दिवाली देशफ्रेंडली बनाये

​दीपावली सिर्फ पर्यावरण फ्रेंडली मनाने भर से काम न चलेगा, रामभक्तों को इस बार की दिवाली को देशफ्रेंडली बनाना होगा अर्थात चीनी उत्पादों को नकारते हुए घर को रोशन करना होगा.. एक और बात, मीठा का मतलब घर के सदस्यों के लिए चॉकलेट का डब्बा नहीं बल्कि घर और पड़ोस के लोगों के लिए मिठाई(भले प्रसाद के रूप में,)भी होता है। वैसे बच्चों में नया संस्कार देना है, कुछ देने की आदत डालनी है तो फिर दिवाली एक बेहतर दिन है किसी जरूरतमंद की मदद करने के लिए, आप बच्चों को प्रेरित कर सकते है कि महंगे फटाकों के क्षणिक सूख से बेहतर है किसी जरूरतमंद को कम्बल देना जो आपको एक अलग अनुभूति प्रदान करेगा, बोले तो मन को अच्छा लगेगा। बच्चे और आप कनेक्ट हो सकेंगे खुद से और राम जी से और फिर मुझे तो ये भी लगता है कि रामजी को घर में नहीं मन में बुलाना चाहिए, और ये बेहतर तरीका है उनको भी खुश करने का। है कि नहीं?

और फिर इस तरह से औरों के संग मिठाई बाँट कर, आसपास सफाई अभियान चलाकर, किसी मदद कर हम दिवाली मनाये, थोड़े कम फटाके फोडे बावजूद बड़ा आनन्द आयेगा…,बाकि हम सब समझदार है।

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