सच को छिपा देता हूँ

IMG-20170822-WA0003लिख के जो लिखना है वो तो मिटा देता हूँ,
फिर लिखता ही क्यूं हूँ जब सच को छिपा देता हूँ ..
ये डर है कि सच की कड़वाहट से सब खफा हो जाएंगे,
इसलिए कर जिक्र झूठ का मैं सबको हंसा देता हूँ..
-सन्नी कुमार

Likh k Jo likhna h wo to mitaa deta hun, phir likhta hi kyun Hu jab sach ko chhupa deta hun 😟
Ye dar hai Ki sanch Ki kadwahat se sab khafaa Ho jayenge,
Isiliye kar jikra jhuth ka Mai sabko hansa deta hun..
-sunny kumar

 

Advertisements

Doha (Two Liners)

Prasu-Kuchipudi (33)कहते है किसी के चले जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होती,
पर क्या साँसों का चलना भर ही जिंदगी है?

[Khate hai kisi ke chale jaane se jindagi khatm nahi hoti,
Par kya sanso ka chalna hi jindagi hai?]

इश्क दुआ है, इश्क नशा है,
इश्क है सांस और इश्क ही हवा है..
 
[Ishq duwaa hai, Ishq nashaa hai,
Ishq hai saans aur ishq hi hawaa hai…]

वो लोग, जो कल तक हमारे लिये दुआएं करते थे,
वही आज तुम्हें भुलाने की सलाह देते है..
[Wo log, Jo kal tak humaare liye duaayein karte the,
wahi aaj tumhein bhul jaane ki salaah dete hai..]

 

हर ख्वाब पूरा नहीं होता,
पर ख्वाब में कुछ भी अधुरा नहीं होता..
[Har khwab pura nahi hota,
par khwab mein kuchh bhi adhura nahi hota..]

मिले फिर वही जो कल भी मिले थे,
पर मिलें इस कदर कि वो बिलकुल नए थे..
[mile phir wahi jo kal bhi mile the,
par mile is kadar ki wo bilkul naye the..]

घुटता है दिल, कुछ कह भी नहीं पाता,
छोड़ गया मेरा कल, आज अब हंस भी नहीं पाता..
[ghutata hai dil, kuchh kah bhi nahi paata,
chhor gayaa mera kal, aaj ab hans bhi nahi paata]

क्या हस्ती है तुम्हारी..
मुहब्बत हम  कर नहीं सकते और नफरत तुम करने नहीं देती..
[Kya hasti hai tumhari..
Muhabbat hum kar nahin sakte aur nafrat tum karne nahin deti..]

अब और नहीं तड़पाओ,
अब और न हमको सताओ,
मै दूर तुमसे चला जाऊं,
आखिरी बार तो मिलने आओ.

[Ab aur nahin tadpaao,
ab aur na humko sataao,
mai door tumse chalaa jaaun,
aakhiri baar to milne aao]

-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

आज सच लिखता हूँ…

guruक्या कहूँ और क्या लिखूँ,
आज अपनी कविता में..?

शब्दों में सिर्फ फूल लिखूँ,
या कांटो संग कहानी भी?
दिल के जो है जज्बात लिखूँ,
या झेल रही परेशानी भी?
जिंदगी के जश्न और जीत लिखूँ,
या चल रही मन में चिंताएं भी?

आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ,
अपनों में अपनी बाग़ रखता हूँ…

हूँ सीधा सरल एक नौजवान,
कामयाबी की ख्वाहिश रखता हूँ,
दिन भर भटकने के बाद,
मायूस होकर सोता हूँ..
अगली सुबह वापिस से,
सपने सच करने को लड़ता हूँ…

क्या कहूँ और क्या लिखूँ,
मजबूर मन के हालत पे,
आज हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ..

अपनों में अपनी उलझन रखता हूँ..

जान रहा ये मन है मेरा,
माँ(देश) समय आज मांग रही,
पर मुश्किल है बीबी(नौकरी) मेरी,
जो साथ आज नहीं दे रही..
नहीं कर पाना इच्छानुसार,
बड़ा रोष बढाता है,
पर एक छोटी सी कोशिश भी,
बड़ा संतोष दिलाता है..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ,
इस दिल के दीवानगी पे,

आज करता याद माशूक को हूँ,
और अपनों में मुहब्बत रखता हूँ..

इस दिल के है जज्बात निराले,
जो फंसा इश्क के चक्कर में ये,
विज्ञान को भी ये झुठलाये,
जो हो देशों दूर हमसे,
उसको सबसे करीब बताये..
दो पल के इन्तेजार में,
जो हो खुद से खींज जाए,
उसी शख्स से घंटों ये,
माशूक का इन्तेजार कराये..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ मैं,
इस जीवन के बारे में,
एक कोशिश करता हूँ, सच लिखता हूँ,

आज सबको अपनी बात रखता हूँ..

जिंदगी का ये कटु सत्य है,
की जीना हमें अकेले है,
पर माँ-बाप के आशीष तले,
और साथी के साथ हुए,
ये यात्रा सुगम, सहज कटती है..
वैमनस्य से बड़ा प्यार है,
और सेवा है सहयोग में,
कर्मपथ पे बढ़ते जाना,
यही ये जीवन कहती है..

क्या कहूँ और क्या लिखूँ मैं,
आज अपने बारे में,
हिम्मत करता हूँ, सच लिखता हूँ,

अपनों में अपनी बात रखता हूँ..

-© -सन्नी कुमार[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

Share if you care, ignore if its bore. 🙂

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: