जी. डी. गोएनका गया के बच्चो ने लहराया परचम

24059096_1920186667996017_7721139294086004020_nरसलपुर : गया-पटना मुख्य पथ पर अवस्थित जी०. डी० गोएंका पब्लिक स्कूल के बच्चो ने एक बार फिर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए अपने विद्यालय और शहर का सम्मान बढ़ाया । NIIT द्वारा आयोजित इस सत्र के सबसे बड़े आई टी इवेंट “आई टी फेस्ट-2017” जिसमे राज्य के विभिन्न विद्यालयों से चयनित छात्रों के बीच आई टी क्विज प्रतियोगिता प्रतियोगिता कराई गई थी , प्रतियोगिता ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल में हुआ जहाँ राज्य के विभिन्न शहरों से चयनित दस सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के बीच दो चरण में प्रतियोगिता कराया गया , जिसमे विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक सन्नी कुमार के नेतृत्व में आंठवी की छात्रा गीतांजली कुमारी, सातवी के छात्र आदित्य मेहता एवम रोनिल सिंह ने भाग लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए प्रतियोगिता में रनर अप ट्रॉफी सुरक्षित किया । बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती निधि जोशी ने सफल छात्रों को बधाई देते हुए सभी छात्रों को और लगन के साथ अध्ययन में और रूचि लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि छात्रों का परिश्रम ही उनके समाज और देश को भविष्य में उज्जवल बनाएगा ।छात्र ये ना समझे कि वो सिर्फ खुद के लिए पढ़ते है ,उनकी सफलता से उनका परिवार , विद्यालय और शहर भी गौरान्वित होता है अतः विद्यार्थियों को अपने पढाई को लेकर गंभीर होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हज़ारो सफलता उन्हें मिले। इस कार्यक्रम का सञ्चालन NIIT पदाधिकारी अमित कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ जहाँ आरा समेत राज्य के कई गणमान्य उपस्थित थे ।

 

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सच को छिपा देता हूँ

IMG-20170822-WA0003लिख के जो लिखना है वो तो मिटा देता हूँ,
फिर लिखता ही क्यूं हूँ जब सच को छिपा देता हूँ ..
ये डर है कि सच की कड़वाहट से सब खफा हो जाएंगे,
इसलिए कर जिक्र झूठ का मैं सबको हंसा देता हूँ..
-सन्नी कुमार

Likh k Jo likhna h wo to mitaa deta hun, phir likhta hi kyun Hu jab sach ko chhupa deta hun 😟
Ye dar hai Ki sanch Ki kadwahat se sab khafaa Ho jayenge,
Isiliye kar jikra jhuth ka Mai sabko hansa deta hun..
-sunny kumar

 

कोई करिश्मा तुझमें है

ऐसा क्यूं है कि जो खोया था कभी उसका अक्स तुझमें है,
ये मुहब्बत की आदत मेरी है या कोई करिश्मा तुझमें है…
-सन्नी कुमार
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क्या इंसान भी फलों सा होता है?
जो बाहर से ज्यादा मीठा वो अंदर से सड़ा होता है??
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तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
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क्यूं संवरती हो उस आईना को देखकर,
संवरा करो तुम इन आँखों में झांककर,
आइना जिससे मिले उसी का हो जाता है,
और ये आँखें है जो सिर्फ तुमको बसाता है..

तुमने ही मुझे संभाला है..

                                   With Love

दुनिया की खास खबर नहीं,
मैं आज अपनी बात ही करता हूँ,
नारी का क्या मोल जीवन में,
मैं उसी पर बात आज करता हूँ…

जब जीवन यह गर्भ में था,
एक नारी ने ही पाला था,
भूल के खुद के कष्टों को जिसने,
मुझे नौ महीने तक संभाला था..
जब जन्म हुआ थी वो सबसे हर्षित,
उसने ही परिचय दुनिया से करवाया था,
नजर लगे न धूप लगे,
सो ममता के आंचल में छिपाया था,
छलके थे उसके खुशी के आंसू,
जब मां कहकर उसे पुकारा था,
थी मेरा सर्वस्व वह नारी,
जिसने इस जन्नत में मुझे उतारा था..

