इश्क़ की शाख

ईश्क़ की शाख खतरे में है,
की जमाने से कोई न हीर न कोई रांझा हुआ,
सवार खूब हुए इस कश्ती में,
पर कोई पार न हुआ।।
-सन्नी कुमार
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Ishq ki shaakh khatre mein hai,
Ki jamaane se koi n heer n koi ranjha huaa,
Sawaar khub huye is kashti mein,
Par koi paar n huaa..

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मिलना चाहता हूँ उन आशिक़ो से

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मिलना चाहता हूँ उन आशिक़ो से,
जिनको उनकी आशिकी मिली,
जानू तो सही कुसूर मैं अपना,
की क्यूं मुझे न मौत न जिंदगी मिली।

ईश्क़ को जीते है कैसे पुछूं मैं उनसे,
जिनके हिस्से हो आया मिलन, आज मिलूं मैं उनसे,
जानू तो सही भूल मैं अपना,
की क्यूं मुझे न ख्वाब न हक़ीक़त मिली।।
– सन्नी कुमार
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Milna chahta hoon un ashiqon se,
Jinko unki ashiqui mili,
Jaanu to sahi kusoor mai apna,
Ki kyun mujhe na maut na jindagi mili..

Ishq ko jeete hai kaise, puchu mai unse,
Jinke hisse ho aaya milan, aaj milun mai unse,
Jaanu to sahi mai bhul apna,
Ki kyun mujhe n khwab n haqeeqt mili.

On Seeking, knowing and Loving. On understanding Islam in it’s meaning as a whole.

White Shadows

love_paintings_fecundity “Love is the water of life and a Lover is the soul of fire. The universe turns differently when fire loves water” Forty Rules Of Love.

I need to arrange this mess in my mind. I need to remind myself once again that I should keep walking no matter what.

There was a time when I read Quran with meanings for the first time. I fell in love with the writer. I started relating quranic teachings with events in my everyday life. I’d pray five times and would stay away from everything that Allah forbade me. I started playing according to the rules. Love was the reason.

Then, with time when I encountered life rendering events, when my vision became broader and I inquired about life more closely, I got confused. Literal meanings and rules of Islam and people following them literally filled my mind with contradiction and heart with…

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पोक्सो- बच्चों के लिए कानून

पोक्सो कानून

The REKHA SAHAY Corner!

हमारे देश में बच्चों के लिए कड़े कानून की जरूरत कई बार महसूस की गई। पहले भारत में बाल मुकदमों की प्रक्रिया जटिल और थकाने वाला था। अतः भारत की संसद अधिनियम में 22 मई 2012 को बाल यौन शोषण के खिलाफ बच्चों का संरक्षण कानून पारित किया।
आज विश्व में बच्चों की सब से बड़ी आबादी भारत में है । हमारे देश में लगभग 42 प्रतिशत आबादी अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। अतः बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा महत्वपूर्ण है। ये बच्चे भविष्य की अनमोल निधि है।
यह अधिनियम अठारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाया गया है। यह बच्चों के स्वस्थ, शारीरिक, भावनात्मक , बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने को महत्व देता है। बच्चे के साथ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या दुर्व्यवहार दंडनीय है। इस अधिनियम के तहत कठोर दंड का प्रावधान है ।

बच्चों के साथ हो रहे यौन…

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How Mother Teresa became a saint – Christopher Hitchens

Mothere Teresa in Theory n Practical.

Bharata Bharati

Christopher Hitchens“Mother Teresa was not a friend of the poor. She was a friend of poverty. She said that suffering was a gift from God. She spent her life opposing the only known cure for poverty, which is the empowerment of women. … She was a friend to the worst of the rich, taking misappropriated money from the atrocious Duvalier family in Haiti (whose rule she praised in return) and from Charles Keating of the Lincoln Savings and Loan. Where did that money, and all the other donations, go?” – Christopher Hitchens

I think it was Macaulay who said that the Roman Catholic Church deserved great credit for, and owed its longevity to, its ability to handle and contain fanaticism. This rather oblique compliment belongs to a more serious age. What is so striking about the “beatification” of the woman who styled herself “Mother” Teresa is the abject surrender, on the…

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अन्ना हजारे जी को खुला पत्र

अन्ना हजारे जी,
सादर प्रणाम,
आप स्वस्थ्य है और एक बार फिर से हमारे लिए आन्दोलन करने जा रहे है इसके लिए आपका आभार और शुभकामनायें, उम्मीद है नयी सरकार खासकर मोदी जी आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे और आपके प्रश्नों का, आपके विकल्पों का और आपको साथ लेकर चलने का संभव प्रयास करेंगे.
अन्ना जी हम और हमारे कुछ दोस्त, जो लोकपाल की लड़ाई में आपके साथ थे, और तब हम सब ने गाँधी टोपी पर ‘मै अन्ना हूँ’ लिख कर पूरी एनसीआर को जनलोकपाल की जरूरत को समझाया था किन्तु हम ही आज आपसे जानना चाहते है की जिस लोकपाल के लिए हमलोगों ने कांग्रेस के खिलाफ आन्दोलन किया था, उस लोकपाल का क्या हुआ? अगर लोकपाल आया तो उससे क्या क्या फायदे हुए और अगर नहीं आया, या आपके अनुरूप वाला नहीं आया तो क्यूँ नहीं हम उसी लोकपाल के लिए लड़े?
अभी आप भूमि अधिग्रहण के लिए आन्दोलन करने जा रहे है, क्या ये सही है जबकि आपका पिछला काम अधुरा है, या फिर पूरा होने के बावजूद भी असरदार नहीं? माफ़ कीजियेगा, मैंने लोकपाल को लेकर आये किसी परिवर्तन को अबतक नहीं देखा न ही उनलोगों के जीवन में कोई बदलाव आया जो आपके साथ आन्दोलन में तो थे पर राजनीती के लिए नही। हाँ, आपके मंच के केजरीवाल जी, बेदी जी, सिसोदिया, वीके सिंह सब के दिन अच्छे आ चुके है। अन्ना अगर आपका यह आन्दोलन कोई अगली पार्टी या फिर कुछ नए चेहरे देने जा रहा है तो बताये ताकि एक उद्देश्य विशेस के लिए हमलोग भी काम करे जैसे केजरीवाल, सिसोदिया, किरण बेदी ने किया. बहुत से युवाओं में चाहत है नेता बनने की, और अब तो जिस तरह से आप का आन्दोलन एक मंच बन रहा, लोगों को जेपी की याद भी आने लगी है.
अन्ना जी मेरा उद्देश्य आप पर कटाक्ष या आपका विरोध नहीं है, अपितु मेरे बाबूजी भी किसान है और हम जाती से भूमिहार है जो भू स्वामित्व के लिए ही जाने जाते रहे है, अगर आप हमारी जमीन सरकार से बचा रहे तो बिलकुल हम साथ है पर क्या आप हमें ये बतायेंगे की अगर लोग जमीन न देंगे तो इतने बड़े जन समूह का जरुरत पूरा कहाँ से होगा?
अन्ना जी अच्छा नहीं होता अगर आप जनसख्या वृद्धि को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते एक जागरूकता अभियान चलाते ताकि हमारी जरूरतों पर देर सबेर एक प्रभावकारी लगाम लगता, या फिर किसानों को मनोबल बढ़ाने के लिए, उनके जागरूकता का कोई कार्यक्रम चलाते? अगर बार आन्दोलन की ही करनी है तो आप एक बार आरक्षण पर बहस की जरुरत क्यूँ नहीं बताते, या फिर एक देश में अलग कानून की क्यूँ जरुरत पर क्यूँ नहीं बात करते?
अन्नाजी मुझे बड़ा जूनून था बदलाव का हिस्सा बनना पर चीजें बदली भी तो हमारे हिस्से नहीं आये उस बदलाव का मतलब हमें नहीं समझ आया, आप समझाए बुजुर्ग है बताएं की हम आपका साथ क्यूँ दे? भूमि अधिग्रहण से देश को आप कैसे फायदा दिलवाएंगे और जी बिलकुल आपके जनलोकपाल का क्या हुआ ये भी बताइयेगा.
पूछने को बहुत कुछ है पर आप या आपके सहयोगी तक मेरी बार पहुँच रही है तो बताइयेगा जरुर की आपका विरोध किस बात को लेकर होता है, और पिछली बार के आन्दोलन पर आपको क्या कहना है?

धन्यवाद
इश्वर आपको अच्छा स्वास्थ्य दे.
सन्नी कुमार
sunnymca.wordpress.com

[आप इस पोस्ट को शेयर करें और मेरी बात अन्ना जी तक पहुंचाए. शुक्रिया]

अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस

मातृभाषा, जिससे हमारी पहचान बुनती है, जिसमे हमारी सोच पलती है, जिसमे भावनाओं को सहेजने के लिए आपको सिमटना नही परता, प्रार्थना के बोल जिससे गढ़ते है, जन्म से ही हम जिसमें पलते है उस भाषा का हो सम्मान, बढ़ती रहे हमारी आपकी पहचान।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस(21 फरवरी) की शुभकामनाएं आप सब को।
जय हिन्दी।

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Matribhasha, jisase humari pehchan bunati hai, jisme humari soch palati hai, jisme bhavnaon ko sahejne ke liye aapko simatnaa nhi padta, jisase prarthnaon ke bol gadhte hai, janm se hi hum jisme palte hai, us bhasha ko ho samman, badhti rahe humaari aapki pehchan.
Antarrashtriy matribhasa divas(21 february) ki shubhkamnayein aap sab ko.
Jai Hindi

मांझीनामा

cutitaमांझी को किस सूरतेहाल में बिहार पर थोपा गया, और क्यूँ हटाया गया यह एक लम्बी बहस का विषय है पर आज जब जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है तो थोड़ी बहुत ख़ुशी है की कल से अख़बार के पन्नों में हमारे राज्य के मुख्यमंत्री से सुतियापा सुनने को नहीं मिलेगा. मेरे इस पोस्ट में मांझी के कुछ विवादित बयानों का जिक्र कर रहा हूँ जो साबित करता है की बिहार की राजनीती, राजनेता और संभवतः बिहार भी अभी बीमार है जो ऐसे नेता चुनता है.  आइये एक नजर डालते है जीतन राम मांझी के कुछ बयानों पर

  • चूहा मारकर खाने में कुछ भी गलत नहीं है। (30 अगस्त 2014)
  • शाम को काम के बाद अगर लोग दारू पीकर सो जाएं, तो मैं उसे बुरा नहीं मानता पीना ही है तो शराब को दवा के रूप में थोड़ी-थोड़ी पियो, क्योंकि नशे के कारण महादलित लोग न तो अपने बच्चों का ध्यान रख पाते हैं, न ही जीवन को बेहतर कर पाते हैं। (8 सितंबर, 2014)
  • अस्पताल में इलाज में कोताही बरतने वाले डॉक्टरों का नाम लिखकर मेरे पास भेजें, उन्हें हम घर बैठा देंगे। गरीबों के साथ नाइंसाफी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके इलाज में लापरवाही हुई तो डॉक्टरों के हाथ काट लिए जाएंगे। (18 अक्टूबर, 2014)
  • अगड़ी जाति के लोग विदेशी और आर्यों की संतान हैं, जो विदेश से यहां आए हैं। देश के मूल निवासी दलित और आदिवासी वर्ग के लोग हैं। (11 नवंबर, 2014)
  • बिहार के जवान आदमी काम की तलाश में राज्य से बाहर चले जाते थे और साल भर बाद आते थे। ऐसे में आपकी पत्नी यहां घर पर क्या करती थी, यह सोचने की बात है। (14 नवम्बर 2014)
  • जब वो मंत्री थे, तो उनके पास एक जाति विशेष की शिकायत लेकर एक महिला आई, लेकिन उन्होंने उसकी मदद सिर्फ इसलिए नहीं की, क्योंकि उस क्षेत्र में उस जाति के महज 50 हजार वोट ही थे। (17 नवम्बर 2017)
  • मोदी सरकार में शामिल बिहार के 7 मंत्रियों को वे बिहार में घुसने नहीं देंगे। राज्य की जरूरत के मुताबिक मदद नहीं मिली तो बिहार में उनका आना मुश्किल कर देंगे। (20 नवंबर, 2014)
  • जब मैं राजनीति में आया तो मुझे ठुकराया गया। इस वजह से सीएम बन गया। अब और ठुकराएंगे तो पीएम बन जाऊंगा।(3 दिसंबर, 2014)
  • नक्सली क्या गलत कहते और करते हैं। मैं उनके साथ हूं। मानता हूं कि ठेकेदारों ने लूट मचा रखी हैं। ऐसे ठेकेदारों से लेवी वसूलना कहीं से गलत नहीं है। क्या माओवादी विदेशी हैं। माओवादी बन गए लोग भी हमारे समाज के ही हैं। उन्हें मुख्यधारा में लाया जा सकता है; लेकिन बंदूक से नहीं, बल्कि विकास के जरिए। (5 जनवरी, 2015)

Avichal : अविचल

अविचल

Bhav-Abhivykti

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है जग वालों का काम यही, वो उर में संशय भर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

तम घोर निशा के नैराश्य में, पथ ना दिखाई देगा फ़िर,

स्वरों के प्रचण्ड प्रभंजन में, कुछ ना सुनाई देगा फ़िर |

विपदा तडित और गर्जन भी, पल-पल तुझको डर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

संशय, दुविधा के सागर में, डगमग निर्णय नैया डोलेगी,

घोर असमंजश की उठ उठ लहरें, तेरे साहस को तौलेगी |

संकट के चक्रावातों को बस, तेरे धैर्य, शौर्य ही उत्तर देंगे,

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित कर देंगे ||

अड़चन गिरी सी आकर सन्मुख, पथ तेरा अवरुद्ध करेगी,

अथाह गर्त की गहराई सी, नाकामी अतिशय क्षुब्ध करेगी |

अवसरवादी प्रतिकूल तेरे हो, अपने और मुखुर स्वर देंगे |

मत भूल पथों के शूल तुझे, पग पग विचलित…

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