ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम

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ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला उस खुशबू को,
हो कम जिससे इस दिल के जख़म,
और सांस मिले इन सांसो को,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला मेरी चाहत को…

होगी सहमी-सिहरती मेरी परी,
उसे प्यार के चादर में लिपटा,
हो रही आस में आँखें पत्थर,
उसको मेरे जज़्बात बता,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

मेरे शब्दों का कुण्डल बनाके,
ऐ सर्द हवा उसको पहना,
है जमा रही मुझे दूर की सर्दी,
मेरे महबूब को मेरी रज़ा बता,
ऐ सर्द हवा कर इतना रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
दूर ले जा धूंध की दूरी को,
खिले जीवन में फिर इश्क़ के धूप,
तू संग ले आ मेरी रौशनी को,
तापे तुम संग फिर अलाव मिलकर,
ये हसरत उस तक पहुंचा…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
मेरे ख्याल बता मेरी प्रियतम को,
लौटे जल्दी ही मिलन के लम्हे,
और ख्वाब खिले फिर जीवन में,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को….
-सन्नी कुमार

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