बांटती है जो बचपन के किस्से,
मुझे आज भी नादान बूझती है,
बड़ी भोली है माँ मेरी,
वो आज भी ” खाना खाया” पूछती है….

शैशव में मुझे माँ ने संभाला,
बचपन की सखा बहनें भी थी,
खूब लड़े जिन रिश्तों से हम,
वो डोर बड़ी ही पक्की थी,
बहन के रुप में वह नारी,
मेरे चौखट की रौनक थी..
अब भी घर आने से जिसके,
बहार घर में आ जाता है,
है मेरी वो प्यारी बहनें,
जिनसे आंगन उपवन बन जाता है….
और फिर
जीवन बचपन की गलियों से निकल चुका था,
जवानी में अब सड़कें चौड़ी थी,
साइकिल तो कबका छूट गया,
अब मेट्रो में सफर जो करनी थी।
चकाचौंध थी सतरंगी दुनिया,
तब ख्वाबों से खुद को भरमाया था,
तब मिली थी एक हसीं दीवानी,
जिस नारी ने इकरार-ए-मुहब्बत कर डाला था,
थे बड़े हसीन वो लम्हे,
जब उसने काबिल-ए-प्यार बताया था,
था तब जीता ख्वाबों को दिल से,
उसने भावों का भूचाल मचाया था,
बदल गए तब कुछ लम्हे शब्दों में,
उसने इस मूरख को शायर बनाया था,
क्या होता है मुहब्बत को जीना,
यह एहसास एक नारी ने ही कराया था…
और फिर छूटे सपने, हकीकत जब रूठा,
फिर कुछ सखाओं ने भी समझाया था,
रिश्तों को निभाते है कैसे,
यह नारियों ने ही भान कराया था,
सहेजे है जो आज पन्नों में यादें,
यह भी एक नारी ने ही सिखाया था,
भावों के समंदर में तैरना कैसे,
यह गुड़ भी उसने ही सिखलाया था…

और फिर जब ख्वाबों से निकलकर बाहर आया,
खुद को किसी के सपने में पाया,
थी हसीन यह हकीकत ख्वाबों से ज्यादा,
मुझे जिसने अपना सर्वस्व बनाया,
था अधूरा जो जीवन में अबतक,
उसने उन खुशीयों को संभव कर डाला…

अपने ठौर को बदल के जिसने,
मेरे आंगन को है चमकाया,
कदम मिलाकर जो साथ है चलती,
वह जीवनसाथी नारी है,
दफ्तर, मकान, इलाज जो करती,
वह सब भी एक नारी ही है…

संस्कार को जिसने संभाला,
वह ब्रह्माणी-रूद्राणी नारी है,
नित नए जो किर्तीमान रचती,
उन सब में भी नारी है..

रक्तरंजित इतिहास के पन्ने,
वहां वीरांगना लक्ष्मी, पद्मिनी रानी है,
भविष्य की खोज में निकलती कल्पना,
या खेलों में साक्षी, सिंधु या सायना,
देश को रौशन करती बेटियां,
कदम-कदम पर नारी है..

अस्तित्व नहीं मेरा नारी बिन,
तुमने जीवन को महकाया है,
धन्य सभी इस जग की नारी,
दुनिया जो आपने सजाया है,
करबद्ध खड़ा हूँ जो ऋण में हूँ,
आपके उपकारों ने मुझे बनाया है,
नारी तुमने जन्म दिया,
और तुमने ही मुझे संभाला है..
-सन्नी कुमार
http://www.sunnymca.wordpress.com

Robotronics Show by Goenkans

On the launching event of NIIT Nguru centre in G D Goenka Public School Gaya, School’s Robotronics team have presented a show where students of Grade III-VII have shown their models and explained about its functions. Here I am sharing few of pictures from yesterday’s event and you might be glad to know that these kids were guided by me, in fact we all are learning together and finding it fun. Must say Robotics improves child’s mechanical as well as logical skills and children find it fun and enjoys every robotics session with lot of enthusiasm. 🙂

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