This is Azhaf Jamal. (Just a Test post)

azhaf-jamalThis is Azhaf Jamal, one of my student who asked me that how google find us. This post is just to show him how google can find Azhaf 🙂

Actually he is having two wishes first he want to be popular on search engines and second he want to be a good photo editor so that he can patch his pictures with Varun Dhawan. I have promised him to help for both…

Right Azhaf??

Advertisements

कुछ कदमों तक साथ तो दो..

IMG-20170809-WA0008Another poem by me, written for a very special friend whom i meet over Internet in 2012. Enjoy Reading!!
मत आना साथ मंजिल तक, पर कुछ क़दमों तक साथ तो दो..
मत सजाना मेरी दुनियां तुम, पर एक मीठा याद तो दो..
मत मिलना तुम हकीकत में, पर अपने हसीं ख्वाब तो दो..
मत दो मुझे कोई गम, पर जो भी है तुम्हारे वो बाँट तो लो।

दो पल तेरे साथ चलने से चलना सीख लूँगा, यकीं है..
तेरी यादों से अपनी दुनिया रंगीन कर लूँगा, यकीं है..
ख्वाब तुम्हारे हो तो जिंदगी यूँ ही हसीं हो जायेगी, यकीं है..
तेरे गम बाँट के ही अब मै खुश रहूँगा, यकीं है।

न करो तुम कोई वादा, पर इन्तेजार का हक तो दो..
मत आओ मेरे ख्वाब में, पर उन्हें देखने का हक तो दो..
मत हंसो तुम मेरी बातों से, पर अपने आंसू बाँट तो लो..
मत उलझो मेरी बातों में, पर ये जो भी है उसे सुलझाने का मौक़ा तो दो।

तेरे इन्तेजार में भी जी लूँगा, यकीं है..
तेरे ख्वाबों से हकीकत में रंग बिखेरूँगा, यकीं है..
तेरे आंसुओं को बाँट ही खुश रहूँगा, यकीं है..
तेरी उलझनों को एक दिन सुलझा लूँगा, यकीं है।

मत बांटो तुम हमसे अपने गुजरे हुए दिन, पर खोयी मुस्कराहट का कारण तो दो..
मत सुनो तुम अपने दिल की बात, पर इस दिल में है क्या वो बता तो दो..
दुनिया आपकी दीवानी हो जायेगी, पहुँचने का उनको बस पता तो दो..
होंगी हर ख्वाहिश पूरी, अपनी हसरतों को तुम पंख तो दो।

तेरे मुस्कुरा देने भर से गुल खिल जाएगा, यकीं है..
दिल के सारे अरमान पूरे हों जायेंगे, यकीं है..
खुशियाँ भी अब आपका पता पूछेंगी, यकीं है..
तुम हंस के फिजा में फिर से रंग बिखेरोगी, यकीं है।

-सन्नी कुमार

https://sunnymca.wordpress.com/2012/11/07

क्यों न जनता बागी हो जाए?

हाल के दिनों में जो घटनाएं बिहार में फलित हुयी है उनमें मोटा मोटा ये रहा कि सरकार शराब बन्दी को लेकर सरकार काफी शख्त दिखी और इसके लिए उन्हें धन्यवाद, पर क्या शराब ही एकमात्र बिमारी है इस बदहाल बिहार का? नहीं! यहां बेरोजगारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, जनसंख्या और सबसे घातक बीमारी, अपराध रहा है पर दशकों से बिहार की आम जनता न्याय को तरस रही है और उन्हें मिला कुछ नहीं, बल्कि अपराध और अपराधी खुले घूमते है, चाहे शहाबुद्दीन हो, राजबल्लभ, रॉकी यादव् या सैकड़ों छोटे बड़े नाम जिन्होंने आम जन का शोषण किया हो… बिहार की मिट्टी मानों अपराध के लिए और भी उर्वर हो गयी है। यहाँ निवेश के नाम पर कुछ नहीं है, काश यहाँ के करोड़पति नेता ही कुछ बिजनेस शुरू करते और लोगों को रोजगार देते पर नही ये गरीबी को सिर्फ मुद्दा मानते है और ये वही मुद्दा है जो इन नेताओं को गद्दी तक पहुंचाता है सो ये कतई गरीबी को खत्म या कम करने का प्रयास नही करेंगे.
इन्हीं शिकायतों को, मेरी पीड़ा को यहाँ कविता के रूप में पढें, सहमत हो तो शेयर करें।

