दिल से दिल तक..

तुम्हारी आँखे और मेरे शब्द,
दोनों बहुत कुछ कहते है,
तुम्हारी जुल्फें और मेरे शायरी,
दोनों बहुत शरारत करते है,
तुम्हारा पढ़ना और मेरा लिखना,
दोनों कामयाब जोड़ी बनते है,
तुम्हारा होना और मेरा खोना,
दोनों कई रोज़ कहानी गढ़ते है।
©सन्नी कुमार
#बेमेल #कुछ खास नहीं

—–————————————-
लम्हों से पूछों दिन सदियों सी होती है..
वो सामने हो तो समंदर है, न हो तो बोझिल लगती है,
उसका आना सर्द हवा है, जो साँसों को सुकून देती है,
उसका होना बारिश के जैसा, जो तन-मन को जीवन देती है,
उसका मिलना है संगम हो जाना, जो कामनाओं के कुम्भ लगाती है,
उससे दूरी लम्हों से पूछो, जब दिन सदियों सी होती है।
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

Advertisements

दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूक उठा लूँ

image

दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूक उठा लूँ,
स्याही फीके हो गए, गदर से अपनी बात सूना दूँ,
शिकायतों का हो दौर खत्म,
कपूतों को उनके अंजाम बता दूँ,
दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूकें उठा लूँ।

जेहादी कट्टरता ने बहकाया बहुत, की थोडा इनको भी समझा दूँ,
भ्रस्टाचारी कांपे थरथर, कुछ ऐसी दहशत फैला दूँ,
गधों को घोड़े संग दौराने की जिद को फौरन रुकबा दूँ,
दिल कहता है कलम छोड़, अब बन्दूकें उठा लूँ।

-सन्नी कुमार

Create a free website or blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: