क्या प्रेश्यायें गर्भवती है?

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भारतीय मीडिया खुजलीवाल को नायक के रूप में जाहिलों के बीच स्थापित कर चूका है, राष्ट्रवादियों के राह के इस रोड़े को हम हटाते की मीडिया फिर से गर्भवती हो गयी है, खुजली गैंग प्रसन्न है, मीडिया बधाई गा रही है, नीकु चचा गुजरात मॉडल को फ़ैल बता रहे…कुल मिला के देश को तोड़ने वाले सारे बकलोल-बेशर्म गुजरात की व्यवस्था को बिगाड़ रहे है.. 13 साल से शांत रहा गुजरात अचानक से आरक्षण रूपी भीख के लिए इस कदर रोने लगे, चौंकाने वाला है।
आम्बेडकर के बोये आरक्षण के फसल को काटने के चक्कर में मुफ्तखोर बेशर्म भीड़ एक दूसरे का गला काटने को तैयार हो गयी है, गुजराती भीड़ कम भाड़े के टट्टू ज्यादा क्रियाशील हुए जा रहे….
यह सब प्रधानमन्त्री के UAE के सफल दौरे के बाद और बिहार चुनाव से पहले हो रहा है, एक बार फिर से आंदोलन के जरिये सत्ता की सीढ़ी चढ़ने की तयारी है. खैर, उधर युगपुरुष जी अपने भाई के होने की ख़ुशी में इतने उदार हो गए है की लालू-नीकु से गलबगिया कर रहे है और बिहार मॉडल को दुरुस्त और गुजरात मॉडल को फ़ैल बता रहे है, दिल्ली में wifi, बिजली, पानी मुफ़्त करने, महिलाओं को सुरक्षित करने, हर हाथ रोजगार देने और 500 स्कूल खोल देने के बाद अब वो जल्द ही लालू को ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने की और बिहार को न्यूयॉर्क से बेहतर बनाने की कोशिश में लग गए है… हो सकता है अपने भाई के होने के ख़ुशी में वो सिब्बल, चिदंबरम, कलमाड़ी रजा को भी ईमानदारी का प्रमाण पत्र दे दे।

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आरक्षण एक भीख है

आरक्षण एक भीख है…क्यूंकि अगर यह उधार होता तो लेने वाले को लौटाना होता, यह पारिश्रमिक भी नहीं हो सकता क्योंकि इसके लाभार्थी इसके बदले कोई सेवा नही देते..और अब अगर ७ दशक बाद भी लोग आरक्षण के लिए सड़कें जाम करते है, ट्रेन की पटरियों पे डेरा जमाते है तो मन खीजता है… कभी जाट, कभी गुज्जर, कभी पटेल…ये गद्दी की ख्वाहिश रखने वाले लोग अजीब अजीब मुद्दों से सीढियाँ बना रहे..
मेरा व्यक्तिगत तौर पे यह मानना है की अगर ७ दशक में आरक्षण आपको नहीं सुधार पाई तो फिर आपका इलाज कुछ और है. और हाँ जिस तरह से भीख लोगों में बेकारी बढ़ाती है, एक अयोग्य भी मांग-मांग कर पूंजी बना लेता है, नशा का लत लगा लेते है, वैसे ही आरक्षण का लिफ्ट चढ़ के कई अयोग्य पूरा इंजिन बर्बाद करते है…
सरकार गरीब परिवार को अवसर दे, उनको प्रसिक्षण दें, और कम से कम कुछ तो ऐसा करे जहाँ हम सब एक हो कर कहें की हम भारतीय है. ये १५ अगस्त २६ जनवरी वाला देशभक्त हर रोज जीए ऐसा कुछ हो..क्यूँ नही कोई ऐसी व्यवस्था की जाए जहाँ हर वर्ग के नवयुवक एक साथ रहे, उनपर सरकार इन्वेस्ट करें और लाभ दोनों को हो. ऐसा माहौल दिया जाए जहाँ कोई जात, कोई धर्म का जीकर न हो, चर्चा हो तो नयी पहचान गढ़ने की, भारत को मजबूत बनाने की. ये बदबूदार जात-पात की राजनीति, ये आरक्षण का टुकड़ा,, इन कुव्यवस्थाओं से बेहतर है एक सैनिक स्कूल जहाँ सबको सामान शिक्षा दे और बदले में सरकार उनसे कम से कम २ साल की सेवा ले ताकि सरकार पर यह प्रशिक्षण बोझ न हो और युवा भी देश के प्रति झुकाव रखें. नये लडको को बेरोज्गादी का खतरा भी न होगा और असमर्थता, बेकारी,और मेधा-बलात्कार का बहाना भी न होगा….काश की सरकार एक ऐसा उपवन लगाए जहाँ नए पौधे, नव-युवकों को एक साथ रखे, राष्ट्रभक्ति सिखाएं, हिम्मत, हौसला बढाये, सबको काबिल बनाएं और इस भीख की लत छुड़वाए..

समृद्ध भारत का सपना आरक्षित कपोलो के सहारे सम्भव नही.. मेधा का हो सम्मान, यही हमारी मांग…
-सन्नी कुमार

#Against_Reservation

लौट के बुद्धू घर को आये??

लौट के बुद्धू घर को आये??
ऐसा ही कुछ लग रहा है अपने सन्दर्भ में। सिखने-सिखाने के सफर में आज अपने गाँव पहुँच गया हूँ, उत्साहित भी हूँ और डर भी रहा हूँ… उत्साह है की गाँव को फिर से अपने रंग में रँगने का मौका मिलेगा और डर इसलिए की यहाँ लोग बड़ी जल्दी आपको फ्रॉड कह देते है(पिछले सप्ताह ही एक फेसबुक मित्र ने फ्रॉड की उपाधि दी और कारन था इस कार्यक्रम में विलम्ब होना).
वैसे 2009 तक की बहुत सु अच्छी यादें भी है,  और शायद आप को पता भी हो की पहले गाँव में शुभ सुरभि कल्याण संस्थान नाम से एक ngo चलता था, गाँव से चन्डा लेकर गाँव के बच्चो को मंच देने का काम हम सभी करते थे, इसी मंच से युवा श्री का सम्मान भी मिला था और बाद में संयोजक कहाने का मान भी(भले उम्र कम थी)..
उन्ही दिनों हमलोगों ने rti के तहत कुछ सुचना मांगी जिसको मिलने में 1 साल लगा, सुचना देरी से मिली इसलिए कोई पैसा नहीं देना परा पर हाँ सचिव को जुरमाना और निष्काशन झेलना परा था…खैर 6 साल बाद फिर से गाँव में हूँ और कोशिश है की एक मंच फिर से हो जहां आज के और आने वाले समय में बच्चों और युवाओं को मौका मिले..
पिछले दफा जो कुनबा बिखडा था उसे फिर से जोड़ सकूँ ये प्रयास भी होगा। वैसे तब जो हमारे मार्गदर्शक थे उनमे आज भी वही उत्साह है पर नए लोग उनको नहीं मिले और सृजनात्मक कार्य बिलकुल ठप हुआ.. पिछले सप्ताह जब मिला उनसे वो खुश थे, उम्मीद है मेरे इस प्रयास को वो(मेरे गुरुजन), अग्रज व् मित्र सराहेंगे….

खुश हूँ बिहार के सबसे बेहतर गाँव, खरौना में आकर।

धन्यवाद
सन्नी कुमार
(http://Kharauna.com)

