जरूरी है मुहब्बत का होना

किसी से बिछड़कर मुझे, मिलने का हुनर है आया,
खोकर ‘खुद’ को मैंने, मेरे खुद को है पहचाना..
वो एक थी कभी जिसके, अरमां दिल में बसते थे,
आज उसी के अक्श को मैंने, जर्रे-जर्रे में है बसाया..
नहीं खबर ये मुहब्बत है या कोई नई दीवानगी,
पर सच है लगता मुझे अब, निर्मोही मोह समझ आया..
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खैर किसी से बातों-बातों में, कुछ बातें निकली थी,
था चर्चा मुहब्बत का सो, दिल भावों से पिघला था,
उकेरे जो मन के भाव उसने, उसे शब्दों ने सहेजा था,
कि उसने पूछा जब मुहब्बत का परिचय,
मैंने कुछ ये सब कह डाला था….
“ये मुहब्बत ही तो है जो जीना सिखलाती है,
हर रात ख्वाबों में बहलाकर, उम्मीदों का सवेरा ले आती है…

मुहब्बत आँखों का हो या भावों का,
जज्बातों का या ख्यालातों का,
ये मुहब्बत चाहे जैसा हो, जिससे हो,
करने वाले को खूब बनाती है,
छूट जाए गर मीत तो ये शायर बनाती है,
और जो मिलन हुआ मुहब्बत में तब,
जिंदगी जन्नत बन जाती है,
बड़ा जरूरी है मुहब्बत का होना,
कि ये आदम को इंसान बनाती है।”
-सन्नी कुमार

जहाँ हम तन्हां हुए है..

Sunny Kumar
Sunny Kumar

छोटा सा दिल, छोटे-छोटे सारे ख्वाब,
थोड़ी मुहब्बत के साथ, जीने के अरमान..

कोशिश भी की मैंने की करूं जहाँ से प्यार,
जाने क्या बिगड़ा, क्या रूठा, क्या टुटा,
जी न पाया वो पल, था जिसका इन्तेजार..

कई बार कोशिश की मैंने, उन पलों को भुलाऊ..
जिसने रुलाये, जिसने सताए,
जाने क्यों न हँस पाया जब सबने हँसाए..

प्यार की बाते मै तब भी करता था कम,
क्युकी ये चीज बड़ी थी और मेरी हस्ती थी कम.
ये गहराती समुन्द्र, मेरी कस्ती नयी थी,
सपने आँखों में बहुत, पर तब नींद नहीं थी,
वो हकीकत में मिली थी,
फिर ख्वाब की क्या परी थी..

जीन्दगी तब हसीं कहाँ कल की फ़िक़र थी..
खुश था खुद में, नहीं दुनिया की परी थी…
पर वो बात तब की, अब हालात नयी है,
है अब भी साथ वो लम्हे पर सब बिखड़े परे है,
है लगती आज भी महफिलें वहाँ,
जहाँ हम तन्हां हुए है…

-सन्नी कुमार

[एक निवेदन- आपको हमारी रचना कैसी लगी कमेंट करके हमें सूचित करें. धन्यवाद।]

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Chhota sa dil, chhote chhote saare khwab,
thodi muhabbat ke sath jeene ke arman..

koshish bhi ki maine ki karun jahan se pyar,
jaane kya bigda, kya rutha, kya toota,
jee na paaya wo pal, tha jiske intezaar..

Kai baar koshish ki maine, un palon ko bhulaaun,
Jisne rulaaye, Jishne sataaye,
Jaane kyun na hans paaya jab sabne hansaaye..

Pyar ki baatein tab bhi karta tha kam,
kyun ki ye cheej badi thi aur meri hasti thi kam,
ye gahraati samundar, meri kasti nayee thi,
sapne aankhon mein bahut par tab nind nahi thi,
wo haqeeqat mein mili thi,
phir khwab ki kya pari thi..

Jindagi tab hansi, kahan kal ki fiqar thi,
khush tha khud mein nahi duniya ki pari thi,
par wo baat tab ki hai ab haalat naye hai,
hai ab bhi saath wo lamhein, par sab bikhade pare hai,
Hai lagti aaj bhi maphilein wahan,
jahan hum tanhaan huye hai..

-Sunny Kumar

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