दिल से दिल तक..

तुम्हारी आँखे और मेरे शब्द,
दोनों बहुत कुछ कहते है,
तुम्हारी जुल्फें और मेरे शायरी,
दोनों बहुत शरारत करते है,
तुम्हारा पढ़ना और मेरा लिखना,
दोनों कामयाब जोड़ी बनते है,
तुम्हारा होना और मेरा खोना,
दोनों कई रोज़ कहानी गढ़ते है।
©सन्नी कुमार
#बेमेल #कुछ खास नहीं

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लम्हों से पूछों दिन सदियों सी होती है..
वो सामने हो तो समंदर है, न हो तो बोझिल लगती है,
उसका आना सर्द हवा है, जो साँसों को सुकून देती है,
उसका होना बारिश के जैसा, जो तन-मन को जीवन देती है,
उसका मिलना है संगम हो जाना, जो कामनाओं के कुम्भ लगाती है,
उससे दूरी लम्हों से पूछो, जब दिन सदियों सी होती है।
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

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