मैं उनसा होना चाहता हूं

कुछ लोग मेरी मजबूरी है,
कुछ लोगों की मैं मजबूरी हूँ,
कुछ हुए अब तक मजबूर नहीं,
मैं उनसा होना चाहता हूँ…

कुछ को शोर शराबे की आदत,
कुछ चापलूसी के नायक है,
कुछ बचे है अब भी कर्मों के सिपाही,
मिल जिनसे रोज मैं सीखता हूँ।

कुछ बातों के अधिनायक है,
कुछ चुप्पी के महासागर है,
कुछ कर्मपथ के शांत सरोवर,
मैं जिनको लिखना चाहता हूं।

कुछ लोग मेरी मजबूरी है,
कुछ लोगों की मैं मजबूरी हूँ,
कुछ हुए अब तक मजबूर नहीं,
मैं उनसा होना चाहता हूँ…
©सन्नी कुमार

Advertisements

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: