कुछ क़दमों तक साथ तो दो..

मत आना साथ मंजिल तक, पर कुछ क़दमों तक साथ तो दो..

मत सजाना मेरी दुनियां तुम, पर एक मीठा याद तो दो..

मत मिलना तुम हकीकत में, पर अपने हसीं ख्वाब तो दो..

मत दो मुझे कोई गम, पर जो भी है तुम्हारे वो बाँट तो लो।

दो पल तेरे साथ चलने से चलना सीख लूँगा, यकीं है..

तेरी यादों से अपनी दुनिया रंगीन कर लूँगा, यकीं है..

ख्वाब तुम्हारे हो तो जिंदगी यूँ ही हसीं हो जायेगी, यकीं है..

तेरे गम बाँट के ही अब मै खुश रहूँगा, यकीं है।

न करो तुम कोई वादा, पर इन्तेजार का हक तो दो..

मत आओ मेरे ख्वाब में, पर उन्हें देखने का हक तो दो..

मत हंसो तुम मेरी बातों से, पर अपने आंसू बाँट तो लो..

मत उलझो मेरी बातों में, पर ये जो भी है उसे सुझाने का मौक़ा तो दो।

तेरे इन्तेजार में भी जी लूँगा, यकीं है..

तेरे ख्वाबों से हकीकत में रंग बिखेरूँगा,  यकीं है..

तेरे आंसुओं को बाँट ही खुश रहूँगा, यकीं है..

तेरी उलझनों  को एक दिन सुलझा लूँगा, यकीं है।

मत बांटो तुम हमसे अपने गुजरे हुए दिन, पर खोयी मुस्कराहट का कारण तो दो..

मत  सुनो तुम अपने दिल की बात, पर इस दिल में है क्या वो बता भी तो दो..

दुनिया आपकी दीवानी हो जायेगी, पहुँचने  का उनको बस पता तो दो..

होंगी हर ख्वाहिश पूरी, अपनी हसरतों को तुम पंख तो दो।

तेरे मुस्कुरा देने भर से गुल खिल जाएगा, यकीं है..

दिल के सारे अरमान पूरे  हों जायेंगे, यकीं है..

खुशियाँ भी अब आपका पता पूछेंगी,  यकीं  है..

तुम हंस के फिजा में फिर से रंग बिखेरोगी, यकीं है।

-सन्नी कुमार
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तुमने अधुरा ही दिया है

खुदा तूने जाने क्या बख्शा है,
जो भी दिया है क्यूँ अधुरा दिया है,
दो पल की खुशियाँ,
और फिर गम ही दिया है।

एक मुझसा दोस्त तुमने मिलवाया,
पर उसको भी तुमने अधुरा ही दिया है,

उस दोस्त को दोस्ती पे भरोसा है कम,
सब बता के वो खुद को छुपा लेती है,
मुझे हंसा कर खुद रोने लग जाती है,
कोशिश भी की मैंने, मिन्नतें भी तुम्हारी,
फिर भी तुमने उसको नहीं हंसाया..?

वो उलझी है किस बात से न ही उसने बताया,
मैंने कोशिश की है पर समझ नहीं पाया,
मैं तो आता कम हूँ तेरे दर पर,
वो जाती अक्सर तुमसे मिलने है,
फिर भी तुमने उसको रुला के सबको हंसाया,
मेरी अर्जी तुमसे वो पालनहारे,
जिसने की है तेरी सेवा,

तू उसकी मुस्कराहट  लौटा दे ,
तूने जो जिंदगी दी है,
फिर पूरी दे ऐसे, उलझी न दे,
है मिन्नतें आपसे आपके ही राह चलूँगा,
आप देना ख़ुशी उसको, तभी अब आपको मानूंगा।

-सन्नी कुमार
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जहाँ हम तन्हां हुए है..

Sunny Kumar
Sunny Kumar

छोटा सा दिल, छोटे-छोटे सारे ख्वाब,
थोड़ी मुहब्बत के साथ, जीने के अरमान..

कोशिश भी की मैंने की करूं जहाँ से प्यार,
जाने क्या बिगड़ा, क्या रूठा, क्या टुटा,
जी न पाया वो पल, था जिसका इन्तेजार..

कई बार कोशिश की मैंने, उन पलों को भुलाऊ..
जिसने रुलाये, जिसने सताए,
जाने क्यों न हँस पाया जब सबने हँसाए..

प्यार की बाते मै तब भी करता था कम,
क्युकी ये चीज बड़ी थी और मेरी हस्ती थी कम.
ये गहराती समुन्द्र, मेरी कस्ती नयी थी,
सपने आँखों में बहुत, पर तब नींद नहीं थी,
वो हकीकत में मिली थी,
फिर ख्वाब की क्या परी थी..

