लीजेंड बाबा और श्री श्री के खट्टे मीठे संवाद

वैसे तो मीटिंग्स कई हुई थी लीजेंड बाबा के साथ पर यह वाला श्री श्री(रविशंकर नहीं) को हमेशा याद रहेगा, कारण शायद इसका आखिरी हो जाना है। अब आगे उसी मीटिंग के कुछ खट्टे मीठे अंश है जहाँ लीजेंड बाबा श्री श्री से कहते है कि चैनल काहे छोड़ रहे हो, कौनो दिक्कत है तो बताओ? अब दिक्कत ऐसा कुछ था नहीं, श्री श्री चैनल के मुख्य प्रवक्ता और उनके बकलोल अनुयायियों से दुखी थे, प्राइमटाइम पर एकाधिकार और उनके कार्यक्रमों के इतर के फ़िजूल कार्यों से आहत थे और अब जब एक दूसरे चैनल का अवसर मिल गया था तो वो जाना चाह रहे थे। उन्होंने आधा बात हटा के नए अवसर वाली बात बता दी, शायद मन मे था कि जाते जाते काहे किसी का मन खट्टा करे, करके भी क्या कर लेते, फेविकोल का ऐड देखे थे कि दो हाथी का पूँछ हटाना किसी गोंद के वश में नही!
ख़ैर लीजेंड बाबा तो लीजेंड ठहरे, ऐसे कैसे इस सस्ते प्रवचनकर्ता को छोड़ते तो मीटिंग बुलाई, अजनबी तीसरे को भी रखा और फिर बोले साथे रहोगे तो बढ़िया करोगे, और फिर एक पंचवर्षीय योजना में श्री श्री के होते जीर्णोद्धार का प्रोजेक्ट भी दिखाया, और फिर यह भी जोड़ा कि हमारे ड्राइवर कमलनाथ(मध्यप्रदेश वाला नहीं) की ही तरक्की देख लो, और फिर वहीं मीटिंग हॉल में तीसरा व्यक्ति(ये तीसरा हमेशा क्यूटिया ही होता है) उनके बात के साथ अपना वीटो स्टैम्प लगा दे रहा था। मन मे था कि लीजेंड बाबा ऐसे भक्तों से ही तो बने है फिर वो बोले कि देखो कमलनाथ को ये दे रहे, वो दे रहे, उसकी इतनी पगार है, जब पगार और अन्य सुविधा सुना तो कमलनाथ, जो वजन में भले दोगुना और कद में पौना है पर पगार के मामले में हमसे तिगुना.. अब श्री श्री घोर संशय में कि टीम लीजेंड में प्रवचन करने से अच्छा ड्राइवर होना होता पर फिर यह उतना आसान भी नहीं था…शौक का ज़िक्र यहाँ नहीं!
खैर उस रोज़ बात बनी नहीं और लीजेंड बाबा बोले कि अभी इंतजार करो, प्राइमटाइम में एक बार फिर से प्रख्यात प्रमुख प्रवचनकर्ता जी के साथ मंथन करके बुलाता हूँ..श्री श्री भी बेशब्री से दंगल का इंतजार करने लगे, एक से बढ़कर एक आरोप लगे, सब तय था मीडिया ट्रायल की अच्छी बात ये होती है कि वहाँ गवाह और सबूत नहीं चाहिए, श्री श्री को सजा का सर्वोच्च स्तर पता था, वह दंगल से वो सब लेकर आ गए जो सब लीजेंड और देवीजी के पास था..पर ई का रात हुआ नहीं था, दर्शक बने हुए थे तो…तो?
पर फिर पता चला कि दंगल के बाद अब डीएनए भी होगा, अब श्री श्री नैनो चिप वाले उस बड़े जुल्फों वाले विद्वान की बाते भी सुने, उनके विश्लेषण के स्तर को साधुवाद रहेगा और फिर यह तय रहा कि श्री श्री को प्रवचन नहीं आता, ये जब कथा करते थे तब दर्शक चैनल बदलकर चित्रहार लगा लेते है अतः इनका जाना ही सही है। दंगल और डीएनए का रिपोर्ट सर्वमान्य और फेविकोल का जोड़ स्थापित…(अब है बाबा?)
खैर तब श्री श्री(रविशंकर नहीं) चैनल छोड़ आये और अपने साथ सड़कछाप का टाइटल भी लाये 😊 और आजकल वो यह सोंच रहे की इस टाइटल कॉपीराइट करा ले नहीं तो यह उपाधि भी बाबा सबको बाँटते रहेंगे…मज़ेदार यह भी है कि उनके उस कार्यक्रम में अब जो आते है वो बड़े प्रसिद्ध गुनी और प्रख्यात है, सब्सक्राइबर उन्हें बेलचट बुलाते है…उस धन्य कथाकारों को नमन।

यह पोस्ट सबको समझ मे नहीं आएगा, जिनको आये वो प्रार्थना करे लिजेंड बाबा और उनका चैनल हमेशा स्वस्थ्य रहे क्योंकि सब्सक्राइबर बहुत है जिनसे आगे देश बनना है।
#व्यंग #सड़कछाप #लेजेंड_बाबा

Photo is just like that, Legend Sir and Shri Shri Both look better.

Open Letter to School Managements

Dear School Managements/Decision Makers,
You are very much aware of the current situation and I am thankful that your school has not halted the process of knowledge sharing and teachers are doing better to keep students engaged through online classes. Thank you for giving them the authority to do so. I am writing this letter to share my three concerns and would be happy if you already applied these, If not please do so and thank you for the same in advance. Below are my requests/concerns.
1. You know Online classes require more preparedness from a teacher, it requires added skillsets and it is not an easy job but they are doing it. Almost every private teachers are taking classes during this locked-down which should be appreciated with timely salary. (Still, there are many schools which haven’t paid for March.)
 
2. Another fact is online classes need least infra expenses and almost every school is using free tools to cater to education and hence they must give a fair relaxation to the parents or a kind of #Giveup campaign can be run for efficient parents and aids can be provided to comparatively EWS, this is what a wonderful family can do to fight it together.
 
3. Need not to forget that the marginalised ones are the support staffs, be it transport staffs, cleaning staffs or others they should be given salary on priority, as they hardly have a saving, reason managements better understand and this can easily be managed by the development fees so far schools have taken.
 
On a lighter note public gathering is not allowed so all your unnecessary expenses are managed, use those funds for your extended family members i.e. your staffs.
 
Written because I had an input that some of you read me and expects that It goes to yous in the right frequency.
Best Wishes.
#ShowSomeValue #FightItTogether

मदर्स डे विशेष

कल फेसबुक पे नहीं था क्योंकि घर में था, अपने बेटे के पास, मेरे पापा के साथ, साथ में उसकी माँ भी थी और मेरी माँ भी… इतवार बहुत अच्छा गुजरा। मुझे मदर्स डे की जानकारी नहीं थी और न ही कोई फेसबुकिया इमोशन जागा था पर जब भाई ने सुबह-सुबह माँ फोन कर विश किया तब मालुम हुआ। खैर मैं ढीठ हूँ, मैंने उसके बाद भी माँ को विश नहीं किया और बस उसके साथ हमेशा की तरह चिढ़ना-चिढ़ाना में भिड़ा रहा…
बाद में जब अपने कमरे में आया तो बीबी ने आकर समझाया कि आज तो पूरी दुनिया माँ को सिर्फ मान दे रही है फिर आप आज भी बच्चों की तरह कर क्यों रहे हो? ये बेवजह का चिढ़ना-चिढ़ाना….मैंने बिच में ही टोकते हुए कहा कि मैं आज भी उसका बच्चा ही तो हूँ और जैसे तुम्हारे अद्विक को तुम्हे कुछ बताने के लिए शब्द नहीं चाहिए, मुझे भी नहीं चाहिए। माँ के साथ हूँ, माँ सब समझ रही है तभी उसको माँ ने बाहर बुलाया, शायद वो हमे सुन गयी थी।
अब वापिस जब मेरी बीबी आयी तो बोली की माँ को मार्किट जाना है… लो अब तो मैं और चिढ गया कि यार शाम में मुझे वापिस गया जाना है और इस धुप में बाहर! पर माँ ने कहा था, मदर्स डे के दिन एन्टी मदर टैग न बीबी लगा दे तो मैंने हामी भरी और तुरत तैयार होकर बाजार के लिए निकले जहाँ माँ एक घड़ी के दुकान में लेकर गयी, बोली प्रीती के लिए घड़ी देखनी है, मुझे anniversary गिफ्ट का सुझा कि अभी ही ले रही , पर उधर जा कर उसने मेरे लिए घड़ी खरीदी, बाद में कहा कि प्रीती के लिए अगले सन्डे जब आओगे तब ले लेंगे…
जब घर पहुंचे और सबको मिठाई दी तो बीबी बोली कि खूब हो आप तो, मदर डे पर बस मिठाई? मम्मी को तो कुछ अलग दीजिये, फिर मैंने चिढ़ाते हुए अपनी घड़ी दिखाई….. और त्वरित कमेंट आया कि आपका सिर्फ इनकमिंग है? हम दोनों नोक झोंक में उलझ गए और माँ मुस्कुराते हुए चली गयी और फिर उसने सबको मिठाई, समोसा दिया।

शाम में घर से निकलते वक़्त उसके जब पाँव छुए तो उसने 100 रूपये का नोट जेब में डाल दीया…हम बोले की कल सैलरी आ जायेगी माँ, वो बोली अगर नहीं आती तो 100 रूपये में जी लेता क्या? दोनों हंसे और फिर मैं घर से गया के लिए निकल गया।

अभी रात में 1 बजे जब गया पहुँच गया तब जाकर घरवालों को नींद आयी है। बीबी को अब भी चैन नहीं थी, बोली अगली बार जब आप आएंगे मैं और आप दोनों चलेंगे और कुछ मम्मी के लिए खरीदेंगे.. हम मुस्कुराये बोले हमारा तो सिर्फ इनकमिंग है, हाँ अगर तुम कुछ कांफ्रेंस टाइप करा दो तो जरूर चलेंगे.. उ बुझी नहीं, हम बुझाए नहीं पर मेरी और अद्विक दोनों की माँ, और सबकी माँ बच्चों को बुझती है भले शब्द हो या निशब्द…
मेरा अद्विक मुझे वो सब याद दिला रहा जो मुझे कभी याद नहीं था, आज जान रहा हूँ की बच्चे कैसे अपने माँ को उसकी धड़कन से, उसके शरीर के गर्मी से जान लेता है और कैसे एक माँ पूरी रात जगकर अपने बच्चे को फीड करती है पर नाराज नहीं होती, न किसी को खबर होने देती की उसको रात भर जगना परा. अब ये भी जान रहा हूँ की एक बच्चे और माँ दोनों का जन्म भी एक ही दिन होता है दोनों के लिए हर दिन विशेस है..
#मदर्स_डे_विशेष

The Shrewd Teacher

There was a man who wanted to rule the people but he was not strong enough to fight, He was not rich enough to lure people by money but he was shrewd enough to find more fools and so he became a teacher.
Yes, a teacher, who actually had the vision to rule, to live a lavish life, to enjoy all good and bad this world can offer, so he initiated the process. And step1 was to teach…
He called some prospects whom he thought to be fit to become his disciple and like every teacher, before starting the course he shared the classroom rules as…
Rule 1. You have to accept the formulas driven by me.
Rule 2. You will understand the formulas on your own and If you don’t; It means you are not efficient enough and your brain is not worthy
Rule 3. I would give prizes and a certain share of my income to those who understand the formulas and help to grow more disciples to me.
Very few got convinced and rest of them have left the Teacher.
Now everyday teacher was giving them the new formulas and disciples were remembering those as there was no room to reason or build logic before memorizing but yes some formulas were good, some were not of use, some had values and some derogatory and students wanted to raise a question but they very well knowing that they are into “NO QUESTION ZONE” and if they ask their brain will be labelled as a fool and no students like to have this level, isn’t it? So all students started following the teacher blindly and in fact, they were waiting for the fruits, the prize and share promised.
Meanwhile, the teacher was noticed by an ultra-rich woman who was impressed by teachers success and proposed him to get married. Now when they got married it was a buzz in the city because the teacher had nothing except few students and the woman had everything, so this talk made people vigilant and this is all what teacher had planned for Step 2.
Now Teacher initiated Step 2, As promised to students, he given good clothes, sweets and a handsome amount to his disciples and asked them to deliver formulas as it is and added that these formulas are so great that only genius can understand so you don’t have the discussion, those who will understand will join our Institute and rest will be blinded because the formula has not chosen them. He promised more share this time with the students.
Like every other Industry, this education industry also had a great competition and other teachers, who were still unknown to his vision behind teaching were discussing in a great surprise as they can’t believe how he can have a such number of students, he who hardly can understand or add any value to life but then the city was going mad with that teacher who has revolutionised the process by paying to students, and now even unemployed teachers started flowing with herds. Soon he got recognised as the kindest teacher in the city and the numbers get multiplied in no time.
With these great responses Now the teacher had called disciples and started step 3, and asked them to have a relation with only those who understand the formula and those who don’t are fools, so just ignore. With such a huge mass, he slowly pushed all his items, his disciple’s centres products became the master of masters. Very soon almost everyone in fear of the loose business started joining the camp and his monopoly got awarded. (A wise man had stated that If a speaker and his audience both knew that it is a lie and still they appreciate each other then such lies are not a crime.)
Now He who actually wanted to rule had initiated his final and 4th stage by adding another formula. He said all these formulas which I’ve driven are the only truth which will help this world to rotate if you stop spreading formula this world won’t rotate, so you all are a saviour and you have to safeguard this formula always. He added You all are genius who understand it, and the only genius brains will understand it all and we don’t want to defame this city with fools living here, so let’s share this formula to all, If they understand fine or else they should leave this city because this city is great, this formula is great..Some monitors shouted our Sir is Great Our Sir is Great…and then that teacher became the ruler without thrones, who killed the quests in mind and made it barren. Logic and reasoning were not allowed there anymore.
(Disclaimer- This story is a pure lie and Shri Shri (Ravishankar Nahi) doesn’t take any responsibility if you resembles the characters. Sharing or copying Intellectual properties are sin and we are not in that city so behave. Take Care.)
BTW on a lighter note, one of my senior who was colleague once had asked me once “Sunny Sir, What do you think what kind of business McDonald doing?” I said it is obvious, tell me what you wanted to..and he added they are actually doing the real estate business, everywhere without owning anything their nameplate is in almost every city….Franchise model we both understand but the message was hidden, Jo dikhta hai wahi ho jaruri nahi hai…Invest your time in reading. Stay Home, Stay Blessed. 🙂

 

मेरे ‘कुछ’ लोग,

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे ‘बहुत’ सारे
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे।

झूठ की राजनीति,
थूक की पन्थनीति,
नापाक करेंगे हमें,
साजिशों की मौननीति!

पत्थरों का फेंकना,
बहादुरों को घेरना,
शर्मिंदा करेंगे हमें,
सच से मुँह फेरना!

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे ‘बहुत’ सारे,
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे।

मीठा मीठा चुनना,
मीठा ही बनना,
बर्बाद करेंगे हमें,
कड़वा सच न कहना!

साथ साथ रहना,
विश्वास कम करना,
चिढायेंगे अब हमें,
आपदा में भी लड़ना!

