इश्क जरूरी, बातें जरूरी..

इश्क जरूरी, बातें जरूरी,
रिश्तों में एहसास जरूरी,
ख़्वाब जरूरी, किस्से जरूरी,
कागज़ पे है स्याह ज़रूरी,
लिखना जरूरी, पढ़ना जरूरी,
जीवन में है बढ़ना जरूरी,
हम भी जरूरी, तुम भी जरूरी,
अपनों सा से मिलना जरूरी….

कोशिशें जरूरी, क़ामयाबी जरूरी,
कहने को कुछ क़िस्से जरूरी,
शामें जरूरी, रातें जरूरी,
आशाओं के भोर जरूरी,
कृष्ण जरूरी, राधा जरूरी,
प्रेम दीवानी मीरा जरूरी,
इश्क़ जरूरी, बातें जरूरी,
रिश्तों में एहसास जरूरी।
© सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Ishq jaruri, baatein jaruri,
Rishton me ehsaas jaruri,
Khwab jaruri, kisse jaruri,
Kaagaj pe hai syah jaruri,
Likhna jaruri, padhna jaruri,
Jeevan me hai badhna jaruri,
Hum bhi jaruri, tum bhi jaruri,
Apno sa se milna jaruri….

Koshishe Jaruri, Kamyaabi Jaruri,
Kahne ko kuchh kisse jaruri,
Shaamein jaruri, raate jaruri,
Aashaon ke bhor jaruri,
Radha jaruri, Krishna jaruri,
Prem ki maari meera jaruri,
Ishq jaruri, baatein jaruri,
Rishton me ehsaas jaruri..

© Sunny Kumar Advik

जो कहना चाहते उनसे

जो कहना चाहते उनसे,
वो भाव जुबां पर ला नहीं सकते,
मचलते है जो उनके ख़्वाब,
हक़ीक़त उनकी, उन्हें हम पा नहीं सकते,
बड़ा खूब है उनसे मेरा नए दौर का इश्क़,
वक़्त से देर है दोनों, पर दोष किसी को दे नहीं सकते,
मुहब्बत निर्मोही जो रिश्तों में,
उन्हें बराबर लिख नहीं सकते…

लुभाती है उनकी बातें,
उन्हें सुनने को जीते है,
पर वो जो कहना है उन्हें हमसे,
वो हमसे कह नहीं सकते,
उनकी आँखों में हर पल है,
पर दिल में हो नही सकते,
वो जो कहना चाहते उनसे,
वो भाव जुबां पर ला नहीं सकते..

नदी के किनारों सा है ये रिश्ता,
साथ तो है हर-पल में,
पर एक दूसरे से मिल नहीं सकते,
कृष्ण और राधा सी किस्मत,
जुदा जो हो गए कल में,
कम्बख़्त रो भी नहीं सकते,
क्या लिखूं उनपे मेरी कविता,
वो सार है मेरी मगर शीर्षक हो नहीं सकते..

जो कहना चाहते उनसे,
वो भाव जुबां पर ला नहीं सकते,
मचलते है जो उनके ख़्वाब,
हक़ीक़त उनकी, उन्हें हम पा नहीं सकते,
बड़ा खूब है उनसे मेरा नए दौर का इश्क़,
वक़्त से देर है दोनों, पर दोष किसी को दे नहीं सकते,
मुहब्बत निर्मोही जो रिश्तों में,
उन्हें बराबर लिख नहीं सकते…

©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

मुझे क्यों तुमसे प्यार है

तुम पूछती हो न कि मुझे तुमसे क्यों प्यार है,
होठों पे क्यों तुम्हारा ही नाम है,
तो सुनो एक सच तुमको आज दिल से मैं बताता हूँ,
चाहा है जबसे तुमको हुआ तबसे मुझे खुद से ही प्यार है..

तुम्हारे होंठों पर जब भी सजता हूँ मैं,
सच है सुकून में तब होता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखे मुझे ख्वाब दिखाती है,
मेरा होना इनमें मुझे खुद से ही मिलवाती है,
सच है कि मुझे इश्क़ है तुमसे बेपनाह,
क्योंकि यह मुझमें इंसान बसाती है…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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