जीन्दगी तब हसीं कहाँ कल की फ़िक़र थी..
खुश था खुद में, नहीं दुनिया की परी थी…
पर वो बात तब की, अब हालात नयी है,
है अब भी साथ वो लम्हे पर सब बिखड़े परे है,
है लगती आज भी महफिलें वहाँ,
जहाँ हम तन्हां हुए है…

-सन्नी कुमार

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Chhota sa dil, chhote chhote saare khwab,
thodi muhabbat ke sath jeene ke arman..

koshish bhi ki maine ki karun jahan se pyar,
jaane kya bigda, kya rutha, kya toota,
jee na paaya wo pal, tha jiske intezaar..

Kai baar koshish ki maine, un palon ko bhulaaun,
Jisne rulaaye, Jishne sataaye,
Jaane kyun na hans paaya jab sabne hansaaye..

Pyar ki baatein tab bhi karta tha kam,
kyun ki ye cheej badi thi aur meri hasti thi kam,
ye gahraati samundar, meri kasti nayee thi,
sapne aankhon mein bahut par tab nind nahi thi,
wo haqeeqat mein mili thi,
phir khwab ki kya pari thi..

Jindagi tab hansi, kahan kal ki fiqar thi,
khush tha khud mein nahi duniya ki pari thi,
par wo baat tab ki hai ab haalat naye hai,
hai ab bhi saath wo lamhein, par sab bikhade pare hai,
Hai lagti aaj bhi maphilein wahan,
jahan hum tanhaan huye hai..

-Sunny Kumar

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आज तुम बिन खुद को खोया हूँ..

{For you my best unseen friend over internet}

खोया था कल तक तुझमे, आज तुम बिन खुद को खोया हूँ..
कभी हर पल थे तुम साथ मेरे, आज मुलाक़ात कि खातिर तरसा हूँ..

ये सच है कि, तेरे होने से ही मेरी हंसी थी, मुश्किलों में भी मुस्कुराने की परी थी,
नहीं लगता था कल तक कुछ भी बुरा, ये जहाँ जन्नत से भी बड़ी थी..

तुम्हारा बिछड़ने को जादू कहना, बेवकूफ को बड़ा लुभाता था,
“हद है” कि तो पूछो मत, उसपे ये दोस्त जान लुटाता था..

इन्तेजार कि बोरियत को भी, संजीदगी से बिताता था,
चाह के भी नाराज़ न हो पाना, कभी कभी सताता था

तुम्हारा करना ख्याल मेरा, मुझको बड़ा लुभाता था,
मुझपे जो था विस्वास तेरा, उसने ही दोस्त बनाया था..

सोचा कई बार इस दिल ने कि क्यूँ कभी ख्वाब में तुम मिली नहीं,
याद आया फिर कि हकीकत कभी ख्वाब में मिलते नहीं…

-सन्नी कुमार
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आ जाओ मिलने इक बार सही…

sunny_kumar_Poemइससे पहली की टूट के बिखर जाऊं,
बिन कहे ही मै, चुप हो जाऊ,
आ जाओ मिलने इस दोस्त से,
कि शायद फिर मै संभल जाऊं..

उलझा हूँ आज क्यूँ, किसको सुनाऊ,
क्या गुज़री है दिल पे, किसको बताऊँ,
आ जाओ मिलने इक बार सही,
की शायद आगे न मिल पाऊं..

बिछड़े हो तुम जबसे, रूठा है दिल मुझसे.
तेरी यादों के सहारे ही, जीता था मै तबसे.
इससे पहले की ये जिंदगी, बिछड़ जाए मुझसे.
किसी बहाने आ जाओ, तुम मुझसे मिलने..

नहीं मांगता मै, गुज़रा ज़माना.
न उन वादों को निभाने का, जोर देता हूँ..
आ जाओ मिलने इस बीते कल से,
मै टूटा आज, ये ख्वाहिश रखता हूँ..

इससे पहली की टूट के बिखर जाऊं,
बिन कहे ही मै, चुप हो जाऊ,
आ जाओ मिलने इस दोस्त से,
कि शायद फिर मै संभल जाऊं..

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Isase pahle ki toot ke bikhad jaaun,
Bin kahe hi mai chup ho jaaun,
aa jaao milne is dost se,
ki shayad phir mai sambhal jaaun..

Uljha hu kyun aaj kisko sunaaun,
Beeti hai kya dil pe kisko bataaun,
aa jaao milne ek baar sahi,
ki aage shayad mai n mil paaun..

Bichhade ho tum jabse, rutha hai dil mujhse,
Teri yaadon ke hi sahaare jeeta tha mai tabse,
Isase pahle ki ye jindagi bichhad jaaye mujhse,
Kisi bahaane tum aa jaao mujhse milne..

Nahin mangta mai gujra jamaana,
na un waadon ko nibhane ka jod deta hun,
aa jaao milne is beete kal se,
mai toota aaj ye khwahish rakhta hun..

Isase pahle ki toot ke bikhad jaaun,
Bin kahe hi mai chup ho jaaun,
aa jaao milne is dost se,
ki shayad phir mai sambhal jaaun..

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