HO NA HO/ जिन्दगी

नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
आत्मा से आत्मा,
तन की बिसात क्या ,
हो ना हो |
दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

सीपियाँ/Indira's Hindi blog

नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
आत्मा से आत्मा,
तन की बिसात  क्या ,
हो ना हो |
दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

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आजादी के असली नायक कौन ⇄ काँग्रेस या गुमनाम कर दिये गये सेनानी व शहीद ?

यह लेख मैं परम आदरणीय नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रहस्यात्मकता से गायब हो जाने के पश्चात बने जाँच आयोगों की तथाकथित सार्थकता, गंभीरता व सत्यता का विश्लेषण करते हुऐ शुरू करूँगा जिसके अंतर्गत काँग्रेस और इसके पुरोधाओं के असली कुरूप व निकृष्ट चरित्र का यथासंभव किंतु ऐतिहासिक सबूतों सहित तथ्यात्मक पोस्टमार्टम ही किया जाना है। ▼

★ देश आजाद होने के बाद संसद में कई बार माँग उठती है कि कथित विमान-दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु के रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए सरकार कोशिश करे। मगर प्रधानमंत्री नेहरूजी इस माँग को प्रायः दस वर्षों तक टालने में सफल रहते हैं। भारत सरकार इस बारे में ताईवान सरकार (फारमोसा का नाम अब ताईवान हो गया है) से भी सम्पर्क नहीं करती।

अन्त में जनप्रतिनिगण जस्टिस राधाविनोद पाल की अध्यक्षता में गैर-सरकारी जाँच आयोग के गठन का निर्णय लेते हैं। तब जाकर नेहरूजी 1956 में भारत सरकार की ओर से जाँच-आयोग के गठन की घोषणा करते हैं।

लोग सोच रहे थे कि जस्टिस राधाविनोद पाल को ही आयोग की अध्यक्षता सौंपी जायेगी। विश्वयुद्ध के बाद जापान के युद्धकालीन प्रधानमंत्री सह युद्धमंत्री जेनरल हिदेकी तोजो पर जो युद्धापराध का मुकदमा चला था, उसकी ज्यूरी (वार क्राईम ट्रिब्यूनल) के एक सदस्य थे- जस्टिस पाल। मुकदमे के दौरान जस्टिस पाल को जापानी गोपनीय दस्तावेजों के अध्ययन का अवसर मिला था, अतः स्वाभाविक रुप से वे उपयुक्त व्यक्ति थे जाँच-आयोग की अध्यक्षता के लिए।
मगर नेहरूजी को आयोग की अध्यक्षता के लिए सबसे योग्य व्यक्ति शाहनवाज खान नजर आते हैं।

शाहनवाज खान- उर्फ, लेफ्टिनेण्ट जेनरल एस.एन. खान। कुछ याद आया?

Source: आजादी के असली नायक कौन ⇄ काँग्रेस या गुमनाम कर दिये गये सेनानी व शहीद ?

बिहार चुनाव में चारामेल

बिहार को जो पहचान बुद्ध, महावीर, चाणक्य, आर्यभटट, मौर्य, अशोक, शेरशाह, राजेन्द्र प्रसाद, दिनकर, जयप्रकाश न दिला पाये वह पहचान हमारे लालटेन मार्का लालू जी ने दिलवाया, इनके और इनकी पांचवी पास बीबी के 15 साल के राज में बिहार ने इतनी तरक्की की की सारे बिहारियों के रोजगार का प्रबन्ध बिहार में ही हो गया… 90 से 2005 तक में तो बिहार के अंदर रोजगार के इतने अवसर पैदा हुए की हर हुनरमन्द बिना किसी ख़ास लागत के अपना उद्योग स्थापित कर सकता था, अब उद्योग कई थे पर अपहरण में नवयुवक दूरदृष्टी कुशल युवकों का विशेस ध्यान था.
बिहार पुरुष लालू जी के राज में किसान इतने कर्मठ और जुझारू हुए की रणवीर सेना जैसी देशभक्त सेना वो भी खुद के पैसो से बना ली, नक्सली तब एक दम शांति प्रिय हो गए, गरीबों के यहां इतने धन हुए की हमने विश्व बैंक को भी उधार दिया, उस दौर में जो भी बिहारी बिहार से बाहर रहे उनसे पूछिये उनकी कितनी इज्जत होती थी बाहर में और वो कितने फक्र से अपनी पहचान बताते थे..
खैर 15 साल के इस बेहद सफल साशन के बाद भाजपा और जदयू साथ में चुनाव लड़ी और लालू जी को धोखे से हरा दिया गया, उस महान आदमी पर चारा चोरी का लांछन लगा, कोर्ट पे टिपण्णी नहीं पर ये भाजपा, जो फासिस्ट है की साजिश थी और आज लालू को ईमानदार और साफ़ चरित्र होने का प्रमाण पत्र युग के सर्वश्रेष्ठ ईमानदार केजरीबवाल द्वारा जारी किया चूका है इसलिए अब लालू जैसे महान व्यक्ति पर कोई टिका टिपण्णी की गुंजाईश नहीं।
चलिए बात करते है लालू के बिछड़े मित्र विकास पुरुष श्री नितीश की जो थोड़े भटक गए थे, साम्प्रदायिक जुमलेबाज भाजपा के समर्थन से दो चुनाव जीत मुख्यमन्त्री बने पर मोदी जैसे फासिस्ट के प्रधानमन्त्री बनते ही उन्होंने मुख्यमन्त्री की कुर्सी तोड़ी और मांझी को पदासीन किया और फिर लालू जी के सुझाव से बिहार में विकास की बहाली के लिए मांझी को गद्दी से कान पकड़ उठा खुद बैठे.. नितीश जो कभी बहक गए थे और भाजपा के साथ बिहारीयोन को बहका लालू जैसे महान नेता के खिलाफ बोलते थे वो आज सब समझ गए है और कॉंग्रेस्स और लालूजी की मदद से बिहार में पुनः विकास और बिहारियों की खोयी पहचान वापस दिलाने के लिए प्रयासरत है इसलिए मित्रों जुमलेबाज भाजपा के बात में न फंसे, नितीश जी आज प्रायश्चित करना चाहते है, कांग्रेस के पप्पू और आपके अपने महानतम नेता श्री लालू को न केवल वोट दे बल्कि साबित करे की बिहार क्या चीज है, हम अव्वल है और केरल सबसे पीछे, धन्यवाद लालूजी, धन्यवाद राबड़ी जी और हाँ नितीश अगली बार भाजपा के इर्द गिर्द भी फटके तो फोड़ दूंगा…
जय चारा,
जय जातिवाद,
जय बिहार

-सन्नी

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