वो थे सबसे सुनहरे पल..

Miss uuतुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

जब सपनों में तुम थी,
और सामने भी तुम..
जब जिक्र में तुम थी,
जज्बात में भी तुम..
हाँ थे वो सुनहरे पल,
जब पास में तुम थी,
और प्यास भी तुम..

तब मुझमें “मैं” कहाँ था,
बस जी रही थी तुम..
तब मेरा ये जहाँ था,
जब साथ में थी तुम..
जी रहा था जन्नत को जमीं पे,
परी बनके मिली थी तुम..

तुम्हारे साथ बिताये हुए वो पल,
वो थे सबसे सुनहरे पल…

सुबह के धुप में तुम थी,
रात अधेरों में भी तुम..
मेरे अश्कों में तुम थी,
और आशिकी में भी तुम..
दर्द तुमसे था,
दीवानगी में भी तुम..
जी रहा था ख्वाबों को,
जब साथ में थी तुम..

पर जिंदगी अब वो नहीं है,
ना ही साथ में हो तुम..
न दुनिया ख्वाबों की रही,
न चाहत में हो तुम..
दोष किसका दूँ, कहो?
समझाऊं खुद को क्या मैं अब,
कहूँ, दिल था कमजोर मेरा,
या भरोसा तुमको मुझपे कम..
तुम ही बता दो क्या कहूँ,
क्यूँ रूठा मुझसे मेरा कल..?

दीदार हुआ आंखो को उनका..

Cutieeeदीदार हुआ आंखो को उनका,
और दिल ये, उनका हो गया.
उनकी मासुम सुरत पे
फिदा ये मेरा मन हुआ.

आता हर पल ख्याल है उनका
जो मिलती है बस सपने
जिनसे कभी बाते की नही पर,
जिनके चर्चे करता हूँ अकसर.

वो मिले कभी इसे दीवने से,
दिल कि ये एक चाहत है,
सुन ले वो इस दिल की धरकन,
इस दिल की बस एक मन्नत है.

ख्यालो मे उनके खोने लग़े है,
उनके यादो मे अ‍ब तो जीने ळ्गे है.
कभी तो मीलेंगे उससे,
यही सोच अ‍ब तो जीने ळ्गे है..

– सन्नी कुमार

गूंज रही है अब भी वो आवाज़..

Veer-Sweettiiee
गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

मीठी मिश्री सी होगी उनकी आवाज़,
कभी बिन सुने ही सबको बताया था,
हाँ बिलकुल वो मेरे ख्वाबों सी है,
हमने जो कभी फ़रमाया था।

कायल था उनकी सीरत का अबतक,
आज, आवाज़ ने चाहत बढाई है,
सुनता रहूँ अब उनको हर पल में,
हमने यह एहसास जताया है।

ठहरे न पाँव जमीं पे आज,
उसने, ख्वाबों को पंख लगाया है,
जो हसरत उनको सुनने की थी,
हमने उनको हकीकत बनाया है।

गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

हाँ पर गए थे कल शब्द कम,
और समय बड़ी जल्दी में था,
रुका नहीं वो क्यूँ साथ हमारे,
हमें और बहुत कुछ कहना था।

अभी तो उनके हाल सुने थे,
फिर मिलना उनके सपनों से था,
हकीकत क्यूँ ख्वाब के रस्ते आयी,
हमें उन पलों को, और अभी जीना था।

जिनकी आस में हम थे कबसे,
उन लम्हों ने कल गले लगाया था,
है शब्द मेरे से उनके होठों पे,
हमें कल भी ये एहसास हुआ था।

गूंज रही है अब भी वो आवाज़,
जिसने कल मुझे पुकारा था,
दो बातें अपनों सी थी,
हमने जब प्यार जताया था।

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Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

Meethi Mishari si hogi unki awaaj,
Kabhi bin sune hi sabko bataaya tha,
Haan bilkul wo mere khwabon si hai,
humne Jo kabhi farmaaya tha..

kaayal tha unki seerat ka abtak,
aaj unki aawaj ne chahat badhaayi hai,
Sunta rahun unko har pal mein,
Humne yeh ehsaas jataaya hai..

Thahre na paanv jamin pe aaj,
usne, khwabon ko pankh lagayaa hai,
jo hasrat unko sunane ki thi,
humne unko haqeeqat banaaya hai..

Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

Haan par gaye the kal shabd kam,
aur samay badi jaldi mein tha,
Ruka nahi wo kyu saath humaare,
Humein aur bahut kuchh kahna tha..

abhi to unke haal sune the,
fir milna unke sapno se tha,
haqeeqat kyun khwaab ke raste aayee,
Humein un palon ko, aur abhi jeena tha..

Jinki aas mein hum the baithe kab se,
Un lamhon ne kal gale lagaaya tha,
hai shabd mere se unke hothon pe,
Humein kal bhi ye ehsaas huaa tha..

Gunj rahi hai ab bhi wo awaaj,
Jisne kal mujhe pukaara tha,
do baatein apno si thi,
Humne jab pyaar jataaya tha…

– Sunny Kumar

ख्वाब मेरी माशूक है..

Dream n Realityख्वाब मेरी माशूक है,
मेरी उम्मीदों के अनुरूप है,
है इससे मुझे बहुत ही प्यार,
और इसके पलों में भी बस मेरा नाम,
ये छोटी, औरों से हसीन है,
जैसे मेरे लिए मेरी ग़ज़ल है ..

इसको देख कुछ भी हो दिल खुश रहता है,
बिन इसके टूटे पत्तों सा मन फिरता है,
ये ख्वाब मेरी माशूक है,
मेरे दिल के बड़े करीब है..

जी लूँ अपने माशूक के साथ,
नहीं लिखा ऐसा क्यूँ मेरा नसीब है।
बीवी है हकीकत मेरी,
और रहता उसी के साथ हूँ.
ये सच्ची है और मैं कदर हूँ करता,
पर मै झूठा तो अपनी माशूक़ पे  मरता..
Sunny1
जब मिलता है मौका मुझको,
चुपके से उसे बुलाता हूँ,
फिर सतरंगी ख्याली दुनिया में जाकर,
अपना दिल बहलाता हूँ…
है ये बात हकीकत को भी पता,
की मै ख्वाब पे मरता हूँ,
जलती बीबी माशूक से है,
और मै पीसता रहता हूँ,

कई बार कोशिश की है मैंने,
और अब भी कर रहा प्रयास,
कि अंतर न हो दोनों में अब
और जी लूँ मै इनको साथ।।
-सन्नी कुमार
[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी, कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

जहाँ हम तन्हां हुए है..

Sunny Kumar
Sunny Kumar

छोटा सा दिल, छोटे-छोटे सारे ख्वाब,
थोड़ी मुहब्बत के साथ, जीने के अरमान..

कोशिश भी की मैंने की करूं जहाँ से प्यार,
जाने क्या बिगड़ा, क्या रूठा, क्या टुटा,
जी न पाया वो पल, था जिसका इन्तेजार..

कई बार कोशिश की मैंने, उन पलों को भुलाऊ..
जिसने रुलाये, जिसने सताए,
जाने क्यों न हँस पाया जब सबने हँसाए..

प्यार की बाते मै तब भी करता था कम,
क्युकी ये चीज बड़ी थी और मेरी हस्ती थी कम.
ये गहराती समुन्द्र, मेरी कस्ती नयी थी,
सपने आँखों में बहुत, पर तब नींद नहीं थी,
वो हकीकत में मिली थी,
फिर ख्वाब की क्या परी थी..

जीन्दगी तब हसीं कहाँ कल की फ़िक़र थी..
खुश था खुद में, नहीं दुनिया की परी थी…
पर वो बात तब की, अब हालात नयी है,
है अब भी साथ वो लम्हे पर सब बिखड़े परे है,
है लगती आज भी महफिलें वहाँ,
जहाँ हम तन्हां हुए है…

-सन्नी कुमार

[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Chhota sa dil, chhote chhote saare khwab,
thodi muhabbat ke sath jeene ke arman..

koshish bhi ki maine ki karun jahan se pyar,
jaane kya bigda, kya rutha, kya toota,
jee na paaya wo pal, tha jiske intezaar..

Kai baar koshish ki maine, un palon ko bhulaaun,
Jisne rulaaye, Jishne sataaye,
Jaane kyun na hans paaya jab sabne hansaaye..

Pyar ki baatein tab bhi karta tha kam,
kyun ki ye cheej badi thi aur meri hasti thi kam,
ye gahraati samundar, meri kasti nayee thi,
sapne aankhon mein bahut par tab nind nahi thi,
wo haqeeqat mein mili thi,
phir khwab ki kya pari thi..

Jindagi tab hansi, kahan kal ki fiqar thi,
khush tha khud mein nahi duniya ki pari thi,
par wo baat tab ki hai ab haalat naye hai,
hai ab bhi saath wo lamhein, par sab bikhade pare hai,
Hai lagti aaj bhi maphilein wahan,
jahan hum tanhaan huye hai..

-Sunny Kumar

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