वो सावन अब तक नहीं आया

आज अपनी ही तस्वीर देखी तो कमबख्त ये ख़्याल आया,
कि लिखते रहे औरों को इतना डूबकर कि खुद का ख्याल भी नहीं आया,
औरों को लुभाने की चाह में मैं खुद को ही भूला आया,
आज कहते है सभी अपने कि थोड़ा मैं भी मुस्कुरा लूं,
पर कैसे कि वजह लेकर वो सावन अब तक नहीं आया..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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अक्सर झूठ सच का लिबास पहने आते है

हक़ीक़त रूठी परी है कबसे,
फिर भी ख्वाब रिझाने आते है,
है सब स्व में ही मगन फिर भी,
वो मेरे है दिखाने आते है..

क्या कहूँ क्या लिखूं तुमसे,
कि तुम्हें तो बस पढ़ने अक्षर आते है,
पढो गर पढ़ सको भावों को,
कि वहीं तुम्हें इंसान बनाते है..

पर्सनालिटी डेवलपमेंट का है ये दौर,
की यही तुम्हें त्वरित नौकरी भी दिलाते है,
पर जीवन में चरित्र निर्माण भी है जरूरी,
कि अक्सर केवल मुखौटे काम नहीं आते है..

वक्त की पहचान सीख लो ऐ सन्नी,
कि अपने भी इसी को देख कर मिलने आते है,
जिंदगी में जरूरी है कि तुम सही समझ रखना,
कि अक्सर झूठ सच का लिबास पहनकर आते है..

©सन्नी कुमार

उनके इकरार की बातें

उनके साथ जो गुज़ारे, उस शाम की बातें,
वो निश्छल-निगोड़ी, इज़हार-ए-इश्क की बातें,
आज मौसम ने फिर बहाई है जो मिलन की बहार,
तो याद आईं हमें, उनके इकरार की बातें।

वो जो साथ थी मेरे, उनके यकीन की बातें,
वो जो उतर गई साँसों में, उस एहसास की बातें,
आज शहर में फिर मन रहा है जो इश्क का त्योहार,
तो याद आई हमें, उनके इकरार की बातें।

थी बहुत खास जो उस हंसी रात की बातें,
जलन चाँद को जिससे उस बेदाग की बातें,
आज फिर इश्क ने जो है दुनिया को संवारा,
तो याद आई हमें, उनकी कही-अनकहीं बातें।

उनके साथ जो गुज़ारे, उस शाम की बातें,
वो निश्छल-निगोड़ी, इज़हार-ए-इश्क की बातें,
आज मौसम ने फिर बहाई है जो मिलन की बहार,
तो याद आईं हमें, उनके इकरार की बातें।
-सन्नी कुमार

मैं काफ़िर हूँ मेरे यारों

(१)
न गीताग्रंथ जपता हूँ,
न आयत-ए-क़ुरआन रटता हूँ,
मैं काफ़िर हूँ मेरे यारों,
नेकी को सजदा करता हूँ।

है किसी को दीन की चिंता,
किसी को धर्म का है ख्याल,
मैं आशिक हूँ मेरे यारों,
दिलों की बात करता हूँ।

न जन्नत की मुझे ख्वाहिश,
न जहन्नुम का डर सताता है,
मैं ख्याली हूँ मेरे यारों,
ख्वाबों से हक़ीक़त सजाता हूँ।

कोई है ढूंढता रब को,
कोई ईश्वर से आस रखता है,
मैं मिलता हूँ जिससे भी,
उसी में रब ढूंढ लेता हूँ।

न गीताग्रंथ जपता हूँ,
न आयत-ए-क़ुरआन रटता हूँ,
मैं काफ़िर हूँ मेरे यारों,
प्रकृति से प्रेम करता हूँ।

है मेरी भावनाएं जो जिंदा,
तकलीफों को जान लेता हूँ,
वो जो कुछ कह नहीं सकते,
मैं उनकी बात करता हूँ।
©सन्नी कुमार

युवावों का देश, युवाओं के नारे

युवावों का देश, युवाओं के नारे,
सत्ता में गायब है फिर भी बेचारे।
पक्ष जिनको पकौड़ा तलना सीखा रहा,
और विपक्ष पत्थरबाजी जिनसे करा रहा,
नाज करे क्या उस युवादेश पर,
जो मुल्क की बर्बादी के नारे लगा रहा?

सत्ता कहती है- मरता है रोहित मरने दो,
कन्हैया-खालिद को कचड़ा करने दो,
इनको ॐ-सुंदर-सत्या से अनजान रखो,
बस इनकी लाइक-कमेंट की भूख बरकरार रखो।
ये फिर कल पकौड़ा या पत्थर चुन लेंगे,
और तब हम इनको कार्यकर्ता मुफ्त में रख लेंगे।

ये तोते है रट लगाएंगे,
पर तुम तो बस जाल फैलाओ,
जात-धर्म और ऊंच नीच में,
हर बार खुदी ये फस जाएंगे,
बड़ी जल्दी में है इनके चाहत का ट्रिगर,
ये बर्बादी तक इसे चलाएंगे।

कैसे करु मैं नाज इस युवादेश पर,
जो सियासत का बनता चारा है,
दिन रात है रहता रटता किताबें,
ले-देकर नौकरी की आस में जीता है,
सत्ता-सियासत ने जिसको बस वोट है समझा,
क्या वो क्रांति की जुर्रत रखता है?
©सन्नी कुमार

बुद्धिपिशाच

धूप से ही सही,
कुछ बाल पक जाने दो।
हर महीने जो मिल लेता हूँ नाई से,
ये गलत आदत बस छूट जाने दो।
फिर तो आदमी मैं भी बुद्धिपिशाच दिखूंगा,
बस एकाध नीलाम हुए तमग़ा मिल जाने दो।
-सन्नी कुमार

वो ख्वाब हो रोज अब सिरहाने में मेरे..

IMG-20180213-WA0018काश सुन ले कभी वो कहानी मेरी,
हो जाउं मुकम्मल गर हो जुबानी मेरी..
है जो तस्वीर बनाया शब्दों से मैंने,
वो अब रूबरू मिले, है ख्वाहिशें ये मेरी..

काश जल्द ही अब वो शाम भी आए,
दो चाँद हो जब आँगन में मेरे..
हूँ महकता जिसके जिक्र से रोज,
वो ख्वाब हो रोज अब सिरहाने में मेरे..
-सन्नी कुमार

दहेज का इतिहास

IMG-20180121-WA0003उत्तर वैदिक काल में विवाह के समय पिता अपनी पुत्री को अपनी इच्छा अनुसार उपहार दिया करते थे जो पहले से निश्चित नहीं हुआ करता था, मध्यकाल में इस उपहार ने अपना स्वरूप बदला और फिर यह स्त्रीधन के रुप में जाने जाना लगा। स्त्रीधन का उद्देश्य कन्या को उसके पारिवारिक जरूरतों समेत ऐसी वस्तुओं को देना था जो उसके बुरे वक्त में काम आए, इसमें धन सम्मिलित था और यह राज परिवारों विशेषकर राजपूतों में प्रचलित था और कन्यापक्ष इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखते थे। मध्यकाल में स्त्रीधन संपन्नो तक सीमित था और पूर्णतः ऐच्छिक था।
आज जिस दहेज की बात करते है उससे ग्रसित थोड़ा-बहुत मै और आप,सब है। आज इच्छा नगण्य और दवाब का दानव इतना बड़ा है कि कन्या के जन्म से ही उसका परिवार शादी की चिंताओ में मरने लगता है। यह दहेज़ रूपी शैतान बेटी का खून कभी उसी के माँ-बाप से(भ्रूण हत्या) तो कभी दहेज़ लोभी पति से करवा देता है।
ऐसे में सरकार ने जो पहल की है वो सराहनीय है, जितने बच्चे व नवयुवक आज इस मानव श्रृंखला में सम्मिलित हुए उनमें सेअगर एक चौथाई भी दहेज़ को खारिज कर दे तो संभवतः आनेवाले दशक में यह शैतान दम तोड़ देगा।
बहरहाल यह शोध का विषय अवश्य है कि दहेज़ शब्द और इसके शैतानी संक्रमण की शुरुआत कब और कहाँ से हुई।
शुभकामनाएँ
साभार
सन्नी कुमार

जी. डी. गोएनका गया के बच्चो ने लहराया परचम

रसलपुर : गया-पटना मुख्य पथ पर अवस्थित जी०. डी० गोएंका पब्लिक स्कूल के बच्चो ने एक बार फिर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए अपने विद्यालय और शहर का सम्मान बढ़ाया । NIIT द्वारा आयोजित इस सत्र के सबसे बड़े आई टी इवेंट “आई टी फेस्ट-2017” जिसमे राज्य के विभिन्न विद्यालयों से चयनित छात्रों के बीच आई टी क्विज प्रतियोगिता प्रतियोगिता कराई गई थी , प्रतियोगिता ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल में हुआ जहाँ राज्य के विभिन्न शहरों से चयनित दस सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के बीच दो चरण में प्रतियोगिता कराया गया , जिसमे विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक सन्नी कुमार के नेतृत्व में आंठवी की छात्रा गीतांजली कुमारी, सातवी के छात्र आदित्य मेहता एवम रोनिल सिंह ने भाग लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हुए प्रतियोगिता में रनर अप ट्रॉफी सुरक्षित किया । बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की बच्चो की इस शानदार सफलता से अभिभूत विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती निधि जोशी ने सफल छात्रों को बधाई देते हुए सभी छात्रों को और लगन के साथ अध्ययन में और रूचि लेने के लिए प्रेरित किया और कहा कि छात्रों का परिश्रम ही उनके समाज और देश को भविष्य में उज्जवल बनाएगा ।छात्र ये ना समझे कि वो सिर्फ खुद के लिए पढ़ते है ,उनकी सफलता से उनका परिवार , विद्यालय और शहर भी गौरान्वित होता है अतः विद्यार्थियों को अपने पढाई को लेकर गंभीर होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हज़ारो सफलता उन्हें मिले। इस कार्यक्रम का सञ्चालन NIIT पदाधिकारी अमित कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ जहाँ आरा समेत राज्य के कई गणमान्य उपस्थित थे ।

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G D Goenka’s Computer Teacher Mr. Sunny Kumar  receiving Runner Up Trophy

NIIT_IT_FEST_WINNER_2017
Goenkan Students once again given their best and secured runner up position for their school and added more colours on the Schools’s success canvas. It was an opportunity created by NIIT Limited where Top 10 Schools (those are following NIIT NGuru curriculum) have participated for IT Quiz based on computer knowledge and IT awareness. It held at Gyan Jyoti Public School, Arah.
There were 10 Teams having each of them as 3 members have participated in Quiz. From GD Goenka Geetanjali Kumari of Grade VIII and Ronil Singh and Aditya Mehta of Grade VII have not just participated but came out with flying colours.

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