अधूरी चीजें

Happy Promise day 2013 Facebook Timeline covers, HD wallpapers, Images and pictures16अधूरी चीजें कई बार बेहतर होती है,
और अनदेखे चेहरे हमेशा हशीन.
सपना सच होने पे सपना, सपना नहीं रहता,
हकीकत बनता है,
और हकीकत से बेहतर, हर बार सपना होता है..
– सन्नी

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Adhuri cheejein kai baar behtar hoti hai,
Aur andekhe chehre humesha haseen..
Sapna sach hone pe, sapna nahi rahta,
haqeeqat banta hai,
aur haqeeqat se behtar, har baar sapne hota ha..

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मै हूँ इस देश की गौरव

preambleमै दीवारों से बनी एक महल बस नहीं,
जहाँ होते हो चर्चा, एक सदन बस नहीं,
न कानून बनाने का एक केंद्र बस हु मै,
मै हूँ इस देश की गौरव, दिशा देने वाली…

हाँ मै ही थी जिसने कानून बनवाएं,
मैंने ही आपके हक थे दिलवाए,
मैंने ही थे आपके कर्त्तव्य भी बताये,
और मेरे ही शोर ने अबतक देश है चलाएं…

किन्तु खेद क़ी समय से नहीं रह सक़ी अछूती,
दिशा देती थी जो सबको, आज खुद ही है भटकी,
जिसे थे सुलझाने समस्या, आज झेल रही है समस्या,
आज संशय में शायद, क्या मै हूँ देश बनाती?

ये है मै ही थी, स्व पे गुमान करती थी,
अपनों के त्याग पे मान करती थी,
और में ही हु आज, खुद को दोषी कहती,
अपने घरवालों को हूँ दागी कहती..

लड़ना घरवालों का कुछ नया नहीं था,
पर बिकना रुपयों में क्या देश द्रोह से कम था?
ताज्जुब नहीं की तब चौकीदार सोया था,
शक हुआ यकीन कि अब वो भी बिका था…

वो दौर कोई और था जब अपने भाग्य थी इठलाती,
था मन में एक गुरूर कि मै ही देश चलाती,
पर ये गौरव, गुमान क्षणिक ही रह गया,
अपनों के स्वार्थ ने ये दिन दिखा दिया..

है निवेदन सबसे, मेरे सुनहरे दिन लौटा दो,
जो देश एक कर सके, वो पटेल मुझे लौटा दो,
सादगी हो शास्त्री सी जिसमें, अटल गुण संपन्न हो,
बिना भेद जो देश चलायें उसी को सत्ता पे तुम बिठा दो..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

वो शुप्त नहीं है

narendra modi next pm indiaवो शुप्त नहीं है,
न ही रौशनी विहीन,
पर दिखे उन आँखों को कैसे,
जिनपे हो पट्टियाँ लगी?
है वो ओज़ गुण संपन्न,
सनातन धर्म से जुड़ा,
उसमें शंखनाद की हिम्मत,
विकास-पुरुष वो हुआ..

उसमें तेज है जान,
बहुतों ने दिए जलवाए,
कुछ ने आग भी लगवाएं,
किया क्या कोई उसने जुर्म,
जो उसने तेज धर्म निभाएं?

जिस रस्ते हो तेल छिड़का,
वहीँ से आग भी गुजरे,
फिर वहां जले न कोई,
क्या ऐसा हुआ है कभी?

क्यूँ आरोप बस उस आग पे,
की उसने घर थे जलाये,
क्यूँ नहीं उनका कुछ,
जिन्होंने तेल थे फैलाए?

नहीं करता कोई विवाद,
ना कोई पूर्व से प्रश्न,
मैं मानता ये सच हूँ,
कि उसने मान है बढायें|

वो शुप्त नहीं है,
न ही रौशनी विहीन,
पर दिखे उन आँखों को कैसे,
जिनको आँखें ही नहीं?

-सन्नी कुमार
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नरेंद्र मोदी जी को समर्पित मेरी अन्य कवितायें.

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वो शुप्त नहीं है..

एक सिक्के की आस में

helpless

एक सिक्के की आस में,
कब से भटक रहा है वो,
सिग्नल की बत्ती लाल देख,
गाडियों पे है झपट रहा वो,
मांग रहा हर एक से सिक्का,
लगाये हुए वो आस..

कुछ उससे नज़रे चुरा रहे,
कुछ अपनी मजबूरी जता रहे,
आसानी से मिलता कहाँ सिक्का,
जिसकी उसे तलाश..
यह एहसास उसे भी है,
फिर भी कर रहा प्रयास..

जा रहा हर एक के पास,
अपनी मज़बूरी लिए हुए,
पसीज जा रहा जिनका सीना,
वो दे देते उसे सिक्का अपना,
कुछ बेगैरत ऐसे भी है,
जो बेचारे को डांट लगाते,
चोर-चकार की संज्ञा देकर,
दूर से ही उसे भागते.

उस बदनसीब की नसीब कहाँ
की कोई उसको प्यार दे,
उसको तो इतना भी न पता,
मातृ छाया होता है क्या??

माँ और माँ की प्यार का तरसा,
तरस रहा है सिक्को को,
सिक्को से ही उसे रोटी है मिलनी,
और सिक्को से प्यार..

उसकी ये दुर्दशा देख,
उठते कई सवाल|
उसकी बेवसी क्या है ऐसी?
जो फैला रहा वो हाथ|
होने थे जिस हाथ किताबें,
क्यूं उनको सिक्को की डरकर?

बच्चे ही भविष्य हमारा,
हम सब ये जानते है,
फिर भविष्य का वर्तमान ऐसा,
क्यूं इसे ऐसे स्वीकारते है?
ये कैसी है समस्या,
जिसे हम, सुलझा नहीं पाए??

-सन्नी कुमार
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ढेरों सपने लिए

ढेरों सपने लिए,
जो कर्त्तव्य पथ पे चले|
उसे रोके कौन तूफ़ान,
जिसमें हौसले बड़े|

इच्छा जिसकी भली,
जरुरत जिसकी हो कम ही,
वो झुके क्यों कहीं?
जो हो, खुद में सभी|

डरे नहीं जो मुश्किल से,
जो डिगे नहीं सिद्धांतो से,
कोई उलझन जिसे उलझाये ना
वही बढ़ा है आगे,
वही बढेगा आगे|

किसी में हिम्मत कहा,
उसके रथ को रोके,
जिसके घोड़े है विचार,
विवेक-बुद्धि सारथी|

ढेरों सपने लिए,
जो कर्त्तव्य पथ पे चले|
उसे रोके कौन तूफ़ान,
जिसमें हौसले बड़े|

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]
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Dheron sapne liye,
Jo Kartavya path par chale,
use roke koun toofan,
Jisme hausale bade..

Iksha jiski bhali,
Jarurat jiski ho kam hi,
wo jhukein kyun kahi,
Jo ho khud mein sabhi..

Dare nahi jo mushkilon se,
Jo dige nahi siddhanto se,
koi uljhan jise uljhaye na,
wahi badhaa hai aage,
wahi badhega aaage..

Kise mein himmat kahan,
uske rath ko roke,
Jiske ghode hai vichaar,
Vivek buddhi sarthi..

Dheron sapne liye,
Jo Kartavya path par chale,
use roke koun toofan,
Jisme hausale bade..

-Sunny Kumar
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आज सच लिखता हूँ…

guruक्या कहूँ और क्या लिखूँ,
आज अपनी कविता में..?

शब्दों में सिर्फ फूल लिखूँ,
या कांटो संग कहानी भी?
दिल के जो है जज्बात लिखूँ,
या झेल रही परेशानी भी?
जिंदगी के जश्न और जीत लिखूँ,
या चल रही मन में चिंताएं भी?

आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ,
अपनों में अपनी बाग़ रखता हूँ…

हूँ सीधा सरल एक नौजवान,
कामयाबी की ख्वाहिश रखता हूँ,
दिन भर भटकने के बाद,
मायूस होकर सोता हूँ..
अगली सुबह वापिस से,
सपने सच करने को लड़ता हूँ…

क्या कहूँ और क्या लिखूँ,
मजबूर मन के हालत पे,
आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ..

अपनों में अपनी उलझन रखता हूँ..

जान रहा ये मन है मेरा,
माँ(देश) समय आज मांग रही,
पर मुश्किल है बीबी(नौकरी) मेरी,
जो साथ आज नहीं दे रही..
नहीं कर पाना इच्छानुसार,
बड़ा रोष बढाता है,
पर एक छोटी सी कोशिश भी,
बड़ा संतोष दिलाता है..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ,
इस दिल के दीवानगी पे,

आज करता याद माशूक को हूँ,
और अपनों में मुहब्बत रखता हूँ..

इस दिल के है जज्बात निराले,
जो फंसा इश्क के चक्कर में ये,
विज्ञान को भी ये झुठलाये,
जो हो देशों दूर हमसे,
उसको सबसे करीब बताये..
दो पल के इन्तेजार में,
जो हो खुद से खींज जाए,
उसी शख्स से घंटों ये,
माशूक का इन्तेजार कराये..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ मैं,
इस जीवन के बारे में,
एक कोशिश करता हूँ, सच लिखता हूँ,

आज सबको अपनी बात रखता हूँ..

जिंदगी का ये कटु सत्य है,
की जीना हमें अकेले है,
पर माँ-बाप के आशीष तले,
और साथी के साथ हुए,
ये यात्रा सुगम, सहज कटती है..
वैमनस्य से बड़ा प्यार है,
और सेवा है सहयोग में,
कर्मपथ पे बढ़ते जाना,
यही ये जीवन कहती है..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ मैं,
आज अपने बारे में,
हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ,

अपनों में अपनी बात रखता हूँ..

-© -सन्नी कुमार[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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