तेरे क़िस्सों का किरदार न हो जाऊं तो कहना

मुँह आज मुझसे मोड़ते हो, क्यों ध्यान नहीं देते हो,
क्या है कमी आज मुझमें, जो मुझसे नज़रें चुराते फिरते हो..
यह लत लगी है कैसी, क्या औरों में ढूंढते हो,
है धन-मान-विचार जो मानक तुम कहो कितना ठहरते हो?

हूँ मैं आज तक अधूरा पर कल से ज्यादा हूँ भरा,
कर दो ख़ारिज आज भले, कल तुम्हें मुझको है मनाना,

और फिर

वक़्त बदलते ही ये नजरें न झुक जाए तो कहना,
मेरे विचार सुनने को एक रोज़ न तरस जाओ तो कहना,
थोड़े समतल में हूँ इन दिनों सो जायज़ भी है ये तुम्हारा रूखापन,
कल छोड़ तुम्हे इसी भीड़ में, मैं छू न जाऊं शिखर तो कहना,
वक़्त बदलते ही तेरे क़िस्सों का किरदार न हो जाऊं तो कहना।
©सन्नी कुमार अद्विक

तुम सबसे अच्छे हो..

Me n Smile(Sonu)

दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे अच्छे हो..
इस झूठ की दुनिया में,
सबसे सच्चे हो..

रखा करो ख्याल तुम अपना,
सबके प्यारे हो..
दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे सीधे हो…

बेस्ट feature ये तुम्हारा,
की सरल, सहज तुम हो…
Drawbacks कुछ खास नहीं,
but थोड़े selfish हो…

स्टाइल है ठीक तुम्हारा,
Behaviour तो है तगड़ा..
गुस्से में तुम क्यूट हो लगते,
Smile का कहना ही क्या. :))

आँखों में maybe है जादू,
लाब्जो में तो sure मिठास..
इन्ही सब reasons के कारण,
दुनिया में तुम सबके खास..

भाती है हर चीज तुम्हारी,
चाहे वो हो बाते तेरा,
या हो तेरा गुस्सा.
तेरे खूबियों की चर्चा,
हर कोई है करता..

तेरे ही बाते करते थे,
मिलकर सबसे अक्सर.
बातें तो बातें होती है,
कभी अच्छी,
कभी बहुत ही अच्छी..

बातो से कुछ बाते आयी,
गुजरे पलों की याद दिलाई.
जब हम सडको पे walk किया करते the,
बेवजह की हम सब talk किया करते थे…

उन बातों में अक्सर हम,
एक दूजे को pin किया करते थे.
हमारे आने का शायद,
सड़के भी wait किया करती थी.

इन्ही समय में घरवाले भी,
interrupt किया करते थे.
गुड बॉय follow order करता था
और baddy करता था sustain…

छोटी शाम गुजर जाती थी,
मानो कुछ पल भर में.
और समय हो जाता था,
दुनिया की दी टेंशन सुलझाने का..

शाम की क्रिकेट जो याद हो तुमको,
फिर याद होगा तुम्हे, sure selection…
कुछ लोगो से न बनती थी मेरी,
पर तेरे सब थे वहां भी fan..

दोस्त मेरे तुम दुनिया में,
सबसे अच्छे हो..
इस झूठ की दुनिया में,
सबसे सच्चे हो..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

वो पल अब भी है साथ..

वक़्त भले बीत गया,
पर वो पल अब भी है साथ|
होता था जब साथ हमारा,
सूर्योदय-सूर्यास्त…

सुबह की पहली धुप जब,
सेकते थे हम सब साथ|
हलकी-फुल्की योगा या फिर,
करते थे कुछ कसरत खास ..

था मौसम गर्मी का वो,
पर छुट्टी से तो सबको प्यार,
गर्मी की उन छुट्टियों में,
क्रिकेट का था चढ़ा बुखार..

सुबह की पहली किरणों संग ही,
लहरा देते थे बल्ला यार,
जो जीत गए सुबह की मैचें,
दिन भर करते थे आराम..

जब सुबहें हार दिखाती थी,
करते शाम का इन्तेजार,
और शाम की जीत के साथ,
सुबह को हम भूलते थे..

जो भी हो उन खेल का पर
वो पल अब भी साथ..
खेलो में यारो के नखरे,
नहीं कोई नयी बात..

उन सुबहों की ताजगी,
ताजा करती मुझे आज भी..
सूरज को जब देखता हूँ,
वही स्फूर्ति फिर पाता हूँ..

वक़्त भले बीत गया,
पर वो पल अब भी है साथ|
होता था जब साथ हमारा,
सूर्योदय-सूर्यास्त…

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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