कुछ कदमों तक साथ तो दो..

Another poem by me, written for a very special friend whom i meet over Internet in 2012. Enjoy Reading!!
मत आना साथ मंजिल तक, पर कुछ क़दमों तक साथ तो दो..
मत सजाना मेरी दुनियां तुम, पर एक मीठा याद तो दो..
मत मिलना तुम हकीकत में, पर अपने हसीं ख्वाब तो दो..
मत दो मुझे कोई गम, पर जो भी है तुम्हारे वो बाँट तो लो।

दो पल तेरे साथ चलने से चलना सीख लूँगा, यकीं है..
तेरी यादों से अपनी दुनिया रंगीन कर लूँगा, यकीं है..
ख्वाब तुम्हारे हो तो जिंदगी यूँ ही हसीं हो जायेगी, यकीं है..
तेरे गम बाँट के ही अब मै खुश रहूँगा, यकीं है।

न करो तुम कोई वादा, पर इन्तेजार का हक तो दो..
मत आओ मेरे ख्वाब में, पर उन्हें देखने का हक तो दो..
मत हंसो तुम मेरी बातों से, पर अपने आंसू बाँट तो लो..
मत उलझो मेरी बातों में, पर ये जो भी है उसे सुलझाने का मौक़ा तो दो।

तेरे इन्तेजार में भी जी लूँगा, यकीं है..
तेरे ख्वाबों से हकीकत में रंग बिखेरूँगा, यकीं है..
तेरे आंसुओं को बाँट ही खुश रहूँगा, यकीं है..
तेरी उलझनों को एक दिन सुलझा लूँगा, यकीं है।

मत बांटो तुम हमसे अपने गुजरे हुए दिन, पर खोयी मुस्कराहट का कारण तो दो..
मत सुनो तुम अपने दिल की बात, पर इस दिल में है क्या वो बता तो दो..
दुनिया आपकी दीवानी हो जायेगी, पहुँचने का उनको बस पता तो दो..
होंगी हर ख्वाहिश पूरी, अपनी हसरतों को तुम पंख तो दो।

तेरे मुस्कुरा देने भर से गुल खिल जाएगा, यकीं है..
दिल के सारे अरमान पूरे हों जायेंगे, यकीं है..
खुशियाँ भी अब आपका पता पूछेंगी, यकीं है..
तुम हंस के फिजा में फिर से रंग बिखेरोगी, यकीं है।

-सन्नी कुमार

https://sunnymca.wordpress.com/2012/11/07

सूना है सावन आनेवाला है

sunny-kumarतपिश, तड़पन का दौर है बीत गया,
की दिन मिलन का आनेवाला है,
धरती को फिर से सींचने,
सुना है सावन आने वाला है..
-सन्नी कुमार

Tapish, tadpan ka daur hai beet gya,
Ki din milan ka aanewala hai,
Dharti ko phir se sinchne,
Suna hai saawan aanewala hai…

ख़्वाबों की जरूरत और नहीं..

Missing Herआँखों पे सितम अब और नहीं,
इस दिल पे जुलम अब और नहीं,
जो देखे थे ख्वाब, वो टूट गए,
अब ख़्वाबों की जरूरत और नहीं।।

मौसम था वो मेरा प्यार नहीं,
जो बदला है मेरा यार नहीं,
है बोल मेरे होठों पे उसके,
पर दिल से दिल का मेल नहीं।।

Usne Aise Khwab Kyun Diye Hai..

Magical Bujji

Magical Bujji

हर बात में उसी की बात है,
कि उसने इतने याद क्यूँ दिये है।
आँखों में नींद नहीं है,
कि उसने ऐसे ख्वाब क्यूँ दिये है।

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Har baat mein usi ki baat hai,
ki usne itne yaad kyun diye hai..
Aankhon mein nind nahi hai,
ki usne aise khwab kyun deeye hai..

वो थे सबसे सुनहरे पल..

Miss uuतुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

जब सपनों में तुम थी,
और सामने भी तुम..
जब जिक्र में तुम थी,
जज्बात में भी तुम..
हाँ थे वो सुनहरे पल,
जब पास में तुम थी,
और प्यास भी तुम..

तब मुझमें “मैं” कहाँ था,
बस जी रही थी तुम..
तब मेरा ये जहाँ था,
जब साथ में थी तुम..
जी रहा था जन्नत को जमीं पे,
परी बनके मिली थी तुम..

तुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

सुबह के धुप में तुम थी,
रात अधेरों में भी तुम..
मेरे अश्कों में तुम थी,
और आशिकी में भी तुम..
दर्द तुमसे था,
दीवानगी में भी तुम..
जी रहा था ख्वाबों को,
जब साथ में थी तुम..

पर जिंदगी अब वो नहीं है,
ना ही साथ में हो तुम..
न दुनिया ख्वाबों की रही,
न चाहत में हो तुम..
दोष किसका दूँ, कहो?
समझाऊं खुद को क्या मैं अब,
कहूँ, दिल था कमजोर मेरा,
या भरोसा तुमको मुझपे कम..
तुम ही बता दो क्या कहूँ,
क्यूँ रूठा मुझसे मेरा कल..?

दीदार हुआ आंखो को उनका..

Cutieeeदीदार हुआ आंखो को उनका,
और दिल ये, उनका हो गया.
उनकी मासुम सुरत पे
फिदा ये मेरा मन हुआ.

आता हर पल ख्याल है उनका
जो मिलती है बस सपने
जिनसे कभी बाते की नही पर,
जिनके चर्चे करता हूँ अकसर.

वो मिले कभी इसे दीवने से,
दिल कि ये एक चाहत है,
सुन ले वो इस दिल की धरकन,
इस दिल की बस एक मन्नत है.

ख्यालो मे उनके खोने लग़े है,
उनके यादो मे अ‍ब तो जीने ळ्गे है.
कभी तो मीलेंगे उससे,
यही सोच अ‍ब तो जीने ळ्गे है..

– सन्नी कुमार

गूंज रही है अब भी वो आवाज़..

Veer-Sweettiiee
गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

मीठी मिश्री सी होगी उनकी आवाज़,
कभी बिन सुने ही सबको बताया था,
हाँ बिलकुल वो मेरे ख्वाबों सी है,
हमने जो कभी फ़रमाया था।

कायल था उनकी सीरत का अबतक,
आज, आवाज़ ने चाहत बढाई है,
सुनता रहूँ अब उनको हर पल में,
हमने यह एहसास जताया है।

ठहरे न पाँव जमीं पे आज,
उसने, ख्वाबों को पंख लगाया है,
जो हसरत उनको सुनने की थी,
हमने उनको हकीकत बनाया है।

गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

हाँ पर गए थे कल शब्द कम,
और समय बड़ी जल्दी में था,
रुका नहीं वो क्यूँ साथ हमारे,
हमें और बहुत कुछ कहना था।

अभी तो उनके हाल सुने थे,
फिर मिलना उनके सपनों से था,
हकीकत क्यूँ ख्वाब के रस्ते आयी,
हमें उन पलों को, और अभी जीना था।

जिनकी आस में हम थे कबसे,
उन लम्हों ने कल गले लगाया था,
है शब्द मेरे से उनके होठों पे,
हमें कल भी ये एहसास हुआ था।

गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

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Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

Meethi Mishari si hogi unki awaaj,
Kabhi bin sune hi sabko bataaya tha,
Haan bilkul wo mere khwabon si hai,
humne Jo kabhi farmaaya tha..

kaayal tha unki seerat ka abtak,
aaj unki aawaj ne chahat badhaayi hai,
Sunta rahun unko har pal mein,
Humne yeh ehsaas jataaya hai..

Thahre na paanv jamin pe aaj,
usne, khwabon ko pankh lagayaa hai,
jo hasrat unko sunane ki thi,
humne unko haqeeqat banaaya hai..

Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

Haan par gaye the kal shabd kam,
aur samay badi jaldi mein tha,
Ruka nahi wo kyu saath humaare,
Humein aur bahut kuchh kahna tha..

abhi to unke haal sune the,
fir milna unke sapno se tha,
haqeeqat kyun khwaab ke raste aayee,
Humein un palon ko, aur abhi jeena tha..

Jinki aas mein hum the baithe kab se,
Un lamhon ne kal gale lagaaya tha,
hai shabd mere se unke hothon pe,
Humein kal bhi ye ehsaas huaa tha..

Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

– Sunny Kumar