मेरे ‘कुछ’ लोग,
तुम्हारे बहुत सारे,
बर्बाद करेंगे हमें,
जो मूक रहे प्यारे!
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

यह मेरे उन मानवतावादी मित्रों के लिए समर्पित जिन्हें देश मे बढ़ते सम्प्रदायवाद की चिंता है, जो बंगलादेशी घुसपैठियों के लिए तो खूब चींखते है पर इसी देश के डॉक्टर के लिए कोई चिंता नहीं, पत्थर बरसाने वाली भीड़ पर चुप है, जो अनुराग को शेयर करते है और सलमान होते ही पोस्ट हटाते है, उन महान लोगों को यह समर्पित कुछ शब्द है, समझ आये तो समझे…बाक़ी अपन भी समझने में लगे है।
स्टे होम, स्टे ब्लेस्ड!!

शाहरुख या अनुराग, शेरू को कौन कहेगा कुत्ता?

अगर आपने नोटिस किया हो तो एक चीज जिससे मार्क ज़ुकरबर्ग भी परेशान है वह फेक न्यूज नही है, वह है एक ही न्यूज को शेयर करने के तरीके और टाइमिंग की, ठीक वैसे ही जैसे जामिया की फुटेज जब पुलिस के द्वारा मांगी गई तब तो मिली नहीं और महीने दिन बाद जब वीडियो आई तो टुकड़ों में, वही नकाब लगाए पढ़ाकू बच्चे जिनको पुलिस बेरहमी से पीट रही थी, पर उससे पहले क्या हुआ था, बच्चे नकाब में क्यों थे, ये सब सवाल करने पर आप साम्प्रदायिक हो जाएंगे, फिर भी उस वीडियो को रलीज करने में महीने दिन क्यों लगे होंगे यह आप स्वयं तय करे! खैर आज कुछ और, वह यह कि शुरुआत में #CAA समर्थकों ने जिस तरह शेरू को कुत्ता है-कुत्ता है कहना शुरू किया, वही शेरू जिसने पुलिस पर फायरिंग की तब विशेष लोगो को लगने लगा कि कुत्ता तो उन्हें ही कहा जा रहा, फिर क्या किया जाए, क्या किया जाए तभी सबको बचाने हमारे मैगसेसिया छेनू आये जिन्होंने बड़ी चालाकी से, सोशल मीडिया में फैलती अफवाहों का सहारा लिया, या अफवाह क्रिएट किया और शेरू कुत्ता है या नहीं है कहकर इसकी क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाया और बताया कि यह तो दूसरे नस्ल का है, हमारा वाला तो अलग होता है, फिर क्या शेरू दूसरे का है, एक मिलते जुलते भेड़ की ओर इशारा हुआ, शियार हु-हु करने लगे कि शेरू हमारा नहीं है, यह कुत्ता है, दूसरे का है, कुत्ता है, कुत्ते को फाँसी दो, अब फाँसी मांगती पोस्ट में मुझ बैल को भी मेरे ही एक बछड़े ने टैग किया। मेरा स्टैंड तो वही था/है/रहेगा की तुम्हारा हो या मेरा हो, चुकि अब शेरू वफ़ादार कुत्ता नहीं है, पागल है तो सजा होनी ही चाहिए। उनकी मांगों में फांसी थी, हमने भी कहा दे दो, हमने उत्साह मे यह भी कहा कि तुमको तुम्हारे ऊपरवाले का वास्ता कल को पोस्ट डिलीट न कर देना, समझदार लोग बहुत कम थे पर कुछ वहां भी थे सो लाइक भी आया, हर्ट भी, पर साहब आफत आ गयी, लोकतंत्र पर हमला हो गया, पुलिस ने शेरू को पकड़ लिया, और वह उनका है साबित हो गया। ऐसा होते ही आनन-फानन फांसी मांगते पोस्ट डिलेट होने लगे थे और अब शेरू के एक्सरसाइज करते वीडियो सामने आने लगे, मीडिया उसके अच्छे कर्म ढूंढने लग गई, मालूम हुआ शेरू बिरयानी बाँटता था और टिकटोक वीडियो बनाने में उसका खूब मन लगता था, ज्यादा कुछ (अच्छा) मिला नही जससे उसे सिस्टम का विक्टिम बताया जा सके इसलिए छेनू समाज को सद्भावना का पाठ पढ़ाने लग गए!

