इन आँखों को नम होने दूं न अभी

इन आँखों को नम होने दूं न अभी,
सफर में कई मोड़ आने बाक़ी है अभी,
सजा रहा हूँ तुम्हारे यादों को दिल में,
बस जुदाई मिली है, जिन्दा हूँ मैं अभी।

तुमसे बिछड़ कर एक पेड़ बनूंगा,
रास्ता मैं तुम्हारा रोज तकूँगा,
जिस रोज भी लौटी इस राह से तूम,
है वादा तुमको मैं बेहतर ही मिलूंगा।

तुम संग जो झूमती-गाती थी शामें,
वो जो महफ़िल थी उसे मुरझाने न दूंगा
वो चांद जो हमारा इन्तेजार था करता,
उससे तुम्हारी ही मैं बातें करूँगा।

याद आये तुमको जब भी मेरी,
मुस्कुराकर भुलाना हर शरारत मेरी,
है जिंदगी के दामन में कई और भी पन्ने,
होगा निश्चय ही मिलन उनमें हमारा कहीं।

इन आँखों को नम होने दूं न अभी,
सफर में कई मोड़ आने बाक़ी है अभी,
सजा रहा हूँ तुम्हारे यादों को दिल में,
बस जुदाई मिली है, जिन्दा हूँ मैं अभी।
©सन्नी कुमार

All words are for you my dear adorable khushboo Ma’am, but feelings are of multiple people. I have penned on behalf of all of them who are kanjus with words 😜. We all will always miss you mam.

Thank You and The Supreme Krishna. Love!

Advertisements

हरकत काफिराना कर आया..

IMG-20170904-WA0019दुआओं में था फिर भी मैं एक खता कर आया,
जिक्र फिर से महबूब का कर, खुदा को शायद खफा कर आया,
मासूम था मैं फिर भी गुनाह-ए-अजीम कर आया,
खफा हो खुदा तो दो पल को है मंजूर,
पर ना खफा हो कभी मेरा महबूब,
ऐसा उस रहम-दिल खुदा से मिन्नतें कर आया,
काफिर हूँ यारों, फिर से हरकत काफिराना कर आया,
उसके दर पर उससे बातों में जिक्र सिर्फ महबूब का कर आया।
सन्नी कुमार
May v all always b blessed. May d supreme showers more n more love peace n prosperity in all of yours life.

तारीफें उनकी हो..

tarif2तारीफें उनकी हो जिन्होंने भाव बख्शे दिल को थे,
तारीफें उनकी हो जो मिलकर ख्वाब बुनते अक्सर थे,
हम थे क्या बस एक जिन्दा दिल, जो धड़कना जानता था,
हम थे क्या बस जागे नयन, जो ख्वाबों को जीना जानता था.

तारीफें उन एहसासों की जो कागज़ पर उकड़ना थी जानती,
तारीफें उनके काजल की जो स्याही में बदलना थी जानती,
हम थे क्या बस एक चंचल कलम जो अलफ़ाज़ सजाना जानता,
तारीफें हो इश्क की जो बिन पंखों के उड़ना सीखाना जानता.
-सन्नी कुमार
——————————————————————-

Taarifein unki ho jinhone bhaaw bakhse dil ko the,
Taarifein unki ho jo milkar khwab bunte aksar the,
hum the kya bus ek jinda dil, jo dhadkna jaanta tha,
hum the kya bus jaage nayan, jo khwabon ko jeena janta tha..

taarifein un ehsaason ki ji kaagaj par utarana thi janti,
taaifein unke kaajal ki jo syahi mein badalna thi jaanti,
hum the kya bus ek chanchal kalam jo alfaaaz sajaana jaanta,
taarifein ho ishq ki jo bin pankhon ke udna seekhaana jaanta.
-Sunny Kumar

Doha (Two Liners)

Prasu-Kuchipudi (33)कहते है किसी के चले जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होती,
पर क्या साँसों का चलना भर ही जिंदगी है?

[Khate hai kisi ke chale jaane se jindagi khatm nahi hoti,
Par kya sanso ka chalna hi jindagi hai?]

इश्क दुआ है, इश्क नशा है,
इश्क है सांस और इश्क ही हवा है..
 
[Ishq duwaa hai, Ishq nashaa hai,
Ishq hai saans aur ishq hi hawaa hai…]

वो लोग, जो कल तक हमारे लिये दुआएं करते थे,
वही आज तुम्हें भुलाने की सलाह देते है..
[Wo log, Jo kal tak humaare liye duaayein karte the,
wahi aaj tumhein bhul jaane ki salaah dete hai..]

 

हर ख्वाब पूरा नहीं होता,
पर ख्वाब में कुछ भी अधुरा नहीं होता..
[Har khwab pura nahi hota,
par khwab mein kuchh bhi adhura nahi hota..]

मिले फिर वही जो कल भी मिले थे,
पर मिलें इस कदर कि वो बिलकुल नए थे..
[mile phir wahi jo kal bhi mile the,
par mile is kadar ki wo bilkul naye the..]

घुटता है दिल, कुछ कह भी नहीं पाता,
छोड़ गया मेरा कल, आज अब हंस भी नहीं पाता..
[ghutata hai dil, kuchh kah bhi nahi paata,
chhor gayaa mera kal, aaj ab hans bhi nahi paata]

क्या हस्ती है तुम्हारी..
मुहब्बत हम  कर नहीं सकते और नफरत तुम करने नहीं देती..
[Kya hasti hai tumhari..
Muhabbat hum kar nahin sakte aur nafrat tum karne nahin deti..]

अब और नहीं तड़पाओ,
अब और न हमको सताओ,
मै दूर तुमसे चला जाऊं,
आखिरी बार तो मिलने आओ.

[Ab aur nahin tadpaao,
ab aur na humko sataao,
mai door tumse chalaa jaaun,
aakhiri baar to milne aao]

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: