सनम बनाना चाहता

IMG-20170630-WA0027खूबसूरत हो इतना कि तुमसे ख्वाब भी शरमाता है,
चांद की चांदनी भी तुम्हारे सामने फीका नज़र आता है,
मैं और मेरी बिसात क्या, जो भी देखे तुमको उसे प्यार हो जाता है,
जानेमन तुम नूर हो, ये दिल तुमको सनम बनाना चाहता है।
-सन्नी कुमार

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आज तू और आसमां

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Wd Love

आज तू और आसमां, मुझपे दोनों ही मेहरबान है..

तुम्हारे एहसासों की गर्मी और ये बारिश की नरमी,
हर रिश्ते की गर्माहट, देती खुशियों की नई आहट,
सपनों से अपनों तक का करता आज सफर,
ये खूबसूरत लम्हें ही तो है, जिनपे करूं मैं खूब फकर..

आज तू और ये रेल, मुझपे दोनों ही मेहरबान है..
तुम्हारे दिल पे मेरा जोर, और इंजन के सीटियों का शोर,
है ये रोमांचकारी भोर, जो ले जा रहा सपनों की ओर,
सरपट दौड़ता ट्रेन का चक्का, और साथ तुम्हारा पक्का,
ये मिट्टी की ख़ुशबू वाला इत्र, और तुम्हारा मेरे कंफर्ट को लेकर फ़िक्र,
ये खूबसूरत यात्राएं हीं तो है, जिनका करूं मैं खूब जिक्र..
-सन्नी कुमार

बस मुस्कुरा देता हूं…

तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
-सन्नी कुमार

तुम्हारा जिक्र जरुरी है..

My Secret Diaryजिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है,
प्यार से महके मेरा जीवन,
सो तुम्हारे यादों का इत्र जरुरी है..
जिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है..

बेहतर है आज मेरा कल की रूसवाइयों से,
पर इस वर्तमान के मोल की खातिर,
तुम्हारा इतिहास जरुरी है..
जिन्दगी के किताब में,
तुम्हारा जिक्र जरुरी है..
-सन्नी कुमार

क्यों न जनता बागी हो जाए?

हाल के दिनों में जो घटनाएं बिहार में फलित हुयी है उनमें मोटा मोटा ये रहा कि सरकार शराब बन्दी को लेकर सरकार काफी शख्त दिखी और इसके लिए उन्हें धन्यवाद, पर क्या शराब ही एकमात्र बिमारी है इस बदहाल बिहार का? नहीं! यहां बेरोजगारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, जनसंख्या और सबसे घातक बीमारी, अपराध रहा है पर दशकों से बिहार की आम जनता न्याय को तरस रही है और उन्हें मिला कुछ नहीं, बल्कि अपराध और अपराधी खुले घूमते है, चाहे शहाबुद्दीन हो, राजबल्लभ, रॉकी यादव् या सैकड़ों छोटे बड़े नाम जिन्होंने आम जन का शोषण किया हो… बिहार की मिट्टी मानों अपराध के लिए और भी उर्वर हो गयी है। यहाँ निवेश के नाम पर कुछ नहीं है, काश यहाँ के करोड़पति नेता ही कुछ बिजनेस शुरू करते और लोगों को रोजगार देते पर नही ये गरीबी को सिर्फ मुद्दा मानते है और ये वही मुद्दा है जो इन नेताओं को गद्दी तक पहुंचाता है सो ये कतई गरीबी को खत्म या कम करने का प्रयास नही करेंगे.
इन्हीं शिकायतों को, मेरी पीड़ा को यहाँ कविता के रूप में पढें, सहमत हो तो शेयर करें।

तुम निर्लज्जों के ओछे कर्मों से,
लज्जित हुए हम पछताते है,
अखबारों के पन्ने हरदिन जब,
तुम्हारे काले कर्मों से भरे पाते है,
क्यों देते है वोट तुम्हें हम,
सोंच सोंच जल जाते है।

कैसे हो तुम जनता के सेवक,
जो जनता का सोशन करते हो,
फटेहाल हर दूसरी जनता,
और तुम मेर्सेडीज में घूमते हो,
करते हो तुम कौन व्यापार,
जो अकेले ही फलते हो,
रोजगार के त्रस्त है जनता,
क्यों उनको भी अवसर नहीं देते हो?

बाँट बाँट कर धर्म-जात में,
तुम अपना हित बस साधते हो,
टोपी-तिलक और ऊंच नीच में,
जनता को भरमाते हो,
और अभिनव भारत के सपने पर,
मौन मोहन बन जाते हो।

लूट-गबन और हत्या से तुम,
कौन सी कीर्ति रचते हो,
शर्म नहीं आती क्या तुमको,
जो दोहरी नीति रखते हो,
जनता को तुम नित नियम सिखाते,
और खुद अपराधियों से साठ-गांठ रखते हो,
जनता को मिले अब न्याय भी कैसे,
तुम जो न्याय को बंधक रखते हो..

कहो क्यों न जनता बागी हो जाए,
और फ़ेंक उखाड़े सिस्टम को,
क्यों न उठा ले शस्त्र खुदी हम,
न्याय, धर्म की रक्षा को,
मिलते है जो अपराध को शह अब,
क्यों न मार भगाये इन नाकारों को,
कब तक सहे आखिर हम जनता,
तुम भ्रष्ट सत्तासुख लोभियों को?

अब जब मिलता न्याय नहीं,
न बनती है हक़ में कानून,
कब तक रखे धैर्य हम जनता,
कब तक रखें हम सब मौन,
क्यों न खुद की किस्मत अब खुद ही लिख लें,
कहो, अब क्यों न हम बागी हो जाए?
-सन्नी कुमार

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