क़ुरबानी….क़ुरबानी…क़ुरबानी…

Sunny-Kumar (20)क़ुरबानी….क़ुरबानी…क़ुरबानी…अल्लाह को प्यारी है क़ुरबानी..

पर किसकी क़ुरबानी? और किसे कहे सही मायनों में क़ुरबानी…?
मित्रो से सुना है की अल्लाह के भेजे किसी पैगम्बर ने इस रोज अल्लाह में यकीन रखते हुए अपने् सबसे प्यारे, अपने बेटे्े की क़ुरबानी दी थी, अब चुकि अल्लाह का दिल बड़ा दयालु था तो बच्चा बच गया, अल्लाह पैगम्बर की भक्ति विस्वास से प्रसन्न हो उसकी जगह कोई अरबी भेड को कुर्बान कर दिए… और तभी से उस रोज बाकी जानवरों के लिए एक आफत वाला दिन मुक़र्रर हुआ, जिसे हम ईद कहकर मना रहे है..
आज लोग अपने बेटों पर दाव नही लगाते, स्पस्ट है सबको पता है की कोई न आवेगा बचाने, सो आज जुगाड़ के इस दौड़ में लोग बकड़े को ही बेटे सरीखा पालते है, पोसते है, और फिर उसे काट के खा जाते है..और हो जाती है कुर्बानी. शायद अल्लाह खुश भी होते हो पर हम न होते है सच्ची….इस तरह, आज के लोग अपने अल्लाह को यकीन दिलाते है की वो भी अपने प्यारे का क़ुरबानी अल्लाह को दे सकते है. वैसे मुझे तो ये किसी का फिरकी लेना लगता है पर इस पर जब तक मेरे नंगे-पुंगे दोस्त PK फेम आमिर खान की रजामंदी न आ जाये, इस फिरकी वाली बात को आप साइड कर ले…
बहरहाल ईद की ख़ुशी में स्वरचित ये चंद पंक्तिया बाँट रहा हु, अगर समझ आये तो शेयर जरुर करें….
कैसे कह दूँ रमदान मुबारक??
जानता हूँ फितरत अब जब,
की कैसे निर्दोषों की बलि चढ़ाते हो,
अमन का सन्देश भूले हो जब,
नित रोज इंसानियत का खून कर आते हो,
कैसे कह दूँ रमजान मुबारक,
की तुम हिंदुस्तानी होकर भी वन्देमातरम से कतराते हो।
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मन होता है तुम्हें कभी आदाब कहूँ,
और मुख से तुम्हारे भी जय श्री राम सुनूं,
तुम कहते हो ऐसा करते ही तुम काफ़िर हो जाओगे,
तो मैं आदाब कहके म्लेच्छ न हो जाऊंगा?
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तुम भोग विलासिता के पश्चिम हो,
हम योग द्वीप के पूरब है,
तुम रोजा, चाँद के दीवाने हो,
हम सूरज को पूजने वाले है।
तुम्हे इस मिटटी में दफन है होना,
हम अग्नि में जल जाने है,
है पन्थ अलग, हर चाह अलग,
दोनों का विस्तार अलग।
तुम हो एकलौते अल्लाह के उपासक,
हम हर तत्व पूजने वाले है,
सो तुम देते हो संज्ञा काफ़िर की,
हम भी अब म्लेच्छ कहने से नहीं कतराते है।
है जान फूंका दोनों के अंदर,
और रक्त का रंग भी एक सा है,
दोनों को है दो दो नयन,
पर सब समान देखना भूल जाते है…
तुम खुद को अरबी से जोड़ते,
और मैं गर्वी हिंदुस्तानी हूँ,
तुम क़ुरआन को लानेवाले,
मैं गीता का शाक्षी हूँ।
तुम को यकीन अरबी मुहम्मद पे,
मैं सेवक सनातनी राम का हूँ,
तुमको मिला अमन का सन्देश,
और मुझे न्याय, धर्म की रक्षा का,
है सन्देशो में समानता फिर,
क्यों हम और तूम अब उलझे है?
अमन फैलाओ अहिंसा से तुम,
न काफ़िर कह कर रक्तपात करो,
मैं ईद मिलूं गले लग तुमसे,
तुम इदि में वन्देगान् करो।
है दोनों हम हिन्द धरा पर,
की इसका मिलके जयघोष करें।
दुनिया समझे मजहब के मतलब,
ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें।

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यकीं है..

Veer's Cutieमत आना साथ मंजिल तक, पर कुछ क़दमों तक साथ तो दो..
मत सजाना मेरी दुनियां तुम, पर एक मीठा याद तो दो..
मत मिलना तुम हकीकत में, पर अपने हसीं ख्वाब तो दो..
मत दो मुझे कोई गम, पर जो भी है तुम्हारे उन्हें बाँट तो लो।

दो पल तेरे साथ चलने से चलना सीख लूँगा, यकीं है..
तेरी यादों से अपनी दुनिया रंगीन कर लूँगा, यकीं है..
ख्वाब तुम्हारे हो तो जिंदगी यूँ ही हसीं हो जायेगी, यकीं है..
तेरे गम बाँट के ही अब मै खुश रहूँगा, यकीं है।

न करो तुम कोई वादा, पर इन्तेजार का हक तो दो..
मत आओ मेरे ख्वाब में, पर उन्हें देखने का हक तो दो..
मत हंसो तुम मेरी बातों से, पर अपने आंसू बाँट तो लो..
मत उलझो मेरी बातों में, पर ये जो भी है उसे सुझाने का मौक़ा तो दो।

तेरे इन्तेजार में भी जी लूँगा, यकीं है..
तेरे ख्वाबों से हकीकत में रंग बिखेरूँगा, यकीं है..
तेरे आंसुओं को बाँट ही खुश रहूँगा, यकीं है..
तेरी उलझनों  को एक दिन सुलझा लूँगा, यकीं है।

मत बांटो तुम हमसे अपने गुजरे हुए दिन, पर खोयी मुस्कराहट का कारण तो दो..
मत  सुनो तुम अपने दिल की बात, पर इस दिल में है क्या वो बता भी तो दो..
दुनिया आपकी दीवानी हो जायेगी, पहुँचने  का उनको बस पता तो दो..
होंगी हर ख्वाहिश पूरी, अपनी हसरतों को तुम पंख तो दो।

तेरे मुस्कुरा देने भर से गुल खिल जाएगा, यकीं है..
दिल के सारे अरमान पूरे  हों जायेंगे, यकीं है..
खुशियाँ भी अब आपका पता पूछेंगी, यकीं है..
तुम हंस के फिजा में फिर से रंग बिखेरोगी, यकीं है।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

Every Lalu Yadav and Nitish Kumar’s Fan Must Watch These Videos

“For years, Nitish Kumar kept on ranting on the jungle raj theme associated with Laluji but he has now been siding with him, what should we call this other than opportunism. Here I am sharing some you tube links where nitish and lalu slams/abuse each other, this video is for all supporter of this MahaGathbandhan, better to say MahaThagbandhan. Here the links are

महागठबंधन समर्थको के लिए.

जरुर सुनिए..समझ आये तो समझिये…यही है राजनीती और हमारे नेता समझते है की हम सब भूल जाते है…शायद हम भूल जाते है, पर भला हो इस इस सुचना तकनीक का.. सुनिए, यहाँ लालूजी नितीश जी को घुसखोर कह रहे है, लालू कह रहे है की नितीश के राज में बलात्कार हो रहा है….

लालू जी के साथ इस विडियो को जरुर बाँटिये मित्रो और कहिये की अभी भी समय है नितीश से अलग होकर अपने शब्दों पर खड़े रहे.
-सन्नी कुमार

लालूजी सुनिए न!

समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति जब तक पहली पंक्ति के पहले व्यक्ति के बराबर आकर नहीं खड़ा होगा तब तक हमारी लड़ाई ज़ारी रहेगी । -लालू प्रसाद यादव

लालूजी, आप कहते है की समाज के सबसे पिछले पंक्ति का व्यक्ति जबतक आगे आके पहली पंक्ति में खड़े व्यक्ति के बराबर न हो जाए इनकी लड़ाई जारी रहेगी. मैं जानना चाहूँगा की ऐसा किस युग में संभव हुआ था, या किस राष्ट्र में सब एक ही पंक्ति में है? सच्चाई तो यही है की हाथ की सभी अंगुलियों के उपयोग अलग है और सब सामान नही हो सकते और यही सही भी है.. हाँ हमें यह सोचना चाहिए की सबका सम्मान हो और सब जीए, सबकी उपयोगिता है पर ये झूठ मुठ की सज्जनता नही सोभती… लालूजी आज खुद नेता बन रहे है राजद में किसी और को आगे ले आइये, शुरुआत वही से कर सकते है आप, चूँकि अब हम सब चाहते है कि लालटेन को पकड़ने वाला चेहरा बदले, बिहारी नेता का और मजाक न बने, और अब जब आप ही पिछले पंक्ति को अगली पंक्ति में मिलाना ही चाह रहे थे प्रयोगास्वरूपकिसी पिछले पंक्ति का व्यक्ति को आगे लाये और बना दे राजद सुप्रीमो. आप मशहूर तो है ही अब और ज्यादा हो जायेंगे.. -सन्नी कुमार

Tips For First Year Students

My Dear Young Friends,

I congratulate you all for getting into your dream campus and pursuing your favorite subjects there, Be it Engineering, Medical or other courses. Being a student you have a lot of dream for your future and here through this post I wanted to remind you about many of things which you should care while your course duration.

You’ll be surprised to know that a large percentage of students who join college fail in first year. All these students work hard for previous two years to get admission into a good medical, engineering or college and succeed. Then, why do they fail? Simply because of few mistakes and perhaps due to the lack of some timely words of advice and guidance.

There can be many reasons for failure but the more reasons are

  1. One becomes complacent… It means a student work hard and got admission to the college, after getting admission he/she feels that his aim in life is fulfilled and relaxes. This is a great mistake.   You must know that you have just taken one step and never relax till you reach the goal.
  2. One becomes very proud and imagines that he is great! For example, after joining the engineering college, some feel that they are already engineers. Yes, it is a simply ‘day-dreaming’. Guard against this. Remember with humility that there is a long way to go.
  3. Inability to adapt to new situation.. yes, this is a genuine difficulty but you should get over this mood soon. Don’t brood over the absence of your parents or friends; keep yourself copied with study or games or music or other useful activities; make new friends, speak to your professors and well-wishers, and ‘get into the groove’ as early as possible.

These are few reasons where you should be careful now you must be interested to know that how you can achieve excellence in your studies.

My friend, to achieve excellence, it is important that you never forget the goal and take every step in that direction.

Now I would like to discuss as to what happens to a student’s mind when he joins and engineering college, what pressures and difficulties he goes through.

When a student join college , typically he goes through the following stages:

  • Euphoria: Yes, you are very happy that after doing very hard work for two years, finally you got admission into a good college. Your parents, relatives and well-wishers are happy and they speak very high foe you and shower praises on you. Yes it feels very good. Perhaps, you think that studying in a professional college is all smooth, sailing singing and dancing.
  • Dawn of reality: Within a week, you will realize that lessons are in full swing, you are yet to adjust to your new surroundings and if you slipin your studies you may find that you’re left far behind. You will slowly get a feeling: “this is not what I thought”!
  • Increased Pressure: Within 2 or 3 weeks, you’ll find that lectures continues with no let up; in addition, there may be assignments and submissions to be completed. Again if you do not catch up with the work, you find yourself very much out of plate.
  • Loneliness: If you do not catch up, it will result in loneliness and a doubt may arise in your mind.. “Is this the right course for me? Did I commit a mistake in coming here” You may further find that there is not friends to whom you look for support as they all very busy with their assignment or submissions.
  • Depression: Obviously this will result in Depression and you are leading to a poor result or failure in the exams.

Of course, you no need to get frightened, and should know that everyone will go through these stages and here I have depicted the worst scenario, my only point being that you should not relax but be serious and careful about the studies from the very beginning.

Once a student joins the course, he is subjected to psychological pressure from parents, teachers, peers and also from society. You must know how to guard against these pressure and this is very simple Never forget your aim and take every step in that direction.

-For EduTech Guide (Your Educational Counselor)

http://www.edutechguide.com
http://www.edutechguide.wordpress.com

नितीश कुमार का राजनैतिक डीएनए

नितीश जी आप और केजरीवाल एक निकले!
जिस तरह दिल्ली के केजरीवाल अपने सिद्धांतो का गला घोंट गद्दी पाए ठीक वैसी ही कोशिश आपकी रही..आप दोनों की राजनीती का शुरुआत कांग्रेस विरोध से हुआ पर आप दोनों कांग्रेसी बांहों में झूम रहे है, आप सुशाशन के लिए चर्चित हुए रिकॉर्ड बहुमत मिला और दो बार का सत्ता भोग ठीक उसी तरह केजरीवाल भी लोकपाल लोकपाल करते करते सत्ता सुख भोग आये, पहली दफा तो वो भी कांग्रेस के मदद ही आये, आप और केजरीवाल दोनों के लिए लालू एक भ्रस्ताचारी अछूत थे पर आज सब जानते है आप सब एक है, पता नहीं आपने उनका शुद्धिकरण किया है या उन्होंने आपको गन्दा पर हाँ मिश्रण गठबंधन कम ठगबंधन ज्यादा है…
खैर आप की तरह ही दुसरे दल भी है, आपके चहेते मांझी जो कभी बकलोल बयानों के लिए चर्चे लुटते थे आजकल एक दम कमल के संग होते ही ज्ञान की बाते पेल रहे है, पासवान जी का तो पूरा कुनबा अब नेता हो गया….कुल मिलाकर आप सब नेताओं की जय जय है, इस ढंग से फिटिंग किया है की जनता के पास न कोई मौका छोड़ा है न विकल्प दिया…वाकई बिहार की राजनीती इतनी सरल नही..खैर उम्मीद है एक दिन इस चक्रव्यूह को तोड़ लेगा अभिमन्यु और अबकी जीवित लौटेगा..

अभी और कितने साल?

लालूजी और नितीश जी भी स्वास्थ्य, शिक्षित, विकसित और खुशहाल बिहार के लिए वोट मांग रहे है smile emoticon हम जनता क्या जान सकते है की ये शिक्षित और स्वस्थ्य समाज के लिए कितने साल अभी और लगेंगे? पिछले २५ सालो से आप दोनों ने ही राज किया है और अब भी अगर बिहार सबसे पीछे की कतार में है तो एके बार बताइए की अभी और कितना वक़्त दे आप दोनों को काहे की हमलोग बार बार चुनाव प्रचार का चें चें पों पों नही कारखानों की सायरन सुनना चाहते है तो बोलिए एके बार की अभी और कितना दिन के लिए चुन दे?…काहे बार बार चुनाव में रुपया बहाइयेग, विकसित बिहार के लिए चुनाव नही शिक्षा और रोजगार चाहिए….तो बोलिए…

वैसे बिहारी को बीमारी का दर्जा दिलवाने वाले आप जो मसीहा बने घूमते है आपको याद तो है न की इस देश के न्याय व्यवस्था ने आपके चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है और हमारा लोकप्रिय नेता सुशाशन बाबु उर्फ़ निकू अपने इर्ष्या के कारण पुरे बिहार के विकाश का गला घोंट रहा है, अबकी चुनाव हमें यह बतायेगा की बिहारी आगे बढ़ना चाहते है या लालू को चुन बकलोल और बीमारी का टैग वापिस से पाना चाहते है…..??

#BiharElection2015

#Bihar_Election

मुजफ्फरपुर को अचानक से हुआ क्या है??

मुजफ्फरपुर को अचानक से हुआ क्या है, हर रोज किसी न किसी छोटे बड़े अधिकारी, व्यापारी को धमकी, हर रात कहीं न कहीं चोरी/डाका..? और जिला पुलिस प्रशाशन का सारा रोब बसहेलमेट न पहनने वाले हम जैसे तुच्छ इंसानों पर…उद्देश्य भी कुछ विशेस नही बस ५० का नोट पाना..हद है बेशर्मी की, इधर जब पुलिस काम ही नहीं कर रही तो फिर पुलिस काहे बे, हटाओ ये खाकी भीड़ शहर से, कमसे कम अपनी सुरक्षा अपने हिसाब से करने की आजादी तो होगी,,,बिना हेलमेट निकलने पर १००-५० जाने का डर तो न होगा…
कल पताही में गाँव वालों ने एक डकैत को पकड़ को धुन दिया और ये खाकीपोश लोग, मालूम नही उसके साथ क्या करेंगे, जिसका घर लुटा वो सब हस्पताल में भर्ती है, जिनके दूकान पे बम फोड़ा गया वो दहशत में पर स्मार्ट सिटी का ख्वाब देखने वाले शहर के पुलिसिया कर्मचारी का ध्यान लोगो के ५० रूपये के नोट पे…हद है….हद इतनी ही नही है, इनका बर्दी देख ले तो आपको मजदूरों की याद आ जाए, लगता है जमाने से नहाये नही होंगे, कुछ होमगार्ड के जवान तो हाथ में बन्दुक, माथे गमछा और हवाई चप्पल में लैश लेते दीखते है,,बस खाकी बर्दी न हो तो ये भी नक्सली सरीखे ही दीखते है….टुच्चे…
खैर इतनी गर्मी बढ़ी है शहर में की शायद ये कुछ हरकत करे, चुनाव का माहौल है, नितीश के सुशाशन की हवा तो पहले से ही निकली है, पर ये बिन लालटेन मसाल ले कर जलाने निकला कौन है, पता करे पुलिस नहीं तो खाली करे शहर…ये बोझ क्यूं???
‪#‎मुजफ्फरपुर‬

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