आज तुम बिन खुद को खोया हूँ..

{For you my best unseen friend over internet}

खोया था कल तक तुझमे, आज तुम बिन खुद को खोया हूँ..
कभी हर पल थे तुम साथ मेरे, आज मुलाक़ात कि खातिर तरसा हूँ..

ये सच है कि, तेरे होने से ही मेरी हंसी थी, मुश्किलों में भी मुस्कुराने की परी थी,
नहीं लगता था कल तक कुछ भी बुरा, ये जहाँ जन्नत से भी बड़ी थी..

तुम्हारा बिछड़ने को जादू कहना, बेवकूफ को बड़ा लुभाता था,
“हद है” कि तो पूछो मत, उसपे ये दोस्त जान लुटाता था..

इन्तेजार कि बोरियत को भी, संजीदगी से बिताता था,
चाह के भी नाराज़ न हो पाना, कभी कभी सताता था

तुम्हारा करना ख्याल मेरा, मुझको बड़ा लुभाता था,
मुझपे जो था विस्वास तेरा, उसने ही दोस्त बनाया था..

सोचा कई बार इस दिल ने कि क्यूँ कभी ख्वाब में तुम मिली नहीं,
याद आया फिर कि हकीकत कभी ख्वाब में मिलते नहीं…

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

आ जाओ मिलने इक बार सही…

sunny_kumar_Poemइससे पहली की टूट के बिखर जाऊं,
बिन कहे ही मै, चुप हो जाऊ,
आ जाओ मिलने इस दोस्त से,
कि शायद फिर मै संभल जाऊं..

उलझा हूँ आज क्यूँ, किसको सुनाऊ,
क्या गुज़री है दिल पे, किसको बताऊँ,
आ जाओ मिलने इक बार सही,
की शायद आगे न मिल पाऊं..

बिछड़े हो तुम जबसे, रूठा है दिल मुझसे.
तेरी यादों के सहारे ही, जीता था मै तबसे.
इससे पहले की ये जिंदगी, बिछड़ जाए मुझसे.
किसी बहाने आ जाओ, तुम मुझसे मिलने..

नहीं मांगता मै, गुज़रा ज़माना.
न उन वादों को निभाने का, जोर देता हूँ..
आ जाओ मिलने इस बीते कल से,
मै टूटा आज, ये ख्वाहिश रखता हूँ..

इससे पहली की टूट के बिखर जाऊं,
बिन कहे ही मै, चुप हो जाऊ,
आ जाओ मिलने इस दोस्त से,
कि शायद फिर मै संभल जाऊं..

-सन्नी कुमार
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Isase pahle ki toot ke bikhad jaaun,
Bin kahe hi mai chup ho jaaun,
aa jaao milne is dost se,
ki shayad phir mai sambhal jaaun..

Uljha hu kyun aaj kisko sunaaun,
Beeti hai kya dil pe kisko bataaun,
aa jaao milne ek baar sahi,
ki aage shayad mai n mil paaun..

Bichhade ho tum jabse, rutha hai dil mujhse,
Teri yaadon ke hi sahaare jeeta tha mai tabse,
Isase pahle ki ye jindagi bichhad jaaye mujhse,
Kisi bahaane tum aa jaao mujhse milne..

Nahin mangta mai gujra jamaana,
na un waadon ko nibhane ka jod deta hun,
aa jaao milne is beete kal se,
mai toota aaj ye khwahish rakhta hun..

Isase pahle ki toot ke bikhad jaaun,
Bin kahe hi mai chup ho jaaun,
aa jaao milne is dost se,
ki shayad phir mai sambhal jaaun..

एक नयी दुनिया को पाता है..

आशाओं के पंख लगाकर,

आशाओं के पंख लगाकर,
जब आसमान में उड़ता है ,
नई सोच के सहारे,
एक नयी दुनिया को पाता है..

तरक्की हर ओर जहाँ है,
और न कोई तकरार है..
लोगो में सद्भाव जहा है,
और बनी हुई, समता है..

मत भिन्नता है जहाँ,
पर न कोई मतभेद है..
हर कोई जहा जीता है खुद को,
ऐसा स्वछन्द समाज है…

बुराईयाँ तो यहाँ भी है,
पर उससे बड़ी अच्छाई है.
झूठ पहुचां यहाँ भी है,
पर उससे बड़ी सच्चाई है….

आशाओं के पंख लगाकर,
जब आसमान में उड़ता है मन,
नई सोच के सहारे,
एक नयी दुनिया को पाता है..

-सन्नी कुमार
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