सारी-सारी रात जागे

सारी-सारी रात जागे,
तुमसे मुहब्बत की आग जागे,
हूँ मैं दरिया खुद में लेकिन,
तुमसे ही अब प्यास जागे,
सारी-सारी रात जागे…

मुझमें है जो ख़्वाब सारे,
तुमसे ही अब मिलना चाहे,
हूँ मैं खुद में ख़ल्क़त लेकिन,
तुझमें ही अब बसना चाहे,
सारी सारी रात जागे…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

ख़ल्क़त का अर्थ संसार/दुनिया सर है…

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