Nitish Kumar’s DNA

These days Nitish Kumar’s funded campaign is asking people to sign a petition on “change.org” so our honourable PM could took his words back. As you friends know that Mr. Modi in his speech in Muzaffarpur had said that there is something wrong with Nitish Kumar’s political DNA. He said that two years back Nitish kumar had organised bhoj(Grand Dinner) but that instead of serving facilities he insulted BJP politicians and it is not good, not a political culture and doubted on Nitish’ political DNA.
Now this BJP’s Bhoj issue has turned into Nitish Kumar’s DNA question and Mr. Kumar these days wasting his energy to fool Bihari and trying to frame this remark as an insult to Bihar…
Well Mr. Kumar must listen that speech again it was about his DNA and he should also know that we all have different DNAs so don’t drag our image in your issues, show some guts and fight on yours… You are a CM of poor state, people voted you to make changes and remember that the people had voted you and BJP’s ally to curb lalu’s Gundaraaj. You forget your words, compromises with your state and people of Bihar will show you the light.
And  yes people really talk about your DNA these days that why you are so helpless who first forced us an incapable CM like manjhi and then you and lalu became friends.
Please uplift the level of politics in Bihar, people is not interested to know why you have not served BJP and why this DNA remark became so important. Please dont put yourself before Biharis and do your work.
Jai Bihar

आजाद भारत

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आज आजाद भारत की बेपरवाही और गाँव में पसरे गुलाम ख्याल जो हर काम के लिए सरकार से उम्मीद लगाते है, हर बात के लिए दोष सरकार पे मढ़ते है, जो स्वाभिमान का गला घोंट भिक्षा रूपी सरकारी अनाजों, योजनाओं पर आँखे तरेरते है, सक्षम होते हुए भी बीपीएल में नाम जुड़वाने के लिए एड़ी रगड़ते है तो यह सोच के आश्चर्य होता है की इसी देश में जब साधन सन्साधन कम था, देश ब्रिटानियों का गुलाम था तो लोग भूखे रह लेते थे पर देश को आजाद कराने के लिए लड़ते थे, एक हथियार लैश सेना से तब हमारे वीर यूं ही भीड़ जाते थे, कुछ लोग मिलकर पुरे ब्रिटेन का चुल हिला देते थे और आज??
आज हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी देश को सम्बोधित करते हुए मेरिट को मौका देने की बात कह रहे, मतलब स्पष्ठ है अबतक सिफारिशों का दौर रहा है, उनकी बात जायज है, एकदम जायज बात है पर क्या आरक्षण का पोषण एक सिफारिश नहीं? आजादी के 68 सालों बाद भी अगर आरक्षण इस देश की जरूरत है तो फिर भूल जाए की यह देश कभी विश्व का नेतृत्व कर पाएगी।
चिंतन का विषय है की क्या आज का आज़ाद भारतीय क्या देश सेवा का वह जज्बा दिखा पायेगा? क्या यह देश लाचार, स्वाभिमानहीन सोंच से मुक्त हो पायेगा?? देश को सर्वस्व न्योछार करने वाले वीरों की फ़ौज खड़ी कर पायेगा? कभी यह देश जातीयता, धर्म के भेद भुला भारत और भारतीय बन पायेगा??

नमन उन वीरों को जिन्होंने अपना सर्वस्व लुटाकर इस देश को आजाद कराया, जिन्होंने निज स्वार्थ का बलि देकर इस भारत भूमि को गुलामियों से मुक्त कराया।

आजादी कागज पे नहीं हर सोच में हो,
देश को मजबूत करने का जज्बा हम सब में हों। शुभकामनाए

#StopGivingReservation

मुद्दों पर बोले राजनेता

हाल में प्रधानमन्त्री जी दो बार बिहार आये है और दोनों बार उनका नितीश कुमार की विफल सरकार पर जो शब्दों से प्रहार हुआ है और फिर उनके बयान के बाद जो नितीश लालू और फिर तमाम बिहारी राजनेताओं ने जो अपने मुंह खोले है वो इतना बताने के लिए काफी है की आने वाले चुनाव में ये नेता विकास, समानता,समरूपता, शिक्षा,सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते.
जिस तरह से नितीश कुमार अपने अपमान को बिहार के अपमान से जोड़ना चाह रहे वह बेमानी है क्यूंकि नितीश आज खुद एक जमानत पर छूटे लालू को शरणागत है जो कभी बिहारी छवि को धूमिल करने में अव्वल थे. प्रधानमंत्री जी का नितीश के डीएनए को लेकर किया कटाक्ष अशोभनीय था पर नितीश खुद यह तय करे की जिस जंगले राज के खिलाफ जनता ने उन्हें जिताया उसी जंगल राज की बीज बोना कहा से शोभनीय है?
भाजपा जो आज मोदी के सहारे बिहार में सत्ता में आना चाहती है को भी यह स्पस्ट करना चाहिए की जब तक वो नितीश के साथ थे निकू एक pm मटेरियल थे और अब निकू जब लालू के साथ है तो उनके डीएनए को गलत कह देना कहाँ तक उचित है?
क्यूँ नही बिहार के राजनेता विशेषकर नितीश कुमार, सुशिल मोदी और लालू प्रसाद यादव, बिहार के युवाओ को रोजगार दिलाने का भरोसा देकर चुनाव लड़ रहे है? बेहतर सुविधाओं के नाम पर, विकाश के नाम पर चुनाव लड़ने के बजाय क्यूँ डीएनए, भुजंग प्रसाद और चन्दन कुमार जैसे फालतू चीजों को मुद्दा बनाने की कोशिस कर रहे?
प्रधानमंत्री जिनको बिहार, विशेषकर युवाओं ने पूरा समर्थन दिया है से बहुत उम्मीदें है और हम बिहारी चाहते है की वो इन फिजूल के मुद्दों को हवा देने का मौका, विफल कुमार और चारा चोर प्रसाद को न दें…
और हाँ नितीश के डीएनए से बिहारी डीएनए का कोई मतलब नहीं….नितीश आज पथ खो चुके है और लालू के साथ रहकर बिहार में विकाश की बात करना बीएस छलावा है….इश्वर सद्बुद्धि दे बिहारी नेताओं को और समय रहते अकल आये सबको.

More Than 200 Beneficiaries Enrolled Under NDLM

NDLM Program in Muzaffarpur (6)A total of 200+ beneficiaries have so far been enrolled for training in Musahari, Muzaffarpur, under Level 1 of National Digital Literacy Mission (NDLM) with support from the government. Trainings and registrations are going on and every day on an average 30 students are registering for Level 1 Training.

NDLM Program is a mass digital literacy scheme is being implemented in all districts/blocks across all the states of the country and aims to impart digital literacy to 52.5 lakh persons, one eligible member from each household, as well as Anganwadi, ASHA workers and ration dealers, so as to enable them to effectively participate in the democratic process and enhance their livelihood.

Friends From Muzaffarpur can join us to Make our city a Digital City and India, Digital India.
Thanks
For Future Institute
Sunny Kumar
9212155696

Thank You Mr. Prime Minister

Thank You Mr. Prime Minister For Such a Creative Initiative. We are happy to be a part of Digital Literacy Mission and we thank you on behalf of all training faculties, resource providers and Beneficiaries. Thank You!

Friends, These days we are providing training in Musahari, Muzaffarpur and the pictures shared here are the part of NDLM Training. I will Keep updating news about our ongoing trainings and other initiatives.
Thanks
Sunny Kumar
9212155696

NDLM Awareness Program Targets Villages in Musahari Muzaffarpur

wpid-10645141_1601416763465564_7899172574864178292_n-copy.jpg.jpegAnother NDLM awareness and mobilisation programme was conducted by us and this time at Srijan Private ITI in Prahladpur village, Musahari block of Muzaffarpur district, Bihar on August 1, 2015.

The awareness programme was conducted by NDLM Training Partner RGCSM and Future Institute of Management Technology and Science, Patna. Local Representatives, Educationalists,Anganwadi Sevika and villagers were invited to attend the programme. Mr. Mukesh Kumar, Director of Srijan Private ITI welcomed everyone and motivated villagers to attend the training and become digital literate. The guests were told about the NDLM scheme started by the central government and its benefits to the society at large. Their assistance was sought for creating awareness regarding the scheme so as to speed up the enrolment of general beneficiaries in their areas. About 80 villagers registrations of beneficiaries from Musahari block were done following the programme

Lets work towards making India, a Digital India! 🙂

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