खैर वह जमात जो कल तक फाँसी मांग रहा था शेरू को फिर से हीरो बताने लग गया है.. मुझे जो उम्मीद थी, वह ध्वस्त हुई, वह पोस्ट भी जिसमे मुझे टैग किया था मिलता नहीं, सोंचता हूँ कम से कम वह लड़का माफी मांग लेगा पर वह भी उसी दुनिया मे रहना चाहता है, उसकी ख़ैरियत की चिंता है क्योंकि विषपान से भला किसका होता है….पर आरोप सन्नी सर पर है कि आप कुत्तों को कुत्ता कहने से पहले देखते क्यों नहीं कि किसका है..देखना चाहिए क्या?

#डियर_सेकंड_मेजॉरिटी_ऑफ_इंडिया

#डियर_सेकंड_मेजॉरिटी_ऑफ_इंडिया
आज जो लोग भारत के संविधान की दुहाई देते फिरते है, मौजूदा सरकार पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाते है क्या उनसे नहीं पूछा जाना चाहिये की अगर आपको भारत के सम्विधान में अटूट आस्था है तो फिर मज़हबी आधार पर पर्सनल लॉ बोर्ड(आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, आल इंडिया सिया मुस्लिम लॉ बोर्ड, आल इंडिया मुस्लिम वीमेन पर्सनल लॉ बोर्ड, सभी 70 के दशक या उसके बाद बने) की आवश्यकता क्यों??
क्या एक धर्मनिरपेक्ष देश मे इसकी आवश्यकता थी, किन कारणों से आपको अपना अलग लॉ बोर्ड बनाना पड़ता है और क्यों वह बोर्ड इतने सालों से महिलाओं के हक को दबाता रहा?
आज की सरकार देश को खंडित कर रही है, सेक्युलयर सिस्टम को बर्बाद कर रही है, ऐसा वही लोग कहते है जिनके रहते कश्मीर सिर्फ़ मानचित्र में हमारा था और वहाँ भारत के खिलाफ़ जिहाद की फैक्ट्री खोली गई थी, जिनका अपना कानून अपना झंडा था, आज नहीं है तो मोदी देश तोड़ रहा है??
बहरहाल नौकरी की समस्याएं पर सरकार को घेरे स्वागत है, अगर बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए धरने पर जाते है, साथ है, अगर आप CAA से कितने लोगों को नागरिकता मिली यह पूछते है तो जिज्ञासा सकारात्मक है पर यह कहना कि मौजूदा सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव करता है कितना न्यायोचित है स्वयं से पूछे, आपका पर्सनल लॉ बोर्ड सिविल कोड में कितना यकीन रखता है, आप समझते है पर दुर्भाग्य से आपको शिक्षित राष्ट्रवादी आरिफ़ मोहम्मद साहब जैसों की बातें नहीं भाती जो किसी भी तरह के पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ है, आज आप एनपीआर का विरोध करेंगे, सरकार को डेटा जुटाने नहीं देंगे कल अगर यूनिफार्म सिविल कोड का विरोध और सब के पीछे यह कहकर की देश बचा रहे, अगर वाकई बचा रहे है? धर्मनिरपेक्ष है??

Seeker Vs Believer

India was a land of seekers which gradually converted into believers. There is a difference! A seeker wanders, observes, interprets, question and always has an eternal way of understanding but believer just believe, they have a fixed path, similar answers and no quest for themselves. Seekers welcome questions, they answer their questions with many other questions, they keep creating dots and when they join it all, they give a new view to life on the other hand believers just belive. In a single sentence, seekers experiences whereas believers believe others experiences.

All the Heroes from different religions who are worshipped today were seekers, wanderers, they experienced life from a different angle and they just don’t believe something as a believe they question, with themselves and when they understand then they populate it. Today When talking about religion or spirituality is mostly for the conversion of faith or vote and the beauty of the process has been whitewashed. We are too quick to get an answer and the process of exploration, experience has been given less importance. Science has grown exponentially, they are seekers, they don’t believe something just to belive or to create crowd but with the religious world, today questioning religion seems a crime, countries have blasphemy laws, while deep within everyone knows no matter how well you pack, a useless gift is useless only. So instead of packing improve the quality of the gift, instead of expecting from others improve ourselves, instead of a readymade knowledge, enjoy the process to attain it. Life is bigger than rice bags, this land guided the world in the past, this land has given a greater view of life, Steve enjoyed it, you also can!! I am not against believers but the first step is to be a seeker, nature follows it, science follows it, the saints knew its importance and enjoyed life, we all must.

Happy Promise Day, Promise Yourself To Be A Seeker First.

(Seeker – Investigator, explorer, searcher, seeker, investigator)

-Shri Shri (Ravishankar Nahin)

एडवेंचर टू चेंज । परहित में आनन्द

आज इस दशक के पहले दिन काफ़ी सकारात्मक महसूस कर रहा हूँ, यह दशक भारत और भारतीयों का होने वाला है ऐसा पूर्ण विश्वास है और इसके लिए एड़ी-चोटी का प्रयास भी रहेगा।।

दोस्तों बचपन में एक कहानी पढ़ी थी जिसमें एक लेखक हर सुबह समुद्र किनारे एकांत में खुद से बाते करने जाता था, एक रोज जब वह समुद्रतट पर टहल रहा होता है तो उसे दूर एक व्यक्ति पर नजर पड़ती है जो ऐसा लगता है मानो कोई नृत्य कर रहा हो, जिज्ञासा वश उसकी हरक़त को नजदीक से देखने पहुंचता है तो पाता है कि वह व्यक्ति स्टारफिश को पानी में उठा उठाकर फेंक रहा है, इस पर उस लेखक ने उस व्यक्ति से पूछा कि भाई आप ऐसा क्यों कर रहे है तब उस व्यक्ति ने कहा कि जल्दी ही धूप तेज होगी और फिर ये स्टारफिश यहीं बालू पर गर्म होकर मर जायेंगे इसलिए इन्हें वापिस पानी में भेजकर इनकी जान बचा रहा हूँ। लेखक ने फिर उससे पूछा कि समुद्र मिलों-मिल तक फैला है, तुम इतने मछलियों को कैसे बचाओगे, क्या डिफरेंस ला पाओगे? तभी उस नौजवान ने एक स्टारफिश लेकर पानी में उछाल दिया और कहा कि मैंने उसके जीवन में डिफरेंस ला दिया है..यह सुनते ही उस व्यक्ति ने एक रोमांच का अनुभव किया और दोनों कुछ देर तक स्टारफिश को पानी मे फेंकते रहे…..

