जंगल ही है

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जंगल ही है,
भावों का शहर नहीं,
कंक्रीट के ढेर है,
कहीं छाया नहीं,
वहाँ कटते है सीधे पेड़  पहले,
यहाँ सीधे लोग सही,
जंगल ही है……..
-सन्नी कुमार

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जी. डी. गोएनका गया के बच्चो ने लहराया परचम

24059096_1920186667996017_7721139294086004020_nरसलपुर : गया-पटना मुख्य पथ पर अवस्थित जी०. डी० गोएंका पब्लिक स्कूल के बच्चो ने एक बार फिर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए अपने विद्यालय और शहर का सम्मान बढ़ाया । NIIT द्वारा आयोजित इस सत्र के सबसे बड़े आई टी इवेंट “आई टी फेस्ट-2017” जिसमे राज्य के विभिन्न विद्यालयों से चयनित छात्रों के बीच आई टी क्विज प्रतियोगिता प्रतियोगिता कराई गई थी , प्रतियोगिता ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल में हुआ जहाँ राज्य के विभिन्न शहरों से चयनित दस सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के बीच दो चरण में प्रतियोगिता कराया गया , जिसमे विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक सन्नी कुमार के नेतृत्व में आंठवी की छात्रा गीतांजली कुमारी, सातवी के छात्र आदित्य मेहता एवम रोनिल सिंह ने भाग लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए प्रतियोगिता में रनर अप ट्रॉफी सुरक्षित किया । बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती निधि जोशी ने सफल छात्रों को बधाई देते हुए सभी छात्रों को और लगन के साथ अध्ययन में और रूचि लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि छात्रों का परिश्रम ही उनके समाज और देश को भविष्य में उज्जवल बनाएगा ।छात्र ये ना समझे कि वो सिर्फ खुद के लिए पढ़ते है ,उनकी सफलता से उनका परिवार , विद्यालय और शहर भी गौरान्वित होता है अतः विद्यार्थियों को अपने पढाई को लेकर गंभीर होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हज़ारो सफलता उन्हें मिले। इस कार्यक्रम का सञ्चालन NIIT पदाधिकारी अमित कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ जहाँ आरा समेत राज्य के कई गणमान्य उपस्थित थे ।

 

होना तुम्हारा

बहुत खास है मेरे लिए,
होना तुम्हारा..
खिलते है जिन ख्वाबों से,
उनमें है आना तुम्हारा.
हूँ हर्षित जिस हकीकत से,
उनमें है जीना तुम्हारा..

लोग पढ़ते है जिसको जान के कविता,
उनमें है बस जिक्र तुम्हारा.
जिंदगी और इसकी कहानी,
है दोनों ही अधूरी,
गर न मिलें इनको साथ तुम्हारा…
-सन्नी कुमार

अपने पराए हो गए

कुछ ख्वाब हकीकत हो गए,
और कुछ हकीकत ख्वाब हो गए,
जिंदगी ने ली कुछ करवट ऐसी,
कि कुछ पराए अपने हो गए,
और कुछ अपने पराए हो गए।
-सन्नी कुमार

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