बधाई हो वोटर हुआ है!!

sunny-kumar-121विचित्र भारत! जहां एक ओर किताबों में जातिवाद के दोष पढाये जाते है तो दूसरी ओर राशन कार्ड, नौकरी और तमाम सरकारी कामों में जाति पूछा जाता है. जहां सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च न्यायायिक संस्था को धर्म और जात के नाम पर चुनाव लड़ना गलत लगता है पर अल्पसंख्य्क, SC,एसटी मतलब धर्म और जाति के आधार पर मिलने वाले रहम जायज़ लगते है, पूछ सकता हूँ कैसे?

विचित्र भारत! जहां सरकार उद्योगपतियों के साथ पीपीपी मौडल बनाकर काम करती है, उन्हें अरबों का ऋण देती है पर किसानों के लिये उसके सारे योजना हवाई होते है, फुस्स होते है, हद तो ये है की किसानों का शोषण किया जाता है, जब फ़सल नहीं हुयी तो नुकसान किसान का, अगर खूब हो गया तो 2 रुपये किलो बेचने को मजबूर होना होता और शायद यही कारण है की किताबों में कृषी को घाटे का शौदा और जुआ कहा गया है, और आज की युवा खेती से दूर भाग गयी है पर अगर किसान बनने बंद हो जाए, खेती को शौदा न समझ सेवा समझने वाले न रहे तो जीवन बचेगा? उगाना छोड़ दिया, खाना छोड़ सकेंगे.? नहीं न? तो फिर खेती शौदा है ये पढाना बंद करेंगे? सरकार कुछ हिम्मत किसानों संग दिखायेगी या सारा विकास कुछ चंद क्षेत्रों के विकास से ही हो जायेगा??
विचित्र भारत! जहां चपरासी बनना हो तो शैक्षनीक योग्यता तय है पर राजनेता अंगुठा टेप कर भी बन जाते. क्यों क्या नेताओं के अनपढ़ होने से उनके निर्णय का असर समाज, देश पर नहीं परता? अगर नहीं तो फिर नेताओं की जरूरत ही क्यों?
विचित्र भारत जहां जनसंख्या विस्फोट की स्थिति के बावजूद बच्चों के जन्म पर इनाम(प्रोत्साह्न) राशि मिलता है. क्यूँ? क्या सरकार ये सोंचती है कि बधाई हो वोटर हुआ है!!

 

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आरक्षण का आधार

WP_20170705_06_48_43_Proआरक्षण समर्थकों के घिसे पिटे बण्डलबाजीयों में से जो सबसे प्रमुख है उनमें से कुछ को यहाँ बाँटना चाहूंगा। आरक्षण समर्थकों के अनुसार दलितों और पिछड़ों का शोषण हुआ था, उन्हें समाज में दुत्कारा गया इसलिए उनको बढ़ने का असवर देने के लिए आरक्षण आवश्यक है।
वैसे आपको वो ये बताने में असमर्थ होंगे की शोषण किसने किया? जवाब में कोई तर्क नहीं मिलेगा बल्कि फिर से बण्डलबाजी की मनुस्मृति में ये है, वो है और ब्राह्मणों ने दोहन किया….अब हम और आप, बल्कि वो भी जानते है कि मनुस्मृति कोई पढ़ता नहीं, आजादी से पूर्व ब्राह्मण नहीं बल्कि अंग्रेज और फिर उनसे पहले मुगलों, नवाबों का शाशन था फिर ब्राह्मण अकेले कैसे शोषण कर सकता था? दरअसल हर कायर एक कमजोर दुश्मन चाहता है, इनको भी चाहिए होगा? (कायर-आरक्षण समर्थक, कमजोर- ब्राह्मण, अपवाद की गुंजाईश हर जगह होती है)

हास्यास्पद ये है कि वो वर्षों की गुलामी का नारा लगा देते है, अधिकार मांगते है पर ये नहीं स्वीकारते की असमानता हमेशा थी, है और रहेगी पर आरक्षण जैसी व्यवस्था जो एक कोढ़ है भारत को न केवल पीछे धकेलती है बल्कि समाज में वैमनश्य और जात-पात की राजनीति को बढ़ावा देती है। वो आपसे ये भी न कहेंगे कि 70 साल के बाद अभी कितने साल और आरक्षण चाहिए।

खैर आरक्षण समर्थकों का एक और दलील है कि भारत में उनको नीच समझा जाता है, उनको कोई अपनी बेटी नहीं देता, न समाज इज्जत, मंदिरों में उनके प्रवेश पर रोक है, और वो असमानता के शिकार है। यहाँ मैं उनसे थोड़ा सहमत हूँ की उनसे असमानता होती है, बल्कि असमानता का शिकार तो हम आप, हर कोई है…देखिये जो इज्जत ‘बच्चन’ को मिलेगा वो ‘बेचन’ को नहीं मिल सकता न इस बात को लेकर बेचन को ईर्ष्या करना चाहिए बल्कि उसे इस सत्य का भान होना चाहिए की बच्चन(प्रतिभावान) कोई भी बन सकता, बेचन से बच्चन बनते देर नहीं लगती। उदाहरण के लिए हजारों नाम है जिनको दुनिया बिना उनके जात को जाने भी इज्जत देती है और ये असमानता दुनिया के हर कोने में मिलेगा। अब कुछ लोग हमें काफीर कहते है तो क्या किसी के कहने से हम कुछ हो जायेंगे?? हाँ, हमारा कर्म हमारी पहचान है और अगर काम 4th ग्रेड का हो तो इज्जत 1st ग्रेड की मिल सकेगी? ये तो नौकरी, बिजनेस, व्यवहार समाज हर जगह लागु है.. यहाँ कर्म की प्रधानता है। वैसे वो आपको ये नहीं बताएंगे की आज कोई उन्हें बाध्य नही करता की वो एक तय काम ही करे बल्कि जात का प्रमाणपत्र भी वो खुद बनवाते और फिर कहते की जातिवाद से नुकसान है उनका।

वो ये भी नहीं कहेंगे कि 70 सालों में आरक्षण ने देश का कितना भला कराया है और कितना नुकसान। हाँ उन्हें ये चाहिए क्योंकि उनको किसी ने बताया है कि उनके दादा-परदादों का सोशन हुआ। ये वोट बैंक की राजनीती का बड़ा हिस्सा बन गया है जो राष्ट्र को भारी नुकसान पहुंचा रहा और समाज को बाँट रहा है ऐसा मुझे लगता है।

वैसे यहां क्या मैं पूछ सकता हूँ की जो लोग आज 4थ ग्रेड, बोले तो सेवा कार्य, नौकरी कर रहे उनको भी आरक्षण मिलेगा या ये सुविधा सिर्फ मनु के प्रशंशकों(वही जो पढ़ते कम जलाते ज्यादा है) के लिए है???? और शोषित समाज का timeline तय कर दिया गया है? क्योंकी आज भी नौकरियों में कम पैसे पर लोगों को रखा जाता है, काम लिया जाता है, पर इन बेचारों के लिए किसी मनु ने कुछ नया लिखा नहीं है तो क्या इनके पोतों(ग्रैंड सन) के लिए भविष्य में आरक्षण मिल सकता है?

एक और खतरनाक बकवास होता है उनके पास की मंदिरों में पंडितों का 100 प्रतिशत आरक्षण क्यों है, अब उनको हजार बार हजार लोगों ने समझाया होगा कि भाई जो मन्दिर बनायेगा वही पुजारी निर्धारित करेगा, तुम एक मंदिर बना लो बन जाओ पुजारी कोई रोकेगा नहीं, अगर रोकता है तो on कैमरा क्रांति कर दो, पर तुम कुछ क्यों करोगे तुमहे तो दान का लोभ है, फिर कटोरी का जुगाड़ कर लो, सबकुछ पंडितों को ही नहीं मिलता.. पर इत्ती सी बात भी न समझेंगे और जातिवाद से लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाके ऐसी तैसी करा लेंगे…..

आप क्या कहते है???

बाकि प्रतिभा बेमेल है, विजयी है जिससे सबको सहमत होना है, सो प्रतिभावान बने, निर्विवाद बने।

-सन्नी

Relation between Religion and Reservation

Here i have shared a conversation with my brother last saturday, hope you will understand, what he thinks of religion and reservation.

Tullu Chhotu
Tullu Chhotu

Junior- Bhaijee i have decided, i will change my religion
Senior- Kyu be?? why do u want to change your religion? You know we are following the best way to reach god and lucky that here you can worship whom you want, no extreme thoughts no hate. Then What you didn’t like about our religion.
Junior- Bhaijee, I don’t know what you are saying, i even don’t know why do we need religion and don’t believe that there is someone who is ruling this world. I just want to change my religion and i have a good reason.
Senior-Ok, so you don’t believe. But i believe that there is a master who is operating, you can call it a super natural power, you can call it Krishna, Allah or God. See, To believe something is always good and it will give you positive energy, nothing harm and even sometime you will feel touched and loved if you start believing.
Junior- I am not getting you, i just want to change my religion.
Senior- Ohhk, what happened to you suddenly, you were much interested in all pooja ceremony, was attending all devotional programs then what happened suddenly.
Junior- Bhaijee, do you believe supreme is one?
Senior- Yes I do.
Junior- Then what is wrong if i change my religion?
Senior- Boss, there is nothing wrong if you change but before you change your religion you should know what religion is?
Junior- Hmm please tell me what religion is?
Senior- Look, As i said you before that there is only one supreme and we call it with different different names, as we all have different languages and we all are following different path. It is like same that to reach Kharauna (खरौना) people use different paths. ok, and you too know that some paths take you faster to the destination, some paths are more enjoying some are bit difficult. Religions are made to reach the supreme and you can consider all religion as a path, nothing else. And remember, your goal should be to reach The Supreme, to purify your soul and you should not hurt other people, no matter what path they are using, and you should stand for truth.
Junior- Bhaijee i am not getting everything but i am convinced with your words and can say that there is nothing wrong if i change my religion, i also assure you that i won’t tease you for following the old, ancient religion and will appreciate others. You should also support if i choose a new path. And most importantly i am also going to reach the same supreme.
Senior- Haan there is nothing wrong but i also said that every path is not convenience pleasurable and pious.
Junior- Ok ok, but i will change my religion and will reach to supreme, i found some way where i can get fruits while my journey?
Senior- Which fruits are you talking about?
Junior- Bhaijee, Reservation. Indian government gives reservation to Minorities, SC, ST and OBT, i want to get reservation benefit, i have seen some of non deserving fellows getting job, they are privileged than us and now when i can not change my caste so i decided to change my religion. Do you have problem…..??

 

[My Take- I am another general guy not only with qualities but also in government data. Being a Bhumihar Brahman, we get respect in society for free, history says we have given many of Maharishi’s, kings, freedom fighters and farmers but now it seems like we are paying for our rich history. In education, job, politics and everywhere general guys have to be excellent to get an average job and on the other side so call unprivileged guys are getting things what they don’t deserve. In Kharauna i have seen many of average guys who has stopped dreaming of government jobs and started their own work or joined private companies, luckily most of them are happy with their work and pseudo society status but i am not. I hate reservation, i can’t find a single reason that government is giving these ads to do betterment of people or to divide society, it wanted to nurture unprivileged or to stop talents. No one is blind here and can see the bad impact of this baseless, biased reservation system but beneficiaries can’t speak against it and generals are not united as most of them have no requirement of jobs. If you are agreed with me share this post if you don’t you are welcome to comment here so that we can discuss.]

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