एक बेहतर अंत की शुरुआत..

Photo Credit: Google[A Tale of Unfortunate Heart Who Fail to keep his feelings in a right way.]

जो मिला मुझे वह नियती थी,
नहीं उसमें किसी की गलती थी,
दिल था ‘बेचारा’ बेचैन हुआ
आखिर हसरत इसकी अधूरी थी.
चीखा, चिल्लाया, दफ़न हुआ,
बस इसकी, इतनी ही अवधि थी..

आँखों के आंसू तब सूखे थे,
शायर के बोल भी टूटे थे.
दिल की बेचैनी आँखों में,
जब सामने हालातों के सौदागर थे..

वो इश्क नही, था ख्वाब मेरा,
जिसको नादान ने तोड़े थे,
होती बेदर्दी हुस्न के पीछे,
उस रोज रहस्य जाने थे..

छुप-छुप कर मिलने वाले सपने,
उस रोज में चुप्पी साधे थे,
दिल की तड़प में मरने वाले,
सारे जज्बात नदारथ थे.

दिल फिर भी हालातों संग,
अब रोज नयी कोशिश में था,
कभी उसके चाहत में रोये,
कभी उसकी बिछुड़न में..

वादे जिसने थे सारे तोड़े,
बेशर्म उसी को, अब भी थामे था.
जो बची थी उम्मीद, जल्द ही दफ़न हुयी,
आया संदेशा, वो किसी और की हुयी..

था बाजार सजाकर व्यापार हुआ,
दिल के ख्वाबों का मोल-भाव हुआ,
जो खुमार खुद्दारी का भरता था,
वही दिल उस रोज नीलाम हुआ..

न हसरत थी उसकी हथियाने की,
न जबरदस्ती कभी बतियाने की’.
फिर क्यूँ सौदा उसके पीछे हुआ,
अब दिल को ‘बिल'(दिलबर) से खेद हुआ.

दिल लगा पूछने बिल से उसके हालात,
कर गया क्या वो गलत सवालात,
पूछ लिया मोल जोल की शर्तो को,
अपने नीलामी के वचनों को..

हुयी गुस्सा बिल, धिक्कारी भी,
समझाया, हालातो का हल्ला भी.
पर दिल को कुछ आया समझ नहीं,
अब वो पूछे सबसे,
क्या भावों का कोई मोल नहीं..?

अपनों से दूर जो सपना लाया ,
उसकी हसरत ने नफरत भिजवाया.
ख्याल रहा नही तब ख्वाबों का,
न मर्यादाओं, न ही नातों का..

लूट चूका था दिल और दिलबर,
सौदा हुआ था सपनो का.
संबंधो का फाँस लगाकर,
झूल गया था दिल का दिलबर९(बिल)..

नाराजगी दिल को बिल से थी,
और उतनी ही बिल को दिल से भी,
बिल कोसे अपने हालत को,
और दिल बिल के जात को..

दिल जिद्दी और जज्बाती था,
खुद रोता उसे भी रुलाता था.
हुआ दिल था तन्हां, बिल नहीं,
इस बात का उसपर असर नही..

बिल इस बात को लेकर चिंतित थी,
कहीं दिल खोले सारे भेद नहीं.
कल के फरेब के किस्सों से,
हो प्रभावित कहीं आज नहीं,

बिल कहती ‘अब मज़बूरी है’,
पर दिल पूछे क्यूँ तब दुरी थी,
जब बाँटा हमने राजों को था,
साँझा हमारा एक सपना था,
क्यूँ तब तुमने खुद्दारी बेचीं थी,
क्यूँ कोड़े ख्वाब दिखाए थे,
झूठे वादों में भरमाये थे,
बेच आयी मेरे सपनों को,
कहती हो मज़बूरी है..
बिल हुयी नाराज, दिल खूब था रोया,
जिंदगी ने जान को बड़ा थकाया..

बिल के हालत बिल ही जाने,
जो उसने दिल से अब और न बांटे.
यदा कदा ही वो अब मिलती दिल से,
देती थी मर्यादाओं के सीख.
उसको दिल से एक नयी शिकायत,
क्यूँ लिखता है वो कल की तारीख.

अपनी पुरानी यादों से दिल,
अब नए दिन को काला करता था,
बिल का दिल से आखिरी संवाद,
सीखे जीवन से और बढे वो आगे..

जो नसीहत बिल ने दी थी,
वही सब ने भी दुहराया दिल से.
पर आगे की कैसे सोचे दिल आशिक,
जो उसका अक्श है पीछे छुट गया..

सही गलत का रहा अब दिल से मेल नही,
जिंदगी लगे अब बोझिल, कोई खेल नहीं.
पर करता क्या दिल तन्हां था,
मर मर कर रोज में जीता था..

कभी रोता कभी खुद से सवाल वो करता,
कभी पढता किताबें, कभी लिखता रहता,
कभी शक करता, कभी संवाद की कोशिश,
कभी खुद को ही ख़तम करने की साजिश,
पर कुछ भी पहले से आसान न था,
अपनों का दिल पे ध्यान जो था.

दिन जल्दी ही फिर मौन के आये,
दिल अन्दर ही अन्दर गौण हुआ,
था इश्क किया, बिना शर्त रखे,
अब कैसे वो कोई बात कहे,
ना कोई कागज़ न कोई समझौता था,
दिल ‘डील’ के युग में हार गया,
शायद बिल भी अपनों में मारी गयी,
और ये रिश्ता धीरे धीरे पर दफ़न हुआ…

तभी शोर हुआ ‘बाहर बारिश आयी’,
ओह्ह तो मैं सपनो में उलझकर बैठा था,
अच्छा हुआ, जो देखा, बस एक सपना था,
बच गया दिल और इश्क की साख,
पर सच है, सीख बड़ी प्यारी सी थी..

समझ रहा मैं दिल के भावों को,
और रिश्तों में उम्मीदों को,
जो ख्वाब ने दिखाया एक अंत ही था,
पर हौसले कह रहे मुझसे आज,
यही एक बेहतर अंत की शुरुआत..

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गिर रहे लोगों के भाव लिखो..

img_20161203_125036दिल कहता है,
फिर कोई कहानी लिखो,
ख्वाबों से रंगीन जवानी लिखो,
बीते दिनों के फसाने लिखो,
अपने प्रिये की तारीफें लिखों,
अपनों से बस दिल की बातें लिखो।

फिर कहता है, नहीं, आज कुछ और लिखो,
जो घट रहा आज, वो सुनामी लिखों,
पंथों में विचलित, मानव की जाति लिखों,
धर्मांध में जलते दुनिया के लोग लिखो,
हर रोज लूटती बेटी का, तुम दर्द लिखो,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

अब और इतिहास नहीं, बस ‘आज’ लिखो,
कोरे ख़्वाब ही नहीं, कड़वी सच्चाई भी लिखों,
जो जल रहे लोग, उनकी जुबानी लिखों,
हो बुझाने की कोशिश ऐसी कहानी लिखों,
बेशर्म, बेलग़ामों को तमांचे लिखों,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

हर रास्तें की है अपनी अहमियत लिखों,
रास्तों से बड़ी है मंजिल, ये हकीकत लिखों,
टकरा जाने से मंजिल मिलनी नहीं,
सो सुक़ून, शांति की सबसे अपील लिखों,
अपनों का अपनों से उठ रहा विश्वास लिखों,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Dil kahta hai,
phir koi kahaani likho,
khwabon se rangeen jawaani likhon,
beete dinon ke phansaaney likhon,
apne priyeee ki tarifein likhon,
apnon se apni kahaani likhon..

phir kahta hai, nahin kuchh aur likho,
jo ghat rahaa aaj wo sunaami likhon,
panthon mein vichlit maanav ki jaati likhon,
dharmandh mein jalate duniya ke log likhon,
har roj lootati beti ka dard likhon,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

ab aur itihaas nahi, ab aaj likhon,
kode khwab hi nahi, kadawi sacchai bhi likhon,
jo kal rahe log unki jubaani likho,
ho bujhaane ki koshish aisi kahaani likho,
besharm, belagaamo ko tamaache likho,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

har rashte ki apni hai ahmiyat, likho,
rashto se badi hai manjil ye haqeeqat likho,
takda jaane se manjeel milni nahi,
so sukoon aur shanti ki sabse apeel likho,
apno ka apno se uth rahaa viswas likho,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

सिवा उनके कुछ और चाहा नहीं..

उनके ख्वाबों में हम,
कभी थे ही नहीं.
पर ये दिल था “गुरु”
कभी माना नहीं..

उनकी नज़रों में हम,
नजर आये नहीं.
और एक ये दिल सनम
सिवा उनके कुछ और चाहा नहीं..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Unke khwabon mein hum,
kabhi the hi nahi.
par ye dil tha “guru”,
kabhi maana nahi.. 
 

unke najaron mein hum,
najar aaye nahi, 
aur ek ye dil sanam,
siwa unke kuchh aur chaahe nahi…

क्यूंकि अजनबियों से कोई रोष नहीं होता..

U're My Life..!
Bujji, U’re My Life..!

कल जब तुम मुझे बुरा बोलती,
तो कोई दुःख न होता,
क्यूंकि अजनबियों से कोई रोष नहीं होता..

कल जब हंसती तुम मेरी बातों पर,
तो एक अलग अलग ही शुरूर होता,
क्यूंकि गैर को अपना बनाने का मुझपर शुरूर होता..

और आज जब तुम अपने हुए हो,
तो तुम्हारी हर बात में मतलब ढूंढते है,
शिकन आये जो तुम्हारे चेहरे पर
तो उसकी वजह हम ढूंढते है..

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Kal jab tum mujhe buraa bolti,
to koi dukh na hota,
kyunki ajnabiyon se koi rosh nahi hota..

kal jo tum hansti meri baaton par,
to ek alag hi mujhpe shuroor hota,
kyunki gair ko apna banaane ka junoon hota..

aaj jab tum mere apne ho,
to tumhari har baat mein matlab dhundhte hai,
shikan aaye jo chehre par.
to uski wajah hum dhundhte hai..

वो थे सबसे सुनहरे पल..

Miss uuतुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

जब सपनों में तुम थी,
और सामने भी तुम..
जब जिक्र में तुम थी,
जज्बात में भी तुम..
हाँ थे वो सुनहरे पल,
जब पास में तुम थी,
और प्यास भी तुम..

तब मुझमें “मैं” कहाँ था,
बस जी रही थी तुम..
तब मेरा ये जहाँ था,
जब साथ में थी तुम..
जी रहा था जन्नत को जमीं पे,
परी बनके मिली थी तुम..

तुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

सुबह के धुप में तुम थी,
रात अधेरों में भी तुम..
मेरे अश्कों में तुम थी,
और आशिकी में भी तुम..
दर्द तुमसे था,
दीवानगी में भी तुम..
जी रहा था ख्वाबों को,
जब साथ में थी तुम..

पर जिंदगी अब वो नहीं है,
ना ही साथ में हो तुम..
न दुनिया ख्वाबों की रही,
न चाहत में हो तुम..
दोष किसका दूँ, कहो?
समझाऊं खुद को क्या मैं अब,
कहूँ, दिल था कमजोर मेरा,
या भरोसा तुमको मुझपे कम..
तुम ही बता दो क्या कहूँ,
क्यूँ रूठा मुझसे मेरा कल..?

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