Doha (Two Liners)

Prasu-Kuchipudi (33)कहते है किसी के चले जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होती,
पर क्या साँसों का चलना भर ही जिंदगी है?

[Khate hai kisi ke chale jaane se jindagi khatm nahi hoti,
Par kya sanso ka chalna hi jindagi hai?]

इश्क दुआ है, इश्क नशा है,
इश्क है सांस और इश्क ही हवा है..
 
[Ishq duwaa hai, Ishq nashaa hai,
Ishq hai saans aur ishq hi hawaa hai…]

वो लोग, जो कल तक हमारे लिये दुआएं करते थे,
वही आज तुम्हें भुलाने की सलाह देते है..
[Wo log, Jo kal tak humaare liye duaayein karte the,
wahi aaj tumhein bhul jaane ki salaah dete hai..]

 

हर ख्वाब पूरा नहीं होता,
पर ख्वाब में कुछ भी अधुरा नहीं होता..
[Har khwab pura nahi hota,
par khwab mein kuchh bhi adhura nahi hota..]

मिले फिर वही जो कल भी मिले थे,
पर मिलें इस कदर कि वो बिलकुल नए थे..
[mile phir wahi jo kal bhi mile the,
par mile is kadar ki wo bilkul naye the..]

घुटता है दिल, कुछ कह भी नहीं पाता,
छोड़ गया मेरा कल, आज अब हंस भी नहीं पाता..
[ghutata hai dil, kuchh kah bhi nahi paata,
chhor gayaa mera kal, aaj ab hans bhi nahi paata]

क्या हस्ती है तुम्हारी..
मुहब्बत हम  कर नहीं सकते और नफरत तुम करने नहीं देती..
[Kya hasti hai tumhari..
Muhabbat hum kar nahin sakte aur nafrat tum karne nahin deti..]

अब और नहीं तड़पाओ,
अब और न हमको सताओ,
मै दूर तुमसे चला जाऊं,
आखिरी बार तो मिलने आओ.

[Ab aur nahin tadpaao,
ab aur na humko sataao,
mai door tumse chalaa jaaun,
aakhiri baar to milne aao]

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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तुम बस मेरा साथ दो ..

आओ तुम्हे आज ख्वाबों की दुनिया में लिए चलता हूँ …Dreaming Together

जो जवाब हाँ है तो अपना ये हाथ दे दो,
तुम बस मेरा साथ दे दो,
चलो चलते है उस दुनिया में,
जहाँ बस प्यार ही प्यार है..

तुम कर लो भरोसा हमपे,
अपनी आँखों को अब आराम दो,
अपने सपनो को उड़ान दो,
लिए चलता हूँ अपनी दुनिया में,
तुम बस मेरा साथ दो ..

ख़ुशी और गम को छोड़ यहीं,
रुसवाई रंजिश को छोड़ यही,
आ जाओ मेरी दुनिया में,
जहाँ मैं बस तुम्हे अपना प्यार दूँ..

सुनी बहुत इस दुनिया की अबतक,
अब थोड़ी अपने दिल कि सुन लो,
जो भी है ख्वाहिश तुम्हारे,
आज उनको पूरी कर लो।।

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी, कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

ये मेरा दिल, मेरी दुनिया चाहे..

इस दिल में सिर्फ तुम हो,
मेरी हर ख़ुशी का राज़ तुम हो,lmnu
ये मै और मेरा रब जाने।
हर पल साथ तुम्हारे मै,
ख्वाहिश अपना बना लू मै,
ये मेरा दिल, मेरी दुनिया चाहे।

आज एक और दिसम्बर बीत गया..

दिन बदलते-बदलते,
अब ये बरस भी बदल गया।
धीरे धीरे ही सही,
ये मंजर सारा बदल गया।

द्रुत रफ़्तार से बढती जिंदगी,
उस मोड़ से आगे निकल गयी,
जहाँ दोस्तों का निर्मोह साथ था,
वो मोड़ अब पीछे छुट गया।

एक मयूरी जहाँ मिलती थी,
जहां छोटे बच्चो संग मस्ती किया करते थे,
अपने धुन में खो खुद की करना,
वो ज़माना अब पीछे छुट गया।।

जिंदगी मुझे मिली थी दिसम्बर में,
आज एक और दिसम्बर बीत गया।

ये सर्द सुबह है धुंध भरा…

foggy dayये सर्द सुबह है धुंध भरा,
सबकुछ मानो जमा परा,
धुंध ने धरती को आकाश बना,
चहुओर बादल है भरा,
इन बादलो में देख पाना,
था घर से निकलते वक़्त का भूल मेरा।

इस सर्द की कठुरता का,
खैर मुझे कोई मलाल नहीं,
इन बादलों के पार नयी दुनिया है,
दिल को ये विश्वास है,
मेरा है वो कर रही इन्तेजार,
उससे मेरी ये आस है।

उसी दुनिया से मिलने की ख्वाहिश,
इन बादलों में लेके आयी है,
बढ़ रहा मंजिल की और,
उम्मीदे के पर लिए हुए,
अगले पल में ही मिल जाएगी वो,
ऐसी ही कुछ हसरत लिए हुए।

इन रास्तो से पहले भी गुजरा हूँ,
मै हजारों बार,
पर धुंध से ऐसी सजावट,
देखी है पहली बार।
नयी दुनिया की राह बादलों से, सोचा था,
आज हो रहा ऐतबार।

वो रोज के मिलने वाले आज,
इन बादलों में आज दिखे नहीं,
चिड़ियों के चहकने की आवाज,
आज हमने सूनी नहीं,
मैं अकेला इस वीरान सड़क पे,
कोई साथी पथिक दिखा नहीं।

है इतनी ठण्ड तुम कहाँ जा रहे हो बेटा,
घर से निकलते वक़्त माँ ने यही पूछा था,
उनसे बचने के लिए,
गुरूजी ने बुलाया उनको बताया था,
हाँ था ये गलत पर क्या करें,
ये शरद कठोर इसको भी,
आज ही एकदम से आना था,
मैं कैसे कह पाता माँ से,
इस शीतलहर में मै वादा निभाने जा रहा।

निकल चूका हूँ घर से अब मैं,
ख्वाबों की और मै बढ़ रहा।
मिल जायेंगी अगले मोर खड़ी वो,
ये सोच के मै मुस्का रहा।

 

-सन्नी कुमार

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