क्यों मुस्कुराता हूँ तुमको देख..

IMG_20170528_213434.jpgक्यों मुस्कुराता हूँ तुमको देख,
क्यों रखता हूँ मैं तुमसे आस,
कभी बैठो फुर्सत में पास,
मैं तुमसा ही तो हूँ…

जैसे तुम्हारी जुल्फें शरारती,
वैसे ही मेरा मन,
जैसे तुम्हारी नज़रें लुभाती,
वैसे ही मेरे शब्द,
जैसे तुमको अपने है प्यारे,
वैसे ही मुझको ख्वाब,
जैसे तुमको बच्चे रीझाते,
वैसे ही मुझको बचपन,
जैसे तुम्हारी जुल्फें है नटखट,
वैसे ही मेरा मन….
-सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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