राष्ट्रद्रोही स्वीकार नहीं न ही राष्ट्रवाद के नाम पर उद्दंडता

लखनऊ में हुई कश्मीरी युवक की पिटाई कल सुर्ख़ियों में थी, भगवा गमछे में दो उद्दंड लोगों को ये हरक़त करते दिखाया गया। मीडिया ने इसे खूब परोसा पर इसके कारण को समझने की कोशिश न की गई तो सोंचा कि मैं ये कोशिश कर लूं और जो विचार मुझमें है उसे आपके माध्यम से पूरे देश में ले जाऊं।
दरअसल पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही पूरा देश गुस्से में है और यहाँ कश्मीरियों को यह समझना होगा कि अगर भारत भर पे उनका अधिकार है तो भारतभर का अधिकार भी कश्मीर पर है और एकतरफ जब आप खुलेआम घाटी में, JNU, AMU या विभिन्न सोशल साइट्स के माध्यम से भारत विरोध के घटिया नारे लगाते है तब आम जनता आपके खिलाफ विचार बना लेते है और फिर जब आप ग्रेनेड बरसा सकते है, आतंकियों का खुले समर्थन कर सकते है, बुरहान और अफजल के मय्यत को रिक्रूटमेंट शिविर समझ सकते है तो कुछ उद्दंड तो आपको यहाँ भी मिल ही सकते है जो कश्मीर के बारे में गलत विचार बना ले और फिर उसका खामियाजा आपको भुगतना पड़े। इसलिए बिना मतलब का चिखिये मत और सच को समझिए कि आपने जो बबूर बोया यह उसका एक छोटा सा कांटा है, अगर अब भी न सम्भले तो स्थिति आपके लिए और भयावह हो सकती है और इसके लिए दोषी भी स्वयं आप ही होंगे।
आज की तारीख़ में आप हर भारतीय को गांधी-नेहरू समझने की भूल तो बिल्कुल न करे, थोड़ा इमोशनल, थोड़ा सख्त और राष्ट्रीयता को जीता यह न्यू इंडिया है और इससे गलती न हो यह हम सब की जिम्मेदारी है अतः आप, हम सब सही से रहे…
वैसे जिन समाचार पत्रों के फेसबुक पेज ने इस खबर को प्रमुखता से छापा है उन्हीं समाचारों पर जम्मू में हुए विस्फोट को पढ़िए और खुद इनके एजेंडा को समझिए. धन्यवाद
-सन्नी कुमार ‘अद्विक

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