूब बनाती है,
छूट जाए गर मीत तो ये शायर बनाती है,
और जो मिलन हुआ मुहब्बत में तब,
जिंदगी जन्नत बन जाती है,
बड़ा जरूरी है मुहब्बत का होना,
कि ये आदम को इंसान बनाती है।”
-सन्नी कुमार

कल शाम मिली थी वो…

Old Post..

Life iz Amazing

janebaharकल शाम मिली थी वो
थी थोड़ी सकुचाई,
थोड़ी शर्माई,
पुछा जब हमने,
कारण उन्होंने अपनी व्यस्तता बताई।
वो दिखी जो परेशान,
उनसे कहा था हमने,
मत दो ध्यान, ए जानेबहार,
ये गुल कर लेगा, थोडा और इन्तेजार।।

वो हुयी थोड़ी सहज,
थोड़ी मुस्काई भी थी,
लाल भाव से चेहरा,
वो बेताब सी थी।
टोका उन्होंने, कहा,
बातें अच्छी करते हो आप,
कि सुनाओ कुछ ऐसा,
मै छू लूं आसमान।।

मुझे आता ही क्या है,
बस उनकी तारीफ़,
हम लगे तब पढने,
जो भी भाव थे उनके।
कहा हमने उनसे,
वो ग़ज़ल की पूरी किताब है,
अब पढूं मै कौन कलाम,
अब ये वो ही बताये।।

उन्होंने इशारों में कहा,
जो भी नाचीज फरमाए,
पूछा फिर हमने उनसे,
कि तुम्हारे नैनों में जो लिखा है,
कि जो ये होठ कहने को बेताब,
कि जो गूंजती है तेरे कानो में,
कि जो धड़कन तेरे गाये,
बोलो पढू कौन फज़ल,
की ये…

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Trade Fair Moments.

It was too rushy and not enjoyed like last year but when read in newspapers that we made records yesterday by visiting trade fair, i thought to save and share those moments. First of would like to share that record which i am talking about, Yesterday i.e. 24th Nov 2013, Over 1.3 lakhs people took the Delhi Metro to reach Pragati Maidan to visit the ongoing India International Trade Fair, recorded a new high in footfall. Agreed that numbers were high but for us it was expected and so we are happy with all those waiting queues.

Just for Information, this year partner state was Bihar and focused state was orrisa and these poor states have not much to please visitors 😦

Bihar

Indian Army Display
Indian Army Display

आफ्टर डेथ पालिसी

​जब जिंदगी लाख रूपये में किराए पे लगती हो,
तब मौत को कर के करोड़ों का इसका भाव क्यों बढाया है?

कभी गजेंद्र तो कभी गरेवाल अब तो आत्महत्या के बाद भी करोड़ों अनुदान के नाम पर मिलता है पर क्या हम पूछ सकते है कि जिस देश में हजारों किसान हर रोज हार रहे है, बॉर्डर पर हर रोज शहादत होती है, सड़क दुर्घटना, ट्रेन दुर्घटना, जैसी कई और आकस्मिक मौंतें जिनमे नेताओं का अनुदान घोषणा का रिवाज है में कबतक और कितना रुपया खर्चा जायेगा? ये रूपये किस मद से आते है क्योंकि इन पैसो का कोई जिक्र आम बजट में तो होता नहीं। वैसे क्या ये आफ्टर डेथ पॉलिसी बदली नहीं जा सकती? क्या जिंदगी को लेकर भी कुछ नहीं सोंचा जाना चाहिए? सैनिक कम शहीद हो, हर नागरिक देश में खुश रहे, सुसाइड रेड, एक्सीडेंट रेट कम हो इस पर विचार नहीं होना चाहिए? अनुदान/सब्सिडी से आगे बढ़कर अब प्रोत्साहन और सम्मान की ओर कदम नहीं बढ़ाना चाहिए?

-सन्नी
रेस्ट इन पीस इंडियन पॉलिटिक्स फॉर योर आफ्टर डेथ पॉलिसीस

सच को छुपा देता हूँ..


सैकड़ों दफा लिखकर मैं मिटा देता हूँ,
सीने में है जो आग उसे मजबूरन बुझा देता हूँ,
डरता हूँ जल जाएगा कुछ मेरा भी,
बस इसी लोभ में सच को छुपा देता हूँ…

-सन्नी कुमार

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