आरक्षण एक भीख है

आरक्षण एक भीख है…क्यूंकि अगर यह उधार होता तो लेने वाले को लौटाना होता, यह पारिश्रमिक भी नहीं हो सकता क्योंकि इसके लाभार्थी इसके बदले कोई सेवा नही देते..और अब अगर ७ दशक बाद भी लोग आरक्षण के लिए सड़कें जाम करते है, ट्रेन की पटरियों पे डेरा जमाते है तो मन खीजता है… कभी जाट, कभी गुज्जर, कभी पटेल…ये गद्दी की ख्वाहिश रखने वाले लोग अजीब अजीब मुद्दों से सीढियाँ बना रहे..
मेरा व्यक्तिगत तौर पे यह मानना है की अगर ७ दशक में आरक्षण आपको नहीं सुधार पाई तो फिर आपका इलाज कुछ और है. और हाँ जिस तरह से भीख लोगों में बेकारी बढ़ाती है, एक अयोग्य भी मांग-मांग कर पूंजी बना लेता है, नशा का लत लगा लेते है, वैसे ही आरक्षण का लिफ्ट चढ़ के कई अयोग्य पूरा इंजिन बर्बाद करते है…
सरकार गरीब परिवार को अवसर दे, उनको प्रसिक्षण दें, और कम से कम कुछ तो ऐसा करे जहाँ हम सब एक हो कर कहें की हम भारतीय है. ये १५ अगस्त २६ जनवरी वाला देशभक्त हर रोज जीए ऐसा कुछ हो..क्यूँ नही कोई ऐसी व्यवस्था की जाए जहाँ हर वर्ग के नवयुवक एक साथ रहे, उनपर सरकार इन्वेस्ट करें और लाभ दोनों को हो. ऐसा माहौल दिया जाए जहाँ कोई जात, कोई धर्म का जीकर न हो, चर्चा हो तो नयी पहचान गढ़ने की, भारत को मजबूत बनाने की. ये बदबूदार जात-पात की राजनीति, ये आरक्षण का टुकड़ा,, इन कुव्यवस्थाओं से बेहतर है एक सैनिक स्कूल जहाँ सबको सामान शिक्षा दे और बदले में सरकार उनसे कम से कम २ साल की सेवा ले ताकि सरकार पर यह प्रशिक्षण बोझ न हो और युवा भी देश के प्रति झुकाव रखें. नये लडको को बेरोज्गादी का खतरा भी न होगा और असमर्थता, बेकारी,और मेधा-बलात्कार का बहाना भी न होगा….काश की सरकार एक ऐसा उपवन लगाए जहाँ नए पौधे, नव-युवकों को एक साथ रखे, राष्ट्रभक्ति सिखाएं, हिम्मत, हौसला बढाये, सबको काबिल बनाएं और इस भीख की लत छुड़वाए..

समृद्ध भारत का सपना आरक्षित कपोलो के सहारे सम्भव नही.. मेधा का हो सम्मान, यही हमारी मांग…
-सन्नी कुमार

#Against_Reservation

Advertisements

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: