आईना और मैं

क्यूं संवरती हो उस आईना को देखकर,
संवरा करो तुम इन आँखों में झांककर,
आइना जिससे मिले उसी का हो जाता है,
और ये आँखें है जो सिर्फ तुमको बसाता है..
-सन्नी कुमार

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बस मुस्कुरा देता हूं…

तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
-सन्नी कुमार

​एक प्रेमपत्र भी भेजो न!


तुम्हारे त्वरित सन्देशों से,
मैं खूब प्रफुल्लित होता हूँ,
प्रेम रस में डूबा चैटिंग,
जिसे बार बार मैं पढता हूँ,
दिख जाओ जो ऑनलाइन तुम,
झट से कुछ नया भेजता हूँ,
और जो मिल जाए फौरन जवाब मुझे,
दिल गुब्बारा हो मैं उड़ता हूँ।

दिल है दिल ये मांगे ‘ऑल’,
सो शुरू किया है वीडियो कॉल,
अब तुम्हारी प्यारी सूरत से मैं,
सुबह अपना चमकाता हूँ,
चांदनी रात में बाहर तुमसे,
घण्टो तक बतियाता हूँ..

तुम लिखती हो, मैं पढता हूँ,
तुम बोलती हो, मैं सुनता हूँ,
तुम हंसती हो, मैं खिलता हूँ,
पर तुम्हारे छुअन की हसरत,
दिल में ही रह जाती है,
महक तुम्हारे महसूस करूँ मैं
हसरत अधूरी रह जाती है..

सोंचता हूं कैसे पा लूं ये सब,
जवाब मिलता है,
तुम एक प्रेम पत्र भी भेजो न!

-सन्नी कुमार

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