ख्वाबों को बुनने दो

image

ख्वाबों को बुनने दो,
ख्यालों को पलने दो,
समेट लेंगे ये चादर में आसमां,
जो इनको उड़ने की आजादी दो।

कलियों को खिलने दो,
बचपन को संवरने दो,
बदलेंगे यही संसार को कल में,
जो इनको आज से सपने दो!

बेमतलब न रोको-टोको इनको,
न समझ की सीमाओं में बांधो,
ये स्वछन्द मन कल संवारेंगे दुनिया,
इनको बस सही लगन लगवा दो।

चुनने दो इनको अपने सपने,
जो मर्जी है बनने दो,
ख्याल रखो इनके ख्यालों का,
और सही गलत का भान करा दो।

ख्वाबों को बुनने दो,
ख्यालों को पलने दो,
समेट लेंगे ये चादर में आसमां,
जो इनको उड़ने की आजादी दो।
-सन्नी कुमार

(credit:- Students of G D Goenka Public School, Gaya)

image

Advertisements

बिहारी हूँ

sunny-kumarबिहारी हूँ,
मेहनत करता हूँ, पर पंजाब में,
फैक्ट्री लगाता हूँ, पर मौरीसस में,
आईएएस, आईपीएस, नेता खूब बनता हूँ,
और जब शांति से जीना हो तो दिल्ली, बंगलौर, मुंबई शिफ्ट करता हूँ..

बिहारी हूँ,
हर साल छठ में अपने घरवालों से मिलने आता हूँ,
उनको मुंबई, गुजरात, दिल्ली की समृद्धि सुनाता हूँ,
मिलता हूँ बिछड़ो से, कोसता हूँ नेताओं को,
फिर छुट्टी ख़तम, ट्रेनों में ठूस-ठूसा कर प्रदेश लौट जाता हूँ..

बिहारी हूँ,
बुद्ध, महावीर, जानकी से लेकर
चाणक्य, मौर्य, अशोक आर्यभट तक पे इतराता हूँ..
पिछड़ गया हूँ प्रकृति पथ पर,
पर राजेन्द्र, दिनकर, जयप्रकाश की बातों से खुद को खूब लुभाता हूँ..

बिहारी हूँ,
पढ़ लिख कर बिहार छोड़ पलायन का राश्ता चुनता हूँ,
राजनीती भी समझता हूँ पर मैं परदेशी वोट गिरा नही पाता हूँ,
ठगा जा रहा हूँ वर्षों से फिर भी जाति मोह से उपर नही उठ पाता हूँ,
खुद कुछ खास कर नही पाया सो अब नेताओं को दोषी बताता हूँ…

बिहारी हूँ,
मैं इतिहास, भविष्य के मध्य वर्तमान को क्यूँ बुझ नहीं पाता हूँ?
-सन्नी

(कवितायें नहीं करता, बस बात रखता हूँ, अपने शब्दों से अपने अंदाज में)

इश्क़ की शाख

ईश्क़ की शाख खतरे में है,
की जमाने से कोई न हीर न कोई रांझा हुआ,
सवार खूब हुए इस कश्ती में,
पर कोई पार न हुआ।।
-सन्नी कुमार
——–+——–+———+———–+——–+———
Ishq ki shaakh khatre mein hai,
Ki jamaane se koi n heer n koi ranjha huaa,
Sawaar khub huye is kashti mein,
Par koi paar n huaa..

आज सच लिखता हूँ…

आज सच लिखता हूँ…

Life iz Amazing

guruक्या कहूँ और क्या लिखूँ,
आज अपनी कविता में..?

शब्दों में सिर्फ फूल लिखूँ,
या कांटो संग कहानी भी?
दिल के जो है जज्बात लिखूँ,
या झेल रही परेशानी भी?
जिंदगी के जश्न और जीत लिखूँ,
या चल रही मन में चिंताएं भी?

आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ,
अपनों में अपनी बाग़ रखता हूँ…

हूँ सीधा सरल एक नौजवान,
कामयाबी की ख्वाहिश रखता हूँ,
दिन भर भटकने के बाद,
मायूस होकर सोता हूँ..
अगली सुबह वापिस से,
सपने सच करने को लड़ता हूँ…

क्या कहूँ और क्या लिखूँ,
मजबूर मन के हालत पे,
आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ..

अपनों में अपनी उलझन रखता हूँ..

जान रहा ये मन है मेरा,
माँ समय आज मांग रही,
पर मुश्किल है बीबी मेरी,
जो साथ आज नहीं दे रही..
नहीं कर पाना इक्षानुसार,
बड़ा रोष बढाता है,
पर एक छोटी सी कोशिश भी,
बड़ा संतोष दिलाता है..

क्या कहूँ और क्या…

View original post 180 more words

बदले लोगों को ढूंढना नही आता

life iz amazingढूंढ लाते हम उनको गर वो खो जाते,
पर बदले लोगों को ढूंढना नही आता..
दिल हो गर मायूश तो मना भी लें,
पर टूटे दिल को मनाना नही आता…

आज फिर बीत गया ‘कल की यादों’ में,
पर गुजरे लम्हों में रुकना नही आता…
वो सारे पल जो बीते, खुशनसीबी के थे,
पर बीते पलों को फिर से जीना नहीं आता..

वो कोरे सारे ख्वाब जो टूटे थे कल,
उनको आंसुओं से धोना नही आता.
दिल माफ़ करे अब उनको न याद करें,
पर दिल पर जोर करना भी हमको नहीं आता..

-सन्नी कुमार

————————————————————————-

Dhundh Laate hum unko gar wo kho jaate,
par badle logo ko dhundhna nahin aata.
dil ho gar mayus to manaa bhi lein,
par toote dil ko manaana nhi aata…

Aaj phir beet gayaa ‘kal ki hi yaadon’ mein,
par gujhre lamhon mein rukna nahi aata,
wo saare pal jo beete khushnaseebi ke the,
par beete palon ko phir se jeena nahi aata..

wo kode saare khwab jo toote the kal,
unko aansuon se dhona nahin aata,
dil maaf karein unko na ab yaad karein,
par dil par jod karna bhi humko nahi aata..

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: