मुझे क्यों तुमसे प्यार है

तुम पूछती हो न कि मुझे तुमसे क्यों प्यार है,
होठों पे क्यों तुम्हारा ही नाम है,
तो सुनो एक सच तुमको आज दिल से मैं बताता हूँ,
चाहा है जबसे तुमको हुआ तबसे मुझे खुद से ही प्यार है..

तुम्हारे होंठों पर जब भी सजता हूँ मैं,
सच है सुकून में तब होता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखे मुझे ख्वाब दिखाती है,
मेरा होना इनमें मुझे खुद से ही मिलवाती है,
सच है कि मुझे इश्क़ है तुमसे बेपनाह,
क्योंकि यह मुझमें इंसान बसाती है…
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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