मुजफ्फरपुर में राष्ट्रिय डिजिटल कंप्यूटर साक्षरता मिशन कार्यक्रम हुआ शुरू

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मित्रो, हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रिय डिजिटल साक्षरता मिशन कार्यक्रम, जिसके तहत हर परिवार को डिजिटल साक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है, कार्यक्रम का आयोजन फ्यूचर इंस्टिट्यूट(FIMTS) और RGCSM के संयुक्त प्रयास से सृजन प्राइवेट आईटीआई, मुशहरी, मुजफ्फरपुर के प्रांगण में किया जा रहा है।
आप सभी मित्रों विशेषकर मुजफ्फरपुर के मित्रों से अनुरोध है की इस जानकारी को आप अपने आस पास के लोगों में बांटे और जो भी लोग कंप्यूटर की प्रारम्भिक ट्रेनिंग लेना चाहते हो वो लोग इस कार्यक्रम से जुड़ सकते है। कार्यक्रम में कोई भी डिजिटल निरक्षर भाग ले सकते है जिनकी उम्र 14 से 60 के बिच हो।
प्रारम्भिक चरण में हमलोग इस कार्यक्रम को सृजन प्राइवेट आईटीआई, मुसहरी थान के नजदीक शुरू कर रहे है और फिर मुजफ्फरपुर के विभिन्न गांव में इस कार्यक्रम को चलाया जायेगा। आप सब से सहयोग अपेक्षित है।
आओ भारत को डिजिटल भारत बनाएं
धन्यवाद
सन्नी कुमार
7079740347
नोट- अगर आप इस कार्यक्रम को अपने गाँव, कस्बा में शुरू करना चाहते हो या कंप्यूटर ट्रेनिंग, सॉफ्टवेयर सम्बंधित कोई सेवा, सुविधा, सलाह चाहिए हो तो आप मुझे संपर्क कर सकते है।

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मुजफ्फरपुर में मोदी

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मोदी जी आज आपके 50 मिनट के भाषण में कहीं देश का वह प्रधानमन्त्री नजर नहीं आया जिसको हमने चुना था, माफ़ करना मित्रों पर कभी वो गाँव की दो दयादीन सरीखी उलाहना करते दिखे की भोज छीन लिया नितीश ने तो कभी rjd का मतलब समझाते दिखे, उनको ऐसा लगता है की मुज़फ्फरपुर में लोग बिजली को तरसते है और शायद हमारा प्रधानमन्त्री बिहार की खूबियों को और इसके पयत्नशील प्रयत्नो से अनजान है।
आज एक प्रधानमन्त्री के नाते आप विकास की एक रुपरेखा खिंच सकते थे, एक संवाद से लोगों में उम्मीद और उत्साह का संचार कर सकते थे पर आप को राजद, नीकु और पिछली सरकार के चर्चे ज्यादा करना था। माफ़ कीजियेगा मोदी जी पर उम्मीद और ख्वाब मुझे नकारात्मकता से ज्यादा लुभाते है और आप उम्मीद पे खड़े न थे। आप बिहार का तकदीर बदलने आये थे, पर मुज़फ्फरपुर का आपने स्मार्ट सिटी का सपना तोडा और आज के भाषण में कई बार ऐसा लगा की लालू नितीश की तरह आप भी बिहारी जनता को बेवकूफ समझते है।
आपसे गुज़ारिश है अगली बार जब आये तो थोडा अध्ययन कर ले, बिहार सरकारी तंत्रो के मामले में पिछड़ा हुआ है पर मानव सन्साधन और बौद्धिक स्तर पे हम इतने भी नकारा नहीं। आज आपका भाषण उन 500 रूपये पाये श्रोताओं को अच्छे लगे होंगे जिनपर कल सुशिल मोदी का उपकार बरसा था मुझे तो आप न भाये आज।
#ModiinBihar #ModiInMuzaffarpur #BiharElection

मेरी जाति

बिहार में जातिवाद आज भी है और अक्सर लोग पूछ लेते है आपकी जाती क्या है? यह छोटा सा जवाब उन्ही लोगो के लिए है…
जब मैं बच्चो के साथ होता हूँ, उन्हें कुछ सीखा रहा होता हूँ मैं ब्राह्मण होता हूँ, खेत में डनेर पर खड़ा होकर जब मजदूरों से काम लेता हूँ मैं भूमिहार होता हूँ, जब किसी म्लेच्छ को उसकी औक़ात बता रहा होता हूँ, गुस्से में होता हूँ मैं क्षत्रीय होता हूँ, अपने दफ्तर में मुस्कुराता हुआ चेहरा लिए जब मैं व्यापर की बात करता हूँ मैं वैश्य होता हूँ और जब झाड़ू लेकर सड़क की सफाई करता हूँ या कोई और सेवा कर रहा होता हूँ मैं शुद्र होता हूँ। हर पल हर काम में मैं हिन्दू होता हूँ, यही मेरी जात है 🙂

Be Real Please

Reblogging this post again so you can read 🙂

Dont read if you dont like to read just a story because there is nothing exceptional 😉

Life iz Amazing

I feel a strange anger and same level of frustration whenever i meet him, whenever i heard about him. He is not the same whom i met years back, he who was always happy, passionate and confident for everything is nowadays begging for a normal death! Today again came to know that he cried, abused himself and begged for normal death. It was a working day, he have his office where boss has given him all rights but what is he doing there? Crying for his past, calling same girl about whom he keep complaining that she has raped his dream and still begging to same girl who has not shown any trust and left him easily. I really can’t understand what’s his problem, why is he making life so uneasy, why can’t he rejoice his life, why can’t he realize that worst has passed and its worthless to keep…

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अगर आपके पास मौका हो……..तो आप क्या करेंगे?

