बिहार चुनाव- मेरा मत

बिहार में ३५ साल कांग्रेस, १५ साल लालू और १० साल नितीश(जिसमे ८ साल सुशिल मोदी के संग) की सरकार रही, बावजूद इसके आज कांग्रेस, लालू, नितीश की तिकड़ी बिहार की दुर्दशा के लिए प्रधानमन्त्री मोदी जी को कोस रही है…

वैसे मै अपने प्रधानमन्त्री के उस बात से सहमत हूँ जहाँ वह यह कह रहे है की मुद्दा बिहार का विकास होना चाहिए मोदी नहीं….

बाकी आप सब की सोच…ये आप ही है जो तय करते रहे है और तय करेंगे की बिहार कितना बढा है और कितना बढेगा.
-सन्नी

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बिहार चुनाव में चारामेल

बिहार को जो पहचान बुद्ध, महावीर, चाणक्य, आर्यभटट, मौर्य, अशोक, शेरशाह, राजेन्द्र प्रसाद, दिनकर, जयप्रकाश न दिला पाये वह पहचान हमारे लालटेन मार्का लालू जी ने दिलवाया, इनके और इनकी पांचवी पास बीबी के 15 साल के राज में बिहार ने इतनी तरक्की की की सारे बिहारियों के रोजगार का प्रबन्ध बिहार में ही हो गया… 90 से 2005 तक में तो बिहार के अंदर रोजगार के इतने अवसर पैदा हुए की हर हुनरमन्द बिना किसी ख़ास लागत के अपना उद्योग स्थापित कर सकता था, अब उद्योग कई थे पर अपहरण में नवयुवक दूरदृष्टी कुशल युवकों का विशेस ध्यान था.
बिहार पुरुष लालू जी के राज में किसान इतने कर्मठ और जुझारू हुए की रणवीर सेना जैसी देशभक्त सेना वो भी खुद के पैसो से बना ली, नक्सली तब एक दम शांति प्रिय हो गए, गरीबों के यहां इतने धन हुए की हमने विश्व बैंक को भी उधार दिया, उस दौर में जो भी बिहारी बिहार से बाहर रहे उनसे पूछिये उनकी कितनी इज्जत होती थी बाहर में और वो कितने फक्र से अपनी पहचान बताते थे..
खैर 15 साल के इस बेहद सफल साशन के बाद भाजपा और जदयू साथ में चुनाव लड़ी और लालू जी को धोखे से हरा दिया गया, उस महान आदमी पर चारा चोरी का लांछन लगा, कोर्ट पे टिपण्णी नहीं पर ये भाजपा, जो फासिस्ट है की साजिश थी और आज लालू को ईमानदार और साफ़ चरित्र होने का प्रमाण पत्र युग के सर्वश्रेष्ठ ईमानदार केजरीबवाल द्वारा जारी किया चूका है इसलिए अब लालू जैसे महान व्यक्ति पर कोई टिका टिपण्णी की गुंजाईश नहीं।
चलिए बात करते है लालू के बिछड़े मित्र विकास पुरुष श्री नितीश की जो थोड़े भटक गए थे, साम्प्रदायिक जुमलेबाज भाजपा के समर्थन से दो चुनाव जीत मुख्यमन्त्री बने पर मोदी जैसे फासिस्ट के प्रधानमन्त्री बनते ही उन्होंने मुख्यमन्त्री की कुर्सी तोड़ी और मांझी को पदासीन किया और फिर लालू जी के सुझाव से बिहार में विकास की बहाली के लिए मांझी को गद्दी से कान पकड़ उठा खुद बैठे.. नितीश जो कभी बहक गए थे और भाजपा के साथ बिहारीयोन को बहका लालू जैसे महान नेता के खिलाफ बोलते थे वो आज सब समझ गए है और कॉंग्रेस्स और लालूजी की मदद से बिहार में पुनः विकास और बिहारियों की खोयी पहचान वापस दिलाने के लिए प्रयासरत है इसलिए मित्रों जुमलेबाज भाजपा के बात में न फंसे, नितीश जी आज प्रायश्चित करना चाहते है, कांग्रेस के पप्पू और आपके अपने महानतम नेता श्री लालू को न केवल वोट दे बल्कि साबित करे की बिहार क्या चीज है, हम अव्वल है और केरल सबसे पीछे, धन्यवाद लालूजी, धन्यवाद राबड़ी जी और हाँ नितीश अगली बार भाजपा के इर्द गिर्द भी फटके तो फोड़ दूंगा…
जय चारा,
जय जातिवाद,
जय बिहार

-सन्नी

मुद्दों पर बोले राजनेता

हाल में प्रधानमन्त्री जी दो बार बिहार आये है और दोनों बार उनका नितीश कुमार की विफल सरकार पर जो शब्दों से प्रहार हुआ है और फिर उनके बयान के बाद जो नितीश लालू और फिर तमाम बिहारी राजनेताओं ने जो अपने मुंह खोले है वो इतना बताने के लिए काफी है की आने वाले चुनाव में ये नेता विकास, समानता,समरूपता, शिक्षा,सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते.
जिस तरह से नितीश कुमार अपने अपमान को बिहार के अपमान से जोड़ना चाह रहे वह बेमानी है क्यूंकि नितीश आज खुद एक जमानत पर छूटे लालू को शरणागत है जो कभी बिहारी छवि को धूमिल करने में अव्वल थे. प्रधानमंत्री जी का नितीश के डीएनए को लेकर किया कटाक्ष अशोभनीय था पर नितीश खुद यह तय करे की जिस जंगले राज के खिलाफ जनता ने उन्हें जिताया उसी जंगल राज की बीज बोना कहा से शोभनीय है?
भाजपा जो आज मोदी के सहारे बिहार में सत्ता में आना चाहती है को भी यह स्पस्ट करना चाहिए की जब तक वो नितीश के साथ थे निकू एक pm मटेरियल थे और अब निकू जब लालू के साथ है तो उनके डीएनए को गलत कह देना कहाँ तक उचित है?
क्यूँ नही बिहार के राजनेता विशेषकर नितीश कुमार, सुशिल मोदी और लालू प्रसाद यादव, बिहार के युवाओ को रोजगार दिलाने का भरोसा देकर चुनाव लड़ रहे है? बेहतर सुविधाओं के नाम पर, विकाश के नाम पर चुनाव लड़ने के बजाय क्यूँ डीएनए, भुजंग प्रसाद और चन्दन कुमार जैसे फालतू चीजों को मुद्दा बनाने की कोशिस कर रहे?
प्रधानमंत्री जिनको बिहार, विशेषकर युवाओं ने पूरा समर्थन दिया है से बहुत उम्मीदें है और हम बिहारी चाहते है की वो इन फिजूल के मुद्दों को हवा देने का मौका, विफल कुमार और चारा चोर प्रसाद को न दें…
और हाँ नितीश के डीएनए से बिहारी डीएनए का कोई मतलब नहीं….नितीश आज पथ खो चुके है और लालू के साथ रहकर बिहार में विकाश की बात करना बीएस छलावा है….इश्वर सद्बुद्धि दे बिहारी नेताओं को और समय रहते अकल आये सबको.

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