बाद मेरे दुनिया को समझा लेना..

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ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना.
जो दलीलें दिल को दी,
वो याद, इनको इनको भी करा देना।।

ठीक नहीं इनका हर वक़्त आना,
ठीक नहीं आकर, पलकों को भिंगो जाना.
ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना।।

मेरे टूटने के और भी बहाने है,
तुम जिक्र अपना, बचा लेना.

मैं रूठा हूँ जग से,
तुम्हें पाने की हठ में,
जो ना मिली तुम,
बाद मेरे दुनिया को समझा लेना।।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Gar ho sake to,
apni yaadon ko samjha lena.
Jo dalilein dil ko di,
wo yaad inko bhi karaa dena..

Thik nahi inka har waqt aana,
thik nahi aakar, palakon ka bhingo jaana,
gar ho sake to,
apni yaadon ko samjha lena..

Mere tootane ke aur bhi bahaane hai,
tum jikra apna bachaa lena..

Mai rootha hun jag se,
tumhein paane ki hath mein,
jo naa mili tum,
baad mere duniya ko samjha lenaa.

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सिवा उनके कुछ और चाहा नहीं..

उनके ख्वाबों में हम,
कभी थे ही नहीं.
पर ये दिल था “गुरु”
कभी माना नहीं..

उनकी नज़रों में हम,
नजर आये नहीं.
और एक ये दिल सनम
सिवा उनके कुछ और चाहा नहीं..

-सन्नी कुमार
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Unke khwabon mein hum,
kabhi the hi nahi.
par ye dil tha “guru”,
kabhi maana nahi.. 
 

unke najaron mein hum,
najar aaye nahi, 
aur ek ye dil sanam,
siwa unke kuchh aur chaahe nahi…

ख़्वाबों की जरूरत और नहीं..

Missing Herआँखों पे सितम अब और नहीं,
इस दिल पे जुलम अब और नहीं,
जो देखे थे ख्वाब, वो टूट गए,
अब ख़्वाबों की जरूरत और नहीं।।

मौसम था वो मेरा प्यार नहीं,
जो बदला है मेरा यार नहीं,
है बोल मेरे होठों पे उसके,
पर दिल से दिल का मेल नहीं।।

जहाँ हम तन्हां हुए है..

Sunny Kumar
Sunny Kumar

छोटा सा दिल, छोटे-छोटे सारे ख्वाब,
थोड़ी मुहब्बत के साथ, जीने के अरमान..

कोशिश भी की मैंने की करूं जहाँ से प्यार,
जाने क्या बिगड़ा, क्या रूठा, क्या टुटा,
जी न पाया वो पल, था जिसका इन्तेजार..

कई बार कोशिश की मैंने, उन पलों को भुलाऊ..
जिसने रुलाये, जिसने सताए,
जाने क्यों न हँस पाया जब सबने हँसाए..

प्यार की बाते मै तब भी करता था कम,
क्युकी ये चीज बड़ी थी और मेरी हस्ती थी कम.
ये गहराती समुन्द्र, मेरी कस्ती नयी थी,
सपने आँखों में बहुत, पर तब नींद नहीं थी,
वो हकीकत में मिली थी,
फिर ख्वाब की क्या परी थी..

जीन्दगी तब हसीं कहाँ कल की फ़िक़र थी..
खुश था खुद में, नहीं दुनिया की परी थी…
पर वो बात तब की, अब हालात नयी है,
है अब भी साथ वो लम्हे पर सब बिखड़े परे है,
है लगती आज भी महफिलें वहाँ,
जहाँ हम तन्हां हुए है…

-सन्नी कुमार

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Chhota sa dil, chhote chhote saare khwab,
thodi muhabbat ke sath jeene ke arman..

koshish bhi ki maine ki karun jahan se pyar,
jaane kya bigda, kya rutha, kya toota,
jee na paaya wo pal, tha jiske intezaar..

Kai baar koshish ki maine, un palon ko bhulaaun,
Jisne rulaaye, Jishne sataaye,
Jaane kyun na hans paaya jab sabne hansaaye..

Pyar ki baatein tab bhi karta tha kam,
kyun ki ye cheej badi thi aur meri hasti thi kam,
ye gahraati samundar, meri kasti nayee thi,
sapne aankhon mein bahut par tab nind nahi thi,
wo haqeeqat mein mili thi,
phir khwab ki kya pari thi..

Jindagi tab hansi, kahan kal ki fiqar thi,
khush tha khud mein nahi duniya ki pari thi,
par wo baat tab ki hai ab haalat naye hai,
hai ab bhi saath wo lamhein, par sab bikhade pare hai,
Hai lagti aaj bhi maphilein wahan,
jahan hum tanhaan huye hai..

-Sunny Kumar

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