तुम निर्लज्जों के ओछे कर्मों से,
लज्जित हुए हम पछताते है,
अखबारों के पन्ने हरदिन जब,
तुम्हारे काले कर्मों से भरे पाते है,
क्यों देते है वोट तुम्हें हम,
सोंच सोंच जल जाते है।

कैसे हो तुम जनता के सेवक,
जो जनता का सोशन करते हो,
फटेहाल हर दूसरी जनता,
और तुम मेर्सेडीज में घूमते हो,
करते हो तुम कौन व्यापार,
जो अकेले ही फलते हो,
रोजगार के त्रस्त है जनता,
क्यों उनको भी अवसर नहीं देते हो?

बाँट बाँट कर धर्म-जात में,
तुम अपना हित बस साधते हो,
टोपी-तिलक और ऊंच नीच में,
जनता को भरमाते हो,
और अभिनव भारत के सपने पर,
मौन मोहन बन जाते हो।

लूट-गबन और हत्या से तुम,
कौन सी कीर्ति रचते हो,
शर्म नहीं आती क्या तुमको,
जो दोहरी नीति रखते हो,
जनता को तुम नित नियम सिखाते,
और खुद अपराधियों से साठ-गांठ रखते हो,
जनता को मिले अब न्याय भी कैसे,
तुम जो न्याय को बंधक रखते हो..

कहो क्यों न जनता बागी हो जाए,
और फ़ेंक उखाड़े सिस्टम को,
क्यों न उठा ले शस्त्र खुदी हम,
न्याय, धर्म की रक्षा को,
मिलते है जो अपराध को शह अब,
क्यों न मार भगाये इन नाकारों को,
कब तक सहे आखिर हम जनता,
तुम भ्रष्ट सत्तासुख लोभियों को?

अब जब मिलता न्याय नहीं,
न बनती है हक़ में कानून,
कब तक रखे धैर्य हम जनता,
कब तक रखें हम सब मौन,
क्यों न खुद की किस्मत अब खुद ही लिख लें,
कहो, अब क्यों न हम बागी हो जाए?
-सन्नी कुमार

20161019_150921

आरक्षण का आधार

WP_20170705_06_48_43_Proआरक्षण समर्थकों के घिसे पिटे बण्डलबाजीयों में से जो सबसे प्रमुख है उनमें से कुछ को यहाँ बाँटना चाहूंगा। आरक्षण समर्थकों के अनुसार दलितों और पिछड़ों का शोषण हुआ था, उन्हें समाज में दुत्कारा गया इसलिए उनको बढ़ने का असवर देने के लिए आरक्षण आवश्यक है।
वैसे आपको वो ये बताने में असमर्थ होंगे की शोषण किसने किया? जवाब में कोई तर्क नहीं मिलेगा बल्कि फिर से बण्डलबाजी की मनुस्मृति में ये है, वो है और ब्राह्मणों ने दोहन किया….अब हम और आप, बल्कि वो भी जानते है कि मनुस्मृति कोई पढ़ता नहीं, आजादी से पूर्व ब्राह्मण नहीं बल्कि अंग्रेज और फिर उनसे पहले मुगलों, नवाबों का शाशन था फिर ब्राह्मण अकेले कैसे शोषण कर सकता था? दरअसल हर कायर एक कमजोर दुश्मन चाहता है, इनको भी चाहिए होगा? (कायर-आरक्षण समर्थक, कमजोर- ब्राह्मण, अपवाद की गुंजाईश हर जगह होती है)

हास्यास्पद ये है कि वो वर्षों की गुलामी का नारा लगा देते है, अधिकार मांगते है पर ये नहीं स्वीकारते की असमानता हमेशा थी, है और रहेगी पर आरक्षण जैसी व्यवस्था जो एक कोढ़ है भारत को न केवल पीछे धकेलती है बल्कि समाज में वैमनश्य और जात-पात की राजनीति को बढ़ावा देती है। वो आपसे ये भी न कहेंगे कि 70 साल के बाद अभी कितने साल और आरक्षण चाहिए।

खैर आरक्षण समर्थकों का एक और दलील है कि भारत में उनको नीच समझा जाता है, उनको कोई अपनी बेटी नहीं देता, न समाज इज्जत, मंदिरों में उनके प्रवेश पर रोक है, और वो असमानता के शिकार है। यहाँ मैं उनसे थोड़ा सहमत हूँ की उनसे असमानता होती है, बल्कि असमानता का शिकार तो हम आप, हर कोई है…देखिये जो इज्जत ‘बच्चन’ को मिलेगा वो ‘बेचन’ को नहीं मिल सकता न इस बात को लेकर बेचन को ईर्ष्या करना चाहिए बल्कि उसे इस सत्य का भान होना चाहिए की बच्चन(प्रतिभावान) कोई भी बन सकता, बेचन से बच्चन बनते देर नहीं लगती। उदाहरण के लिए हजारों नाम है जिनको दुनिया बिना उनके जात को जाने भी इज्जत देती है और ये असमानता दुनिया के हर कोने में मिलेगा। अब कुछ लोग हमें काफीर कहते है तो क्या किसी के कहने से हम कुछ हो जायेंगे?? हाँ, हमारा कर्म हमारी पहचान है और अगर काम 4th ग्रेड का हो तो इज्जत 1st ग्रेड की मिल सकेगी? ये तो नौकरी, बिजनेस, व्यवहार समाज हर जगह लागु है.. यहाँ कर्म की प्रधानता है। वैसे वो आपको ये नहीं बताएंगे की आज कोई उन्हें बाध्य नही करता की वो एक तय काम ही करे बल्कि जात का प्रमाणपत्र भी वो खुद बनवाते और फिर कहते की जातिवाद से नुकसान है उनका।

वो ये भी नहीं कहेंगे कि 70 सालों में आरक्षण ने देश का कितना भला कराया है और कितना नुकसान। हाँ उन्हें ये चाहिए क्योंकि उनको किसी ने बताया है कि उनके दादा-परदादों का सोशन हुआ। ये वोट बैंक की राजनीती का बड़ा हिस्सा बन गया है जो राष्ट्र को भारी नुकसान पहुंचा रहा और समाज को बाँट रहा है ऐसा मुझे लगता है।

वैसे यहां क्या मैं पूछ सकता हूँ की जो लोग आज 4थ ग्रेड, बोले तो सेवा कार्य, नौकरी कर रहे उनको भी आरक्षण मिलेगा या ये सुविधा सिर्फ मनु के प्रशंशकों(वही जो पढ़ते कम जलाते ज्यादा है) के लिए है???? और शोषित समाज का timeline तय कर दिया गया है? क्योंकी आज भी नौकरियों में कम पैसे पर लोगों को रखा जाता है, काम लिया जाता है, पर इन बेचारों के लिए किसी मनु ने कुछ नया लिखा नहीं है तो क्या इनके पोतों(ग्रैंड सन) के लिए भविष्य में आरक्षण मिल सकता है?

एक और खतरनाक बकवास होता है उनके पास की मंदिरों में पंडितों का 100 प्रतिशत आरक्षण क्यों है, अब उनको हजार बार हजार लोगों ने समझाया होगा कि भाई जो मन्दिर बनायेगा वही पुजारी निर्धारित करेगा, तुम एक मंदिर बना लो बन जाओ पुजारी कोई रोकेगा नहीं, अगर रोकता है तो on कैमरा क्रांति कर दो, पर तुम कुछ क्यों करोगे तुमहे तो दान का लोभ है, फिर कटोरी का जुगाड़ कर लो, सबकुछ पंडितों को ही नहीं मिलता.. पर इत्ती सी बात भी न समझेंगे और जातिवाद से लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाके ऐसी तैसी करा लेंगे…..

आप क्या कहते है???

बाकि प्रतिभा बेमेल है, विजयी है जिससे सबको सहमत होना है, सो प्रतिभावान बने, निर्विवाद बने।

-सन्नी

तू भेद न कर

दिल ने लाख समझाया कि तू भेद न कर,
मानव है मानवता से बैर न कर..
रंग, बोली, धर्म-जात के है भेद बेवजह,
तू जी खुद को औरों से रंज न कर..

पर वो दिल की क्यों सुने कि वो दिमाग जो था,
कहा डपट कर कि रह औकात में तू,
और देशी संविधान से बैर न कर.
नहीं पांचो ऊँगली बराबर तू जीद न कर,
हाँ तू जोड़ लगा सबको अपना मोल बता,
पर है सब एक, ये बेवकूफी न तू हमको बुझा..

-सन्नी कुमार

दिवाली देशफ्रेंडली बनाये

​दीपावली सिर्फ पर्यावरण फ्रेंडली मनाने भर से काम न चलेगा, रामभक्तों को इस बार की दिवाली को देशफ्रेंडली बनाना होगा अर्थात चीनी उत्पादों को नकारते हुए घर को रोशन करना होगा.. एक और बात, मीठा का मतलब घर के सदस्यों के लिए चॉकलेट का डब्बा नहीं बल्कि घर और पड़ोस के लोगों के लिए मिठाई(भले प्रसाद के रूप में,)भी होता है। वैसे बच्चों में नया संस्कार देना है, कुछ देने की आदत डालनी है तो फिर दिवाली एक बेहतर दिन है किसी जरूरतमंद की मदद करने के लिए, आप बच्चों को प्रेरित कर सकते है कि महंगे फटाकों के क्षणिक सूख से बेहतर है किसी जरूरतमंद को कम्बल देना जो आपको एक अलग अनुभूति प्रदान करेगा, बोले तो मन को अच्छा लगेगा। बच्चे और आप कनेक्ट हो सकेंगे खुद से और राम जी से और फिर मुझे तो ये भी लगता है कि रामजी को घर में नहीं मन में बुलाना चाहिए, और ये बेहतर तरीका है उनको भी खुश करने का। है कि नहीं?

और फिर इस तरह से औरों के संग मिठाई बाँट कर, आसपास सफाई अभियान चलाकर, किसी मदद कर हम दिवाली मनाये, थोड़े कम फटाके फोडे बावजूद बड़ा आनन्द आयेगा…,बाकि हम सब समझदार है।

सच को छुपा देता हूँ..


सैकड़ों दफा लिखकर मैं मिटा देता हूँ,
सीने में है जो आग उसे मजबूरन बुझा देता हूँ,
डरता हूँ जल जाएगा कुछ मेरा भी,
बस इसी लोभ में सच को छुपा देता हूँ…

-सन्नी कुमार

​एक प्रेमपत्र भी भेजो न!


तुम्हारे त्वरित सन्देशों से,
मैं खूब प्रफुल्लित होता हूँ,
प्रेम रस में डूबा चैटिंग,
जिसे बार बार मैं पढता हूँ,
दिख जाओ जो ऑनलाइन तुम,
झट से कुछ नया भेजता हूँ,
और जो मिल जाए फौरन जवाब मुझे,
दिल गुब्बारा हो मैं उड़ता हूँ।

दिल है दिल ये मांगे ‘ऑल’,
सो शुरू किया है वीडियो कॉल,
अब तुम्हारी प्यारी सूरत से मैं,
सुबह अपना चमकाता हूँ,
चांदनी रात में बाहर तुमसे,
घण्टो तक बतियाता हूँ..

तुम लिखती हो, मैं पढता हूँ,
तुम बोलती हो, मैं सुनता हूँ,
तुम हंसती हो, मैं खिलता हूँ,
पर तुम्हारे छुअन की हसरत,
दिल में ही रह जाती है,
महक तुम्हारे महसूस करूँ मैं
हसरत अधूरी रह जाती है..

सोंचता हूं कैसे पा लूं ये सब,
जवाब मिलता है,
तुम एक प्रेम पत्र भी भेजो न!

-सन्नी कुमार

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: