ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम

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ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला उस खुशबू को,
हो कम जिससे इस दिल के जख़म,
और सांस मिले इन सांसो को,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तू बसा के ला मेरी चाहत को…

होगी सहमी-सिहरती मेरी परी,
उसे प्यार के चादर में लिपटा,
हो रही आस में आँखें पत्थर,
उसको मेरे जज़्बात बता,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

मेरे शब्दों का कुण्डल बनाके,
ऐ सर्द हवा उसको पहना,
है जमा रही मुझे दूर की सर्दी,
मेरे महबूब को मेरी रज़ा बता,
ऐ सर्द हवा कर इतना रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
दूर ले जा धूंध की दूरी को,
खिले जीवन में फिर इश्क़ के धूप,
तू संग ले आ मेरी रौशनी को,
तापे तुम संग फिर अलाव मिलकर,
ये हसरत उस तक पहुंचा…

ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
मेरे ख्याल बता मेरी प्रियतम को,
लौटे जल्दी ही मिलन के लम्हे,
और ख्वाब खिले फिर जीवन में,
ऐ सर्द हवा कर थोड़ा रहम,
तु बसा के ला मेरी चाहत को….
-सन्नी कुमार

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Thank you for inspirations…

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प्यार न करो

प्यार जगा कर कहती हो क्यूं,
कि प्यार न करो,
आँखों को ख्वाब दिखाकर कहती हो क्यूं,
कि ऐतबार न करो,
मेरे दिल में बसती हो तुम,
तुम्हारी हसरतें सजाता हूँ,
तुमको है खबर सबकुछ फिर भी,
कहती हो क्यूं कि प्यार न करो।
-सन्नी कुमार

क्या इजाजत है तेरी…. (Some Random Posts…)

IMG_20170724_163431ख्वाब में देखूँ तुम्हें यही अब हसरत है मेरी,
तुम आओगी क्या कह दो,
कि मुझे जरूरत है तेरी,
पढूं नज़रों को तुम्हारे,
लिख दू्ं दिल, तुम्हारे हवाले,
महका लूं तुम्हारे जिक्र से तन-मन,
कहो क्या इजाजत है तेरी… 😍😜
-सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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