एक ग़लतफ़हमी सी होने लगी थी

एक गलतफहमी सी होने लगी थी,
हवाएं मानों मेरी हर उम्मीद ढोने लगी थी,
ये बदलता मौसम था या उसका हममें होना,
ये इश्क़ था या उसका आदत होना,
तब जमीं को आसमां में उमड़ते बादलों से सैकड़ो आस होने लगी थी,
वहीं मैं उसके इरादों में महफ़ूज होने लगी थी,
वह था बड़ा ही ख़ुशगवार मौसम,
इश्क हमदोनों को हुआ है,
तब ये गलतफहमी सी होने लगी थी….

वह लिखता था नाम मेरे, मैं उसको गाने लगी थी,
मतलब में था वो शायद, मैं उसकी होने लगी थी,
वो दुनिया से लड़ रहा था, मैं सपने सजाने लगी थी,
बड़ी मासूम थी उन दिनों मैं,
उसके वायदों को आयत समझने लगी थी,
वो दिल में बस रहा था और मैं खुद से ही दूर होने लगी थी,
मिल जाएंगे एक रोज हम,
तब ये ग़लतफ़हमी होने लगी थी।
© सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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