हर लब्ज में नाम तुम्हारा है..

Luv3
सुबह की ओस में मैंने, तेरी छुअन को पाया है,
शाम रंगीन आसमा में तेरी हलचल ही देखी है,
इस रात की चांदनी तुम, तुमने ही इसे महकाया है,
जब भी हुयी है ये आँखें बंद, इसने सपना तेरा ही सजाया है।
तेरी नाराजगी में मैंने खुद को महफूज़ पाया है,
तेरी खुशियों में मैंने खुद को ही अब पाया है,
जब भी सुनी है हमने, धुन तेरे धड़कन की,
उसने भी मेरे सुर से ही अपना धुन मिलाया है।
खुशियाँ जो भी मेरी है, अब इनमें नाम तुम्हारा है,
चाहत दिल में जो भी है, अब इनपे हक तुम्हारा है,
जिंदगी कल की देखि नहीं मैंने , पर मेरा हर आज तुम्हारा है,
आँखों का इन्तेजार, नींदों में ख्वाब, हर लब्ज में नाम तुम्हारा है।

– सन्नी कुमार

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