कोई करिश्मा तुझमें है

ऐसा क्यूं है कि जो खोया था कभी उसका अक्स तुझमें है,
ये मुहब्बत की आदत मेरी है या कोई करिश्मा तुझमें है…
-सन्नी कुमार
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क्या इंसान भी फलों सा होता है?
जो बाहर से ज्यादा मीठा वो अंदर से सड़ा होता है??
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तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
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क्यूं संवरती हो उस आईना को देखकर,
संवरा करो तुम इन आँखों में झांककर,
आइना जिससे मिले उसी का हो जाता है,
और ये आँखें है जो सिर्फ तुमको बसाता है..

तुमने ही मुझे संभाला है..

                                   With Love

दुनिया की खास खबर नहीं,
मैं आज अपनी बात ही करता हूँ,
नारी का क्या मोल जीवन में,
मैं उसी पर बात आज करता हूँ…

जब जीवन यह गर्भ में था,
एक नारी ने ही पाला था,
भूल के खुद के कष्टों को जिसने,
मुझे नौ महीने तक संभाला था..
जब जन्म हुआ थी वो सबसे हर्षित,
उसने ही परिचय दुनिया से करवाया था,
नजर लगे न धूप लगे,
सो ममता के आंचल में छिपाया था,
छलके थे उसके खुशी के आंसू,
जब मां कहकर उसे पुकारा था,
थी मेरा सर्वस्व वह नारी,
जिसने इस जन्नत में मुझे उतारा था..

बांटती है जो बचपन के किस्से,
मुझे आज भी नादान बूझती है,
बड़ी भोली है माँ मेरी,
वो आज भी ” खाना खाया” पूछती है….

शैशव में मुझे माँ ने संभाला,
बचपन की सखा बहनें भी थी,
खूब लड़े जिन रिश्तों से हम,
वो डोर बड़ी ही पक्की थी,
बहन के रुप में वह नारी,
मेरे चौखट की रौनक थी..
अब भी घर आने से जिसके,
बहार घर में आ जाता है,
है मेरी वो प्यारी बहनें,
जिनसे आंगन उपवन बन जाता है….
और फिर
जीवन बचपन की गलियों से निकल चुका था,
जवानी में अब सड़कें चौड़ी थी,
साइकिल तो कबका छूट गया,
अब मेट्रो में सफर जो करनी थी।
चकाचौंध थी सतरंगी दुनिया,
तब ख्वाबों से खुद को भरमाया था,
तब मिली थी एक हसीं दीवानी,
जिस नारी ने इकरार-ए-मुहब्बत कर डाला था,
थे बड़े हसीन वो लम्हे,
जब उसने काबिल-ए-प्यार बताया था,
था तब जीता ख्वाबों को दिल से,
उसने भावों का भूचाल मचाया था,
बदल गए तब कुछ लम्हे शब्दों में,
उसने इस मूरख को शायर बनाया था,
क्या होता है मुहब्बत को जीना,
यह एहसास एक नारी ने ही कराया था…
और फिर छूटे सपने, हकीकत जब रूठा,
फिर कुछ सखाओं ने भी समझाया था,
रिश्तों को निभाते है कैसे,
यह नारियों ने ही भान कराया था,
सहेजे है जो आज पन्नों में यादें,
यह भी एक नारी ने ही सिखाया था,
भावों के समंदर में तैरना कैसे,
यह गुड़ भी उसने ही सिखलाया था…

और फिर जब ख्वाबों से निकलकर बाहर आया,
खुद को किसी के सपने में पाया,
थी हसीन यह हकीकत ख्वाबों से ज्यादा,
मुझे जिसने अपना सर्वस्व बनाया,
था अधूरा जो जीवन में अबतक,
उसने उन खुशीयों को संभव कर डाला…

अपने ठौर को बदल के जिसने,
मेरे आंगन को है चमकाया,
कदम मिलाकर जो साथ है चलती,
वह जीवनसाथी नारी है,
दफ्तर, मकान, इलाज जो करती,
वह सब भी एक नारी ही है…

संस्कार को जिसने संभाला,
वह ब्रह्माणी-रूद्राणी नारी है,
नित नए जो किर्तीमान रचती,
उन सब में भी नारी है..

रक्तरंजित इतिहास के पन्ने,
वहां वीरांगना लक्ष्मी, पद्मिनी रानी है,
भविष्य की खोज में निकलती कल्पना,
या खेलों में साक्षी, सिंधु या सायना,
देश को रौशन करती बेटियां,
कदम-कदम पर नारी है..

अस्तित्व नहीं मेरा नारी बिन,
तुमने जीवन को महकाया है,
धन्य सभी इस जग की नारी,
दुनिया जो आपने सजाया है,
करबद्ध खड़ा हूँ जो ऋण में हूँ,
आपके उपकारों ने मुझे बनाया है,
नारी तुमने जन्म दिया,
और तुमने ही मुझे संभाला है..
-सन्नी कुमार
http://www.sunnymca.wordpress.com

Robotronics Show by Goenkans

On the launching event of NIIT Nguru centre in G D Goenka Public School Gaya, School’s Robotronics team have presented a show where students of Grade III-VII have shown their models and explained about its functions. Here I am sharing few of pictures from yesterday’s event and you might be glad to know that these kids were guided by me, in fact we all are learning together and finding it fun. Must say Robotics improves child’s mechanical as well as logical skills and children find it fun and enjoys every robotics session with lot of enthusiasm. 🙂

Digital Device Awareness Program

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Digital Device awareness and mobilisation programme was conducted by us and this time at Panchayat Bhawan, Kharauna, Kudhani block of Muzaffarpur district, Bihar.

The awareness programme was conducted by NDLM Training Partner RGCSM and Future Institute of Management Technology and Science, Patna. Local Representatives, Educationalists, Anganwadi Sevika and villagers were invited to attend the programme. Mr. Satyanand Chaudhary, Ex. Principal of R.S.H.S Kharauna, welcomed everyone and motivated villagers to attend the training and become digital literate. The guests were told about the NDLM scheme started by the central government and its benefits to the society at large. Their assistance was sought for creating awareness regarding the scheme so as to speed up the enrolment of general beneficiaries in their areas. About 30 villagers registrations of beneficiaries from Kharauna were done following the programme.

Lets work towards making India, a Digital India! 🙂

Thanks
Sunny Kumar
9212155696

जीने के अरमान अब बदले..

sunny kumarसमय बदला, तेवर बदले,
भूल गए वो हम सब बदले..
बातें बदली अर्थ भी बदला,
मिलने का अब ढंग भी बदला..

अवसर बदला, उम्मीदें बदली,
लगन, लगाव भी अब बदला,
साथ बदला साथी भी बदले,
और इनका मिजाज भी बदला..

तरीके बदले तर्क भी बदला,
जज्बा और जज्बात जो बदला..
परिचय बदला पहचान भी बदले,
जीने के अरमान अब बदले..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]
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Samay badla, Tewar badle,
Bhul gaye wo hum sab badle..
Baatein badli, arth bhi badla,
Milne ka ab dhang bhi badla..

Awsar badla, ummidein badli,
lagan, lagaaw bhi ab badla..
sath badla, saathi bhi badle,
aur inka mijaaj bhi badlaa..

Tareeke badle, tarq bhi badla,
Jajba aur jajbat jo badlaa..
Parichay badla, pehchaan bhi badle,
Jeene ke armaan ab badle..

-Sunny Kumar
[Request- Please do comment and let me know if you liked/disliked. Thank you!]

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