Galatfahmi Si Hone Lagi Thi | Hindi Poetry

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वो सावन अब तक नहीं आया

आज अपनी ही तस्वीर देखी तो कमबख्त ये ख़्याल आया,
कि लिखते रहे औरों को इतना डूबकर कि खुद का ख्याल भी नहीं आया,
औरों को लुभाने की चाह में मैं खुद को ही भूला आया,
आज कहते है सभी अपने कि थोड़ा मैं भी मुस्कुरा लूं,
पर कैसे कि वजह लेकर वो सावन अब तक नहीं आया..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

ऐसा कब सम्भव हो पाया है

मुस्कुराता रहा दिन भर,
जो तुम फिर याद आयी थी,
मालूम चला कि तप रहा हूँ बुखार में,
जब हक़ीक़त पास आई थी..

थी तुम एक हसीन ख्वाब,
जो मुझको मुझसे दूर ले गई,
जीवन के कड़वे सच का,
इस मूरख को ज्ञान दे गई।

आज मस्त हूँ अपने बढ़ते सफर में,
फिर ये मौसम, ये गलियां,

और गिनती के अच्छे लोग,
तुम्हारी याद दिलाते है,
पढ़ लेता हूँ अक्सर वो पन्ने,
जो तुम्हारी याद दिलाते है।

तुम हो नहीं आज,
पर तुमसे ज्यादा पाया है,
ख्वाबों से बेहतर हो गई जिंदगी,
तुम्हारे दुआओं में खुद को महफूज़ पाया है,
है हसरत एक आज भी,
की तुमसे मिलूं,
पर अतीत और वर्तमान मिल जाये,
ऐसा कब सम्भव हो पाया है? 😊
© सन्नी कुमार

युवावों का देश, युवाओं के नारे

युवावों का देश, युवाओं के नारे,
सत्ता में गायब है फिर भी बेचारे।
पक्ष जिनको पकौड़ा तलना सीखा रहा,
और विपक्ष पत्थरबाजी जिनसे करा रहा,
नाज करे क्या उस युवादेश पर,
जो मुल्क की बर्बादी के नारे लगा रहा?

सत्ता कहती है- मरता है रोहित मरने दो,
कन्हैया-खालिद को कचड़ा करने दो,
इनको ॐ-सुंदर-सत्या से अनजान रखो,
बस इनकी लाइक-कमेंट की भूख बरकरार रखो।
ये फिर कल पकौड़ा या पत्थर चुन लेंगे,
और तब हम इनको कार्यकर्ता मुफ्त में रख लेंगे।

ये तोते है रट लगाएंगे,
पर तुम तो बस जाल फैलाओ,
जात-धर्म और ऊंच नीच में,
हर बार खुदी ये फस जाएंगे,
बड़ी जल्दी में है इनके चाहत का ट्रिगर,
ये बर्बादी तक इसे चलाएंगे।

कैसे करु मैं नाज इस युवादेश पर,
जो सियासत का बनता चारा है,
दिन रात है रहता रटता किताबें,
ले-देकर नौकरी की आस में जीता है,
सत्ता-सियासत ने जिसको बस वोट है समझा,
क्या वो क्रांति की जुर्रत रखता है?
©सन्नी कुमार

गलती न मेरी थी, न उनकी थी

Life-iz-Lonely-But-Happyगलती न मेरी थी, न उनकी थी,
था करार, कि तब शायद जरुरत दोनों को थी,
उनको संवरना था पसंद और मैं तब भी शब्दों से आइना दिखाता था,
आज आइना कहाँ, फ्रंट कैमरा चलता है सन्नी,
शब्दों में बहते जज्बात को कौन समझे,
अब तो हर सेकण्ड में हैशटैग भी बदलता है,
कि वो जो कभी ट्रेंड न हुआ उन एहसासों कौन समझे..

गलती न मेरी थी, न उनकी थी,
बस दोनों की जरूरतें थी….
©-सन्नी कुमार

Galti na meri thi, na unki thi,
tha karaar ki tab shayad jaroorat dono ki thi,
unko sanwarana tha pasand aur mai tab bhi shabdon se aaina dikhaata tha,
aaj aaina kahan, front camera chalta hai sunny,
Shabdon mein bahte jajbaat ko koun samjhe,
ab to har second mein hashtag bhi badalta hai,
ki wo jo kabhi trend n huaa un ehsaason ko kounsamjhe…
©-Sunny Kumar

[Image credit:- Google Images]
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तुम्हारा जिक्र जरुरी है..

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