दोस्तों यब कहानी सिर्फ पढ़ने में आनन्द नहीं आएगा बल्कि इससे प्रेरणा लेने में, इसको जीने में आनन्द आएगा और यही आनन्द कल हमारी Creacting India की टीम को मिला और यह सम्भव हो पाया उन सभी स्नेही-भावुक परहित का ध्यान रखने वाले मित्रों के कारण जिनकी मदद से कल जब दुनिया एक नए दशक के स्वागत में झूम रही थी तब हमारी टीम आपकी मदद से जो भी सम्भव हो पाया उस प्रेम को लेकर, हमने एक नेक कोशिश बोधगया के उन असहाय लोगों के बीच में की जो इस सर्द में भी फुटपाथ पर जीने को विवश है। दोस्तों कल फिर हमारा जीवन धन्य हुआ जो हम कुछ चेहरों पर कुछ पलों का ही सही, मुस्कान लेकर आ पाए।
दोस्तों, कल का अनुभव वास्तव में बहुत भाड़ी रहा, सड़कों पर जीने को मजबूर लोगों में कुछ समय के सताए है, तो कुछ कुसंस्कारों के कारण भी अभागे हुए है, कुछ ऐसे भी लोग है जिनके बच्चे सबल-सफल-चपल है और इनको छोड़ चुके हज ऐसे लोगों का दर्द मानवता पर प्रश्न उठाता है, कुछ लोग परिवार के लिए भी फुटपाथ पर, रिक्शा पर ही सो जाते है, ऐसे मेहनतकश लोगों को हमारा सलाम है। कल इन लोगों के बीच केक काटना, नए वस्त्र, कम्बल और कुकीज़ का वितरण सब आपलोगों के कारण सम्भव हो गया, थैंक्यू, थैंक्यू सो मच!

हम आप लोगों से आग्रह करेंगे कि बेशक आप सबकी मदद न करे, पर अगर आप एक स्टारफिश को भी उसके जीवन को पुनः जीने का अवसर दे देते है, उसे रेत से उठाकर फिर से पानी में फेंक देते है तो निश्चय ही आपका जीवन, यह पोस्ट और creacting india का सपना पूरा हो जाएगा।
इस मुहिम में हमारा सहयोग देने के लिए हमारे टीम मेम्बर्स श्री विनोद कुमार, श्री अभिषेक कुमार, निशा कुमारी, श्री राजू ठाकुर, शिवम कुमार, सीमा कुमारी, राहुल कुमार, माजिद आलम और आँचल सिंहा का धन्यवाद करता हूँ जी इस ठंड में रात के तीन बजे तक इस एडवेंचर को फील करने के लिए सड़कों पे थे, ईश्वर आप सबको सफल बनायें यही आशा।
यह मुहिम अकेले Creacting India के लिए आसान नहीं होता अगर आप लोग साथ न देते, हम सभी आभारी है प्रियंका मैडम(प्रिंसिपल JKY स्कूल) जनार्धन प्रसाद सर, राबिया ख़ानम मैडम, अजय गुप्ता सर, सुमन सागर सर, गजाला मैम, छवि मैम, अर्पणा मैम, प्रशांत सर, प्रवीण सर, ज्योति मैम, निधि मैम, ममता मैम, छोटू सर, संजीव जी, अक्षय कुमार जी, स्नेहा सिन्हा मैम, प्रमोद लाल सर,रश्मि मैम(प्रिंसिपल अध्ययन किड्स) शांतनु सर, सत्यजीत राय सर, रवि कृष्णा सिंह जी, अमित कुमार(डायरेक्टर अध्ययन किड्स), महेश सर (CEO Linguatech), प्रमोद कुमार सिंह-सुनीता सिंह जी, अभिजीत भट्टाचार्य, रीना राय जी, प्रमोद सर और उनका परिवार, मोनी विश्वकर्मा, आकाश सिन्हा जी, अंजन कुमार शरण (MBGB),रोहन गौरव, प्रदीप शर्मा, शगुफ्ता मैडम, अर्चना मैडम, खुशबू मैडम, मिलकिस मैडम, दिवाकर सर, दिव्या मैडम, शालिनी सिंह मैम, गणेश कुमार सर, निकेश सर(डायरेक्टर अजोरा स्कूल) तथा उन सभी मित्रों का जिन्होंने हमारे पोस्ट को पढा और हमें हतोत्साहित नहीं किया, आप सब को कोटि कोटि धन्यवाद और यही प्रार्थना की आने वाला हर दिन आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार करे और आप सब यूंही अपना और औरों के ख्याल रखते रहे।
धन्यवाद

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