अपने फेसबुक वाल से नकल करके यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ, चुकी अपने ब्लॉगर साथियों का मन भी जानना है, सबको सुनने के बाद एक पोस्ट भी करूँगा 🙂

तो सवाल है…

अगर आपके पास मौका हो की आप अपने देश के लिए किसी एक व्यवस्था/प्रथा/प्रणाली को बदल सके या लागु कर सके तो आप क्या करते? कमेंट करके बताये.
आपका सुझाव देश बदलने में काम आएगा, सो गंभीर होके विचारें और बताएं.

ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें

Sunny-Kumar (20)तुम भोग विलासिता के पश्चिम हो,
हम योग द्वीप के पूरब है,
तुम रोजा, चाँद के दीवाने हो,
हम सूरज को पूजने वाले है।

तुम्हे इस मिटटी में दफन है होना,
हम अग्नि में जल जाने है,
है पन्थ अलग, हर चाह अलग,
दोनों का विस्तार अलग।

तुम हो एकलौते अल्लाह के उपासक,
हम हर तत्व पूजने वाले है,
सो तुम देते हो संज्ञा काफ़िर की,
हम भी अब म्लेच्छ कहने से नहीं कतराते है।

है जान फूंका दोनों के अंदर,
और रक्त का रंग भी एक सा है,
दोनों को है दो दो नयन,
पर सब समान देखना भूल जाते है…

तुम खुद को अरबी से जोड़ते,
और मैं गर्वी हिंदुस्तानी हूँ,
तुम क़ुरआन को लानेवाले,
मैं गीता का शाक्षी हूँ।

तुम को यकीन अरबी मुहम्मद पे,
मैं सेवक सनातनी राम का हूँ,
तुमको मिला अमन का सन्देश,
और मुझे न्याय, धर्म की रक्षा का,
है सन्देशो में समानता फिर,
क्यों हम और तूम अब उलझे है?

अमन फैलाओ अहिंसा से तुम,
न काफ़िर कह कर रक्तपात करो,
मैं ईद मिलूं गले लग तुमसे,
तुम इदि में वन्देगान् करो।

है दोनों हम हिन्द धरा पर,
की इसका मिलके जयघोष करें।
दुनिया समझे मजहब के मतलब,
ऐसे उदाहरण हम प्रस्तुत करें।
© -सन्नी कुमार

अच्छा लगता है..

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Dedicated to Balika Vadhu, My beautiful wife

मेरी बेवक़ूफ़ियों पर, जब तुम अल्हड़ मुस्काती हो,
मुझे लुभाने की ख्वाहिश में, जब तुम गाने गाती हो,
बात बात में, मेरी ही बात, जब तुम लेकर आती हो,
दिल रीझता है, अच्छा लगता है, जब ऐसे प्यार जताती हो…

सुबह सवेरे जब तुम सज धज कर, मुझे जगाने आती हो,
या घर से निकलते वक़्त, जब तुम रुमाल देने आती हो,
मेरे भूलों को भूल अब जब तारीफों के पुल बांधती हो,
मन मुस्काता है, अच्छा लगता है, जब तुम अपना सर्वस्व बताती हो।

कल तक था जिस आस में जिन्दा,
तुम वो सावन लेकर आयी हो,
था अतीत का जो दर्द सहेजे,
तुम उन्हें बहाने आयी हो।

हाँ कहता रहा हूँ तुम ख्वाब नहीं,
अब लगता है, तुम उन ख्वाबों को संवारने आयी हो।
जिंदगी जीऊँ मैं और भी बेहतर,
इसीलिए मेरे जीवन में,
‘बालिका-वधू’ तुम आयी हो।
-सन्नी कुमार

कैसे कह दूँ मैं ईद मुबारक?

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कैसे कह दूँ मैं ईद मुबारक??

जानता हूँ फितरत अब जब,
की कैसे निर्दोषों की बलि चढ़ाते हो,
अमन का सन्देश भूले हो जब,
नित रोज इंसानियत का खून कर आते हो,
कैसे कह दूँ रमजान मुबारक,
की तुम हिंदुस्तानी होकर भी वन्देमातरम से कतराते हो।
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मन होता है तुम्हें कभी आदाब कहूँ,
और मुख से तुम्हारे भी जय श्री राम सुनूं,
तुम कहते हो ऐसा करते ही तुम काफ़िर हो जाओगे,
तो मैं आदाब कहके म्लेच्छ न हो जाऊंगा?
-© -सन्नी कुमार
(Not to hurt anyone but again its what i have felt, on the name of supreme sacrificing innocent animals are cruel, terrorism on the name of religion is shameful act.
Though i accept that there are good and bad everywhere and my wishes to all who celebrates it in a peaceful way, and follows the real essence of religion that is humanity. Sorry n Thank you!]
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दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूक उठा लूँ

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दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूक उठा लूँ,
स्याही फीके हो गए, गदर से अपनी बात सूना दूँ,
शिकायतों का हो दौर खत्म,
कपूतों को उनके अंजाम बता दूँ,
दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूकें उठा लूँ।

जेहादी कट्टरता ने बहकाया बहुत, की थोडा इनको भी समझा दूँ,
भ्रस्टाचारी कांपे थरथर, कुछ ऐसी दहशत फैला दूँ,
गधों को घोड़े संग दौराने की जिद को फौरन रुकबा दूँ,
दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूकें उठा लूँ।

-सन्नी कुमार

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