क्या इसलिये मोदी सही नहीं?

चुनाव समीप है जरा विचारिये की मोदी से इतर हमारे पास विकल्प(अगर है तो) क्या है? कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता बतायेगा कि UPA का प्रधानमंत्री उम्मीदवार कौन और किन कारणों से है और वह किस मामले में मोदी से बेहतर है(हो जाएगा नहीं)? NDA और UPA से अलग कोई अन्य गुट भी है क्या, अगर है तो उसके बॉस कौन है(होंगे)?
हर सवाल सत्तापक्ष से ठीक है पर जो मोदी विरोध में देश का महत्वपूर्ण समय बर्बाद करा रहे उस Congrace और उसके पैरविदार मीडिया वाले क्या नमो बनाम अन्य भावी PM उम्मीदवारों में तुलनात्मक विश्लेषण करने का हिम्मत रखेंगे?
आजकल वामपंथी अख़बार मोदी को राफेल, नोटबन्दी और रोजगार सृजन न करने को लेकर घेर रहे है और इसमें वो सफल भी हो रहे है पर मोदी नहीं तो कौन? क्या मुल्क कोशिश करने वाले को ठुकरा कर उनको ले आएगी जिनका पक्षतापूर्ण रवैया एक डरावना सपना था? क्या हम उस दौड़ की वापसी चाहेंगे जब कहीं भी कभी भी पब्लिक प्लेस में बम फट जाता था, क्या हम वह दौड़ फिर से जीना चाहते है जब एक सिलिंडर रिफिल कराने के लिए पूरा दिन बर्बाद करना होता था या कालाबाजारियों से ब्लैक में लेना होता था? क्या हम मनरेगा में फिर उन लोगों को नौकरी दिलाना चाहते है जिनको गुजरे जमाना हो गया? I mean तब तो रोजगार कार्ड उनके भी थे जो न थे? क्या हमें सरकारी सब्सिडियों का सीधे एकाउंट में आना, सिस्टम का ट्रांसपेरेंट होना खटकता है? साहब, आप सम्पन्न है वरना उज्ज्वला योजना से गरीबों को क्या मिला है वह हम जैसे गांव से जुड़े लोग जानते है, मुफ्त में कनेक्शन चूल्हा-सिलिंडर सब, फिर भी आप नाराज है क्यों? प्रधानमंत्री आवास योजना से बनते घरों का जायजा लीजिये इसके लिए दिल्ली के न्यूजरूम से, फेसबुक की दुनिया से निकलकर गाँव आना होगा और फिर तुलना कीजिये। शायद आप हवाई जहाज से घूमते है वरना सड़कों पर हुए काम आपको अवश्य दिखते, 5 साल पहले बिजली कितने घण्टे थी और अब कितनी है, कई गांव ऐसे थे जो अब तक अंधेरे में थे अब वहां बिजली है तो क्या इसकी तारीफ नहीं होगी? नोटबन्दी से परेशान हम भी हुए थे पर 10-20-50 नोट बदलना इतना भी मुश्किल नहीं था और अगर यह प्रयास फेल रहा था तो mygov.in पर सुझाव दे सकते थे, दिया था? राफेल 10 साल तक नहीं लाने वाले अब भी नहीं आने देना चाहते और पूरा विरोध इसी के लिए है पर मोदी और राफेल दोनों थोड़े महंगे है पर जरूरी है क्योंकि अब कैंडल जलाने वाला देश नहीं चाहिए, गांधी टोपी पहन अपना उल्लू सीधा करने वाला नेता नहीं चाहिए अब नेता वह हो जो कोशिश करे सफल हो असफल हो पर कोशिश ईमानदार हो, और फिर टारगेट हिट करे। ऐसा क्यों है कि Dawn और The Hindu का स्वर समान लगता है ऐसा क्यों है कि जो प्रश्न पाकिस्तान के है वह हमारा विपक्ष पूछता है, ऐसी कौन सी दिक्कत हौ कि विपक्षियों से ज्यादा पाकिस्तानी लोग मोदी विरोध के कैम्पेन में लगे है?(कृपया कर मेरा यकीन न करे और फेसबुक ट्विटर और ब्लॉग्स पढ़े आप भी मानेंगे कि पाकिस्तानियों में मोदी को लेकर क्या बेचैनी है.)
तब 2014 में मनमोहन बनाम मोदी का दृश्य नही था, लोगों ने सेंट्रल गवर्नमेंट को फेल मानकर और मोदी को सफल प्रशासक के रूप में स्थापित होने के बाद ही देेश की कमान दी थी और लोगों का मानना था कि गुजरात मॉडल पर देश विकास के पटरी पर तेज दौड़ेगा, लोग सन्तुष्ट भी है और असंतुष्ट भी पर अब जब एक बार फिर से चुनाव का अवसर है जाना है तो तथाकथित बुद्धिजीवी लोग विकल्प में क्या सुझाएंगे? क्या मोदी के मीडिया को सरकारी खर्च पर विदेश भ्रमण न कराने के कारण भी लोग नाखुश है? क्या कालाबाजारी करते लोग भी नाखुश है? क्या ब्लैक से सिलिंडर बेचने वाले युवा बेरोजगार है इसलिए नाखुश है? क्या पूर्व प्रधानमंत्री की तरह इन्होंने देश की संसाधनों पर मज़हब विशेष का पहला हक़ नहीं दिलाया इस लिए नाखुश है? क्या OROP की लंबी मांग सुने जाने के कारण लोग नाखुश है? क्या 1 रुपये में मिलने लगे इन्सुरेंस से और जन धन के अत्यधिक खुल गए एकाउंट से लोग(बैंककर्मी) नाखुश है? क्या अभिनन्दन के सकुशल लौट आने से आप नाखुश है? क्या आप शांति पसन्द लोग है और उड़ी और आप सर्जिजल स्ट्राइक से आप नाखुश है? या आरक्षण की राजनीति करने वाले लोग सवर्णों के लिए घोषित 10% आरक्षण से नाराज है? या आप कुम्भ के दौरान गंगा की अविरल-निर्मल धारा से परेशान है? क्या अन्य नेताओं की तरह मोदी ने भी खुद की मूर्ति का लोकार्पण कर दिया या नेहरू से भी बड़े हो गए सरदार के कद से दिक्कत है? डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, मुद्रा योजना जैसी योजनाओं से कैसा दिक़्क़त या आपकी दिक्कत इस बात से है कि गाँव के लौंडे स्टेशन की फ्री wifi का उपयोग कर आपसे बेहतर विश्लेषण कर देते है और आपको TV स्क्रीन काला करना परता है तो कभी TV न देखने की सलाह देनी पड़ती है। बेशक इन पाँच सालों में बहुत असहिष्णुता हुई है नेताजी से जुड़े अधिकांश दस्तावेज आज पब्लिक डोमेन मे है, 70 साल बाद आजाद हिंद फौज के क्रांतिवीर इंडिया गेट पर पैरेड में शामिल हुए, क्या आप इस विचार से घबराते है?
मोदी निःसन्देह बेहतर नहीं हो सकते पर उनके नियत पे शक किन कारणों से इसको स्पष्ट करेंगे क्या विपक्ष में बैठे लोग? आज नीरव मोदी और माल्या को लेकर घेरा जा रहा है, घेरा जाना भी चाहिए पर अगर वह देश भागने पर मजबूर है तो वजह क्या मौजूदा व्यवस्था नहीं है, क्या यह गलत है कि दोनों ने UPA के शासनकाल में ही सरकार और डेढ़ चुना लगाया था? क्या नीरव मोदी के कारण देश नरेंद्र मोदी को ठुकराकर नेशनल हेराल्ड, अगस्ता वेस्टलैंड, 2G, कमन्वेल्थ, कोयला घोटाले करने वाले दल को और उसके चहेते लालू, ममता मायावती को स्वीकार कर ले??
वैसे मेरा राहुल (द्रविड़) आपके राहुल से बेहतर है. सवाल सारे एक साथ देख घबराए नहीं योग्यता अनुसार उत्तर दे, आपको समयसीमा की पूरी छूट है।
-सन्नी कुमार

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