लक्ष्य राष्ट्रनिर्माण का होगा

image

बुद्ध का जो है अतित सहेजे,
उस धरा से भविष्य का भोर अब होगा..
ज्ञान-बोध की ऐतिहासिक मिट्टी में,
नवभारत अभ्यास करेगा..
सींचेंगे हम सब सपने मिलकर,
लक्ष्य राष्ट्रनिर्माण का होगा..
-सन्नी

Advertisements

उसके साथ की वो तस्वीर

उसके साथ की वो तस्वीर,
जिसे देख वर्षों मुस्कुराता रहा,
कभी उसको,
कभी ईश्वर को आभार जताता रहा,
कभी लिखकर, कभी जीकर,
खुद को मैं बहलाता रहा..

वही, उसके साथ की वो तस्वीर,
पिछले साल रुलाने लगी,
उसके हसीन किस्सों को,
यह जब फरेब बताने लगी,
थक कर छुपा दिया उसको,
जब हर पल दिल को दुखाने लगी..

उसके साथ की वो तस्वीर!

जो उसकी तरह ही दिल के करीब थी,
महीनों आँखों से ओझल रही,
बिछड़कर उससे दिल को,
उसके ख्याल भी खूब आये,
पर उसके साथ में रोने को,
हाथों में फिर वो तस्वीर नहीं आयी..

मुश्किल था यादों के भँवर से निकलना,
पर बेमन ही सही मैं निकल कर आया,
जब डुबोने मुझे, मेरे सामने,
उसकी साथ की वो तस्वीर नहीं आयी..
*****************
******************
कल जब हंस रहा था बीते दिनों पर,
वफ़ा-बेवफा के बेतुकेपन पर,
फिर याद, उसके साथ की वो तस्वीर आयी..

-सन्नी कुमार

(कमेंट करेंगे तो लिखेंगे, वरना काम और भी है 😉 )

गांधी और अम्बेडकर

गांधी और अम्बेडकर दोनों ने वंचितों के लिए आवाज उठायी, गांधी अफ्रीका में कालों के अधिकार के लिए लड़े, समानता मांगी पर अम्बेडकर ने आरक्षण रूपी भीख माँगा.. आज आरक्षण ने इस देश का कबारा कर दिया और अम्बेडकर सिर्फ आरक्षण लाभार्थियों के हीरो बनके रह गए पर गांधी विश्व के हर कोने में सराहे गए।
अम्बेडकर ने शूद्रों को दलित बनाया, चमारों को हीनता से ग्रसित करवाया और BATA को ब्रांड बनने दिया पर गांधी ने शूद्रों को हरिजन बुलाया, सबको सफाई के लिए विशेसकर खुद का मैला खुद साफ़ करने के लिए प्रेरित किया।
हो सकता है कि गांधी और अम्बेडकर दोनों आने वाले वक़्त में ख़ारिज कर दिए जाए और हमे मायावती और रागा किताबों में मिले पर इतना तय है की अम्बेडकर के आरक्षण ने भले कुछ वंचितों का कल्याण किया हो पर इसने देश को बहुत पीछे धकेला और इसके कारण देश आज भी टूटता है।
रोहित बेमुल्ला जैसे दलितों को शिकायत होती है की उनसे भेदभाव होता है पर ऐसे निर्लज्ज भूल जाते है की सवर्णों के साथ भेदभाव करके ही वहां तक पहुंचे है। जो लोव खुद जाति प्रमाण पत्र दे के शिक्षा पाते हो, नौकरी और प्रमोशन पाते हो उनको कोई हक़ नहीं की वो जातीय भेदभाव पे बोले। एक बात और अगर अम्बेडकर के आरक्षण से वाक़ई फायदा हुआ है तो फिर आज आरक्षण की जरूरत खत्म होनी चाहिए थी पर न अब तो जाट, गुज्जर, पटेलों को भी आरक्षण चाहिए, वो क्या है की मुफ़्त की मलाई सब खोजते है।
जय भीम का नारा लगा सकते है पर जय चमार, जय दुसाध कहने में शरमाते है और फिर दोष ब्राह्मणों पे… हीनता का इलाज अम्बेडकर के पास नही बल्कि गांधी के पास ही मिलेगा ये कब समझेंगे हम?

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: