कैसे भूल सकता हूँ वो दिन

कैसे भूल सकता हूँ वो दिन,
जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी.
परेशां था मैं तब गुजरे कल से,
जब मेरे आने वाले कल की बात चल रही थी..
अन्दर मुरझा गये थे तब सींचे सपने,
जब बाहर उम्मीदों की बयार चल रही थी.
कैसे भूल सकता हूँ मैं वो खुशनसीबी के दिन,
जब मैं और तुम ‘हम’हो ये बात चल रही थी…
-सन्नी कुमार

Kaise bhul sakta hoon wo din,
Jab humare rishtey ki baat chal rahi thi.
Pareshan tha mai tab beetay kal se,
jab mere aane wale kal ki baat chal rahi thi.
Andar murjha gaye the tab seenche sapne,
jab baahar ummidon ki bayaar chal rahi thi.
kaise bhul sakta hun mai wo khushnasibi ke din,
jab mai aur tum ‘hum’ ho ye baat chal rahi thi.
-Sunny Kumar

तुम वह सितारा हो..

चमकेगा जो कल फलक पर,
तुम वह सितारा हो.
संभाले उम्मीदों का जो खजाना,
तुम वह पिटारा हो.
दिल को जो अभिभूत कर दे,
तुम वह नज़ारा हो.
चमकेगा जो कल फलक पर,
तुम वह सितारा हो..

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: