ये तो बस मेरा मन जानता है

या कि कृष्णा जानता है,
या ये दिल जानता है,
क्या है तुम्हारे होने का मतलब,
ये तो बस मेरा मन जानता है…

या कि गुनगुनाती हवाएं जानती है,
या मेरा हर सांस जानता है,
कितनी है मुझे जरूरत तुम्हारी,
ये तो बस मेरा रूह जानता है…

या कि फूलों पे मंडराता भँवरा जानता है,
या बारिश में झूमता मोर जानता है,
कितनी मिलती है मुझे खुशी तुमसे मिलके,
ये मुझसे मिलने वाला हर फ़कीर जानता है…

या कि वर्ल्डकप को निहारता तेंदुलकर जानता है,
या कि गोलपोस्ट में गोल करता मेस्सी जानता है,
कितनी मिलती है मुझे खुशी तुम्हें मुस्कुराता देखकर,
यह तो चेकमेट करता हर आनन्द जनता है…

या कि कृष्णा जानता है,
या ये दिल जानता है,
क्या है तुम्हारे होने का मतलब,
ये तो बस मेरा मन जानता है…

-©सन्नी कुमार

